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Jharkhand Vegetable Crisis: किसानों की टूटी कमर, 2 रुपये किलो भिंडी बिकने पर किसान ने फसल पर चलाया ट्रैक्टर

 झारखंड भिंडी की कीमत गिरने से किसान परेशान हैं। लागत नहीं निकलने पर किसान ने खेत में लगी फसल पर ट्रैक्टर चला दिया।


Jharkhand Vegetable Crisis रांची: झारखंड के गोला क्षेत्र में सब्जी किसानों की हालत लगातार खराब होती जा रही है। खेतों में मेहनत से उगायी गयी भिंडी थोक बाजार में मात्र 2 से 5 रुपये प्रति किलो बिक रही है, जबकि यही भिंडी खुदरा बाजार में 15 से 20 रुपये किलो तक बेची जा रही है। खेती की लागत तक नहीं निकलने से परेशान कोरांबे गांव के किसान ने शनिवार को अपनी लहलहाती भिंडी की फसल पर ट्रैक्टर चला दिया।

Jharkhand Vegetable Crisis:40 हजार की लागत, केवल 15 हजार की कमाई

किसान ने बताया कि उन्होंने लगभग 50 डिसमिल जमीन में भिंडी की खेती की थी। इसमें बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी मिलाकर करीब 40 हजार रुपये की लागत आयी थी। लेकिन फसल बेचने के बाद उन्हें केवल 15 हजार रुपये ही मिल सके। इस तरह उन्हें करीब 25 हजार रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। अब उन्होंने भिंडी की खेती छोड़ मकई लगाने की तैयारी शुरू कर दी है।

किसानों का कहना है कि पिछले 10 दिनों में तीन बार डीजल और पेट्रोल के दाम बढ़े हैं, जिससे खेती की लागत और बढ़ गयी है। ट्रैक्टर चलाने के लिए डीजल लाने में भी काफी परेशानी हो रही है। उन्हें घर से 12 से 15 किलोमीटर दूर पेट्रोल पंप जाना पड़ता है। गैलन में डीजल नहीं मिलने से किसानों की मुश्किलें और बढ़ गयी हैं।


Key Highlights

  • गोला में भिंडी थोक बाजार में मात्र 2 से 5 रुपये किलो बिक रही

  • लागत नहीं निकलने पर किसान ने फसल पर चलाया ट्रैक्टर

  • 40 हजार रुपये खर्च कर किसान को केवल 15 हजार रुपये मिले

  • डीजल-पेट्रोल महंगा होने से खेती की लागत बढ़ी

  • खेत से मंडी तक सब्जियों की कीमत दो से तीन गुना बढ़ रही


Jharkhand Vegetable Crisis:व्यापारियों की कमी से औने-पौने दाम पर बिक रही सब्जियां

ईंधन महंगा होने के बाद से   मार्केट में बाहर से आने वाले व्यापारियों की संख्या भी कम हो गयी है। इसका सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है। मजबूरी में किसान अपनी सब्जियां बेहद कम कीमत पर बेचने को विवश हैं। दूसरी ओर खुदरा बाजार में सब्जियों की कीमत कई गुना अधिक बनी हुई है।

थोक बाजार में भिंडी 2 से 5 रुपये किलो बिक रही है, जबकि खुदरा बाजार में इसकी कीमत 15 से 20 रुपये किलो तक पहुंच रही है। इसी तरह करेला थोक में 15 से 17 रुपये और खुदरा में 30 से 40 रुपये किलो बिक रहा है। नेनुआ, बैंगन और मक्का जैसी सब्जियों की कीमत भी मंडी से बाजार तक पहुंचते-पहुंचते दोगुनी से तीन गुनी हो जा रही है।

Jharkhand Vegetable Crisis:बिचौलियों की बढ़ी कमाई, किसान घाटे में

किसानों का कहना है कि खेती करने वाले घाटे में हैं, जबकि बिचौलिये बिना लागत मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। खेतों से सब्जियां सस्ते दाम पर खरीदकर मंडियों और खुदरा बाजार तक पहुंचाने वाले व्यापारी भारी लाभ कमा रहे हैं। खेत से बाजार तक आते-आते सब्जियों की कीमत दो से तीन गुना तक बढ़ जाती है, लेकिन इसका फायदा किसानों को नहीं मिल पाता।

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