Job बनी आफत, जान जोखिम में डाल विद्यालय पहुंचते हैं शिक्षक फिर…

सहरसा: कहते हैं कि शिक्षक समाज और लोगों का भविष्य निर्माता होते हैं लेकिन क्या हो जब शिक्षक ही प्रकृति की मार के शिकार हो जाएं। एक तरफ राज्य की शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को समय से विद्यालय पहुंच कर ऑनलाइन हाजिरी बनाने का निर्देश दिया है। ऐसा नहीं करने पर शिक्षकों को अनुपस्थित माना जायेगा। इधर सहरसा में शिक्षकों को अपने विद्यालय तक पहुंचने में घंटों लग जाते हैं वह भी तीन तीन नदियों को पार करने के बाद वे विद्यालय तक पहुंच पाते हैं। शिक्षक कहते हैं कि एक तरफ विभागीय आदेश दूसरी तरफ जान जोखिम में।

विभाग ने आदेश दिया है कि सभी शिक्षक 9 बजे तक विद्यालय पहुंच कर अपना ऑनलाइन अटेंडेंस बनाएं अन्यथा उनकी उपस्थिति नहीं मानी जाएगी वहीं दूसरी तरफ कोसी नदी समेत तीन नदियां पार करने में घंटों लग जाता है। किसी तरह विद्यालय पहुंच भी जाएं तो वहां मोबाइल में नेटवर्क ही नहीं मिलता है कि समय से अटेंडेंस बना सकें। शिक्षकों ने कहा कि अगर विद्यालय पहुंचने में आधा घंटा की भी देरी हो जाए तो फिर स्पष्टीकरण मांगी जाती है और स्पष्टीकरण नहीं देने की स्थिति में वेतन काट लिया जायेगा।

उन्होंने बताया कि प्रत्येक दिन कोसी नदी समेत तीन नदियां पार कर कटियाही स्थित प्राथमिक विद्यालय पहुंचते हैं। यह विद्यालय सहरसा के नौहट्टा प्रखंड के तटबंध के अंदर में स्थित है। हमारी मुख्य परेशानी है कि अकेले कोसी नदी को पार करने में करीब डेढ़ से दो घंटे समय लग जाता है। उसके बाद ई शिक्षा पोर्टल पर अपनी हाजिरी बनाने के लिए नेटवर्क ढूंढने में भी काफी परेशानी होती है। उन्होंने शिक्षा विभाग से मांग की कि कम से कम बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों और तटबंध वाले इलाकों में ऑनलाइन अटेंडेंस खत्म कर ऑफलाइन उपस्थिति बनाने की स्वीकृति दी जाए।

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सहरसा से राजीव कुमार झा की रिपोर्ट

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