Koderma: जैक दसवीं प्रश्न पत्र लीक मामले में दो गिरफ्तार, पुलिस का एक्शन जारी

Koderma: जैक बोर्ड की दसवीं की परीक्षा में प्रश्न पत्र लीक मामले में जैक के निर्देश पर कोडरमा जिला प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। इस मामले में मरकच्चो थाना पुलिस ने व्हाट्सएप और यूट्यूब के जरिए प्रश्न पत्र वायरल करने के आरोप में प्रशांत साव उर्फ प्रिंस और आशीष कुमार को गिरफ्तार कर लिया है और उसे जेल भेजे जाने की तैयारी की जा रही है, जबकि चतरा के रहने वाले प्रिंस साव की भी तलाश की जा रही है।

Koderma: दोषियों के खिलाफ कार्रवाई जारी

इधर, जिला प्रशासन ने भी जैक बोर्ड से कोडरमा के कोषागार तक प्रश्न पत्र पहुंचने और वहां से बैंकों के माध्यम से परीक्षा केंद्र तक प्रश्न पत्र पहुंचने की प्रक्रिया की जांच कर रही है। इस बाबत जिला प्रशासन की ओर से प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया गया कि कोडरमा जिले में प्रश्न पत्र लीक करने में किसी तरह की त्रुटि नहीं पाई गई है और इस मामले में जो भी लोग दोषी है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

Koderma: आरोपी के पिता ने कहा

मामले में कई कोचिंग संचालक की भूमिका भी संदिग्ध बताई जा रही है, जबकि इसके तार महाराष्ट्र और कर्नाटक से भी जुड़े होने के सबूत मिले हैं। इस मामले में पकड़े गए प्रशांत साव के पिता प्रकाश साव ने इस मामले में अपने बेटे की भूमिका सीधे तौर से पर होने से इनकार किया है और कहा कि इतना बड़ा मामला बिना किसी सरकारी अधिकारी या कर्मी की मिलिभगत के बिना संभव नहीं है। परिजनों के अनुसार, उनके बच्चों को बेवजह फंसाया जा रहा है।

Koderma: मामले में बोली केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी

मामले को लेकर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि झारखंड में किसी भी परीक्षा का पेपर लीक होना अब आम बात हो गयी है। यह राज्य सरकार के नाकामियों को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह घटना बहुत ही निंदनीय है। उन्होंने कहा कि इसमें सरकारी अंग कहीं न कहीं लिप्त है। मामले में कोडरमा से गिरफ्तार भाजपा नेता के पुत्र के बारे में उन्होंने कहा कि मामले में चाहे जो भी लिप्त हो, सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

Koderma: ‘झारखंड सरकार संवेदनहीन’

वहीं उन्होंने कहा कि मामला यह नहीं है कि गिरफ्तार कौन हुआ है या नहीं हुआ। मुद्दा ये है कि पेपर लीक कैसे हुआ। क्योंकि जैक बोर्ड की परीक्षा से संबंधित प्रश्नपत्र की छपाई से उसे जिलावार भेजने तक में काफी गोपनीयता बरती जाती है। ऐसे में जांच ये होनी चाहिए कि पेपर लीक कहां से हुआ है। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार ऐसे मामलों पर बिल्कुल संवेदनहीन है।

Saffrn

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