JTET Exam Delay: नौ माह बाद भी नियमावली फाइनल नहीं, 4 लाख अभ्यर्थियों और 25 हजार शिक्षकों पर संकट

झारखंड में जेटेट परीक्षा को लेकर नौ माह बाद भी नियमावली फाइनल नहीं। 4 लाख अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में, 25 हजार शिक्षकों की नौकरी पर भी खतरा।


JTET Exam Delay : झारखंड में झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी जेटेट को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है। परीक्षा की नियमावली का ड्राफ्ट जारी हुए करीब नौ माह बीत चुके हैं, लेकिन अब तक इसे अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। इस बीच झारखंड हाईकोर्ट ने जेटेट से संबंधित एक याचिका की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार को 31 मार्च तक परीक्षा आयोजित करने का निर्देश दिया है। हालांकि वर्तमान स्थिति को देखते हुए तय समय सीमा तक परीक्षा कराना मुश्किल नजर आ रहा है।

राज्य में वर्ष 2016 के बाद से अब तक जेटेट परीक्षा आयोजित नहीं हुई है। इसके कारण पिछले दस वर्षों में शिक्षक प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले लाखों अभ्यर्थी कक्षा आठ तक के शिक्षक बनने की पात्रता हासिल नहीं कर पाए हैं।


Key Highlights

  • जेटेट नियमावली का ड्राफ्ट जारी हुए नौ माह, लेकिन अब तक फाइनल नहीं

  • हाईकोर्ट ने 31 मार्च तक परीक्षा लेने का दिया है आदेश

  • 2016 के बाद से झारखंड में जेटेट परीक्षा आयोजित नहीं हुई

  • करीब 4 लाख अभ्यर्थी शिक्षक बनने की पात्रता से वंचित

  • सरकारी स्कूलों के लगभग 25 हजार शिक्षकों की नौकरी पर भी खतरा


JTET Exam Delay:चार लाख से अधिक अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में

झारखंड एकेडमिक काउंसिल ने वर्ष 2024 में जेटेट परीक्षा के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू की थी। परीक्षा में शामिल होने के लिए 3.50 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। पिछले दो वर्षों में शिक्षक प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को जोड़ दें तो ऐसे उम्मीदवारों की संख्या चार लाख से अधिक हो सकती है, जो जेटेट परीक्षा के इंतजार में हैं।

शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रावधान के अनुसार शिक्षक पात्रता परीक्षा प्रत्येक वर्ष आयोजित की जानी चाहिए। हालांकि झारखंड में अब तक केवल दो बार ही जेटेट परीक्षा आयोजित हो सकी है, जिससे बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है।

JTET Exam Delay:25 हजार शिक्षकों की नौकरी पर भी मंडरा रहा खतरा

जेटेट परीक्षा नहीं होने का असर सिर्फ अभ्यर्थियों पर ही नहीं बल्कि सरकारी स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों पर भी पड़ रहा है। राज्य के लगभग 25 हजार शिक्षक ऐसे हैं जिनकी नौकरी पर संकट गहराता जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार जिन शिक्षकों की सेवा अवधि पांच वर्ष से अधिक हो चुकी है, उन्हें दो वर्षों के भीतर शिक्षक पात्रता परीक्षा पास करना अनिवार्य है। सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश पिछले वर्ष सितंबर में दिया था। यदि निर्धारित समय सीमा में शिक्षक टेट पास नहीं कर पाए तो उनकी सेवा समाप्त की जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के छह माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जेटेट परीक्षा की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है, जिससे अभ्यर्थियों और शिक्षकों दोनों के बीच चिंता और असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

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