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Jharkhand Teacher Exam Scam: हाईकोर्ट जांच शुरू, JSSC भर्ती 2016 में गड़बड़ी पर बड़ा एक्शन

 झारखंड में JSSC शिक्षक भर्ती 2016 की गड़बड़ी पर हाईकोर्ट के फैक्ट फाइंडिंग कमीशन ने जांच शुरू की, सरकार और आयोग से मांगा पूरा ब्योरा।


Jharkhand Teacher Exam Scam : झारखंड में स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2016 से जुड़ी कथित गड़बड़ियों की जांच अब तेज हो गई है। हाईकोर्ट के आदेश पर गठित एक सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमीशन के अध्यक्ष जस्टिस गौतम कुमार चौधरी ने मामले की सुनवाई शुरू कर दी है। शनिवार को रांची के डोरंडा स्थित हाईकोर्ट के पुराने भवन के कोर्ट नंबर-16 में इस महत्वपूर्ण मामले की पहली सुनवाई हुई।

Jharkhand Teacher Exam Scam: हाईकोर्ट के निर्देश पर जांच प्रक्रिया शुरू

सुनवाई के दौरान अभ्यर्थियों की ओर से उपस्थित अधिवक्ताओं ने परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया में हुई अनियमितताओं की जानकारी कमीशन के समक्ष रखी। सुप्रीम कोर्ट और झारखंड हाईकोर्ट के निर्देशों के आधार पर जस्टिस चौधरी ने राज्य सरकार और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग को विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
कमीशन ने स्टेट मेरिट लिस्ट, नियुक्त अभ्यर्थियों के नाम, उनके प्राप्तांक और नियुक्ति की तिथि सहित सभी जरूरी दस्तावेज शपथ पत्र के माध्यम से दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 9 मई को निर्धारित की गई है।


Key Highlights

  • JSSC शिक्षक भर्ती 2016 की गड़बड़ी की जांच शुरू

  • हाईकोर्ट के आदेश पर फैक्ट फाइंडिंग कमीशन सक्रिय

  • सरकार और आयोग से मेरिट लिस्ट व नियुक्ति विवरण मांगा गया

  • कई अहम सवालों के जरिए जांच का दायरा तय

  • रिपोर्ट के आधार पर सरकार लेगी अंतिम निर्णय


Jharkhand Teacher Exam Scam: सरकार को अंतिम निर्णय का अधिकार

हाईकोर्ट की एकल पीठ ने स्पष्ट किया है कि कमीशन की रिपोर्ट आने के बाद अंतिम निर्णय राज्य सरकार लेगी। इसमें योग्य अभ्यर्थियों की नियुक्ति या समायोजन, अयोग्य अभ्यर्थियों को हटाने और दोषी अधिकारियों या कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय या आपराधिक कार्रवाई जैसे अहम फैसले शामिल होंगे।

Jharkhand Teacher Exam Scam: आयोग और सरकार से पूछे गए अहम सवाल

फैक्ट फाइंडिंग कमीशन ने जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं। इनमें पूछा गया है कि क्या दो अगस्त 2022 के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुसार संशोधित मेरिट लिस्ट तैयार की गई थी या नहीं।
इसके अलावा यह भी जानना चाहा गया है कि कम अंक वाले और आरक्षित अभ्यर्थियों को किस आधार पर नियुक्त किया गया, उनकी नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के आदेश से पहले हुई या बाद में।
कमीशन यह भी जांच करेगा कि वर्ष 2019 में अनुपस्थित अभ्यर्थियों की रिक्तियां क्या कम योग्य उम्मीदवारों से भरी गईं, क्या अस्वीकृत अभ्यर्थियों को बाद में नियुक्ति दी गई, और राज्य सरकार के 23 फरवरी 2024 के संकल्प के तहत 9613 रिक्तियां कैसे भरी गईं।
साथ ही यह भी सवाल उठाया गया कि 17,784 विज्ञापित पदों में से केवल 12,046 का ही परिणाम क्यों जारी किया गया।

सुनवाई के दौरान सरकार और जेएसएससी की ओर से कोई अधिवक्ता उपस्थित नहीं था, हालांकि स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के माध्यमिक शिक्षा निदेशक राजेश प्रसाद और जेएसएससी के उप सचिव बशीर अहमद मौजूद रहे और उन्होंने आयोग के सवालों के जवाब दिए।

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