जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा घोटाले में सीबीआई जांच पर सवाल, रांची हाईकोर्ट में याचिका, जांच में अनियमितता और पक्षपात के आरोप।
JPSC Exam Scam रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित द्वितीय सिविल सेवा परीक्षा में कथित गड़बड़ी को लेकर एक बार फिर मामला गरमा गया है। सीबीआई जांच में अनियमितता और पक्षपात के आरोपों को लेकर रांची हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है, जिसमें जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
JPSC Exam Scam:2010 से शुरू हुआ मामला, CBI ने 12 साल बाद दाखिल की चार्जशीट
याचिका में बताया गया है कि इस मामले में वर्ष 2010 में एसीबी ने 19 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था। बाद में न्यायालय के निर्देश पर यह मामला सीबीआई को सौंपा गया।
सीबीआई ने करीब 12 वर्षों की लंबी जांच के बाद 60 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। यह आरोप पत्र सीबीआई के एएसपी सुधांशु शेखर द्वारा दायर किया गया था।
सीबीआई कोर्ट, रांची ने 7 मार्च 2025 को इस मामले में संज्ञान भी लिया।
Key Highlights
जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में गड़बड़ी का मामला फिर चर्चा में
सीबीआई जांच की निष्पक्षता पर हाईकोर्ट में सवाल
2010 में एसीबी ने दर्ज किया था केस
12 साल बाद 60 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल
कई आरोपियों को क्लीन चिट देने पर उठे सवाल
JPSC Exam Scam:जांच में भारी अनियमितता और पक्षपात के आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया है कि सीबीआई की जांच में भारी अनियमितताएं सामने आई हैं। कई ऐसे लोगों को क्लीन चिट दे दी गई, जिन पर गड़बड़ी के स्पष्ट आरोप थे।
बताया गया है कि प्रशांत लायक, मनोज, कुमार शैलेंद्र, हरि उरांव और कुमारी गीतांजलि को आरोप मुक्त कर दिया गया, जबकि उनसे कम आरोपित अन्य लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई। इससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
JPSC Exam Scam:“चहेतों को बचाने” के लिए मनमानी जांच का आरोप
याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि जांच प्रक्रिया में मनमानी की गई और कुछ खास लोगों को बचाने तथा लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से कार्रवाई की गई।
यह भी आरोप है कि जांच के दौरान उन अभ्यर्थियों और संबंधित लोगों को निशाना बनाया गया, जो सीबीआई से संपर्क नहीं कर सके, जबकि प्रभावशाली लोगों को राहत दी गई।
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