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 Land Mutation Crisis: एकड़-डिसमिल विवाद में फंसा म्यूटेशन, हजारों खरीदार परेशान

झारखंड में जमीन म्यूटेशन की प्रक्रिया में गड़बड़ी, एकड़-डिसमिल अंतर से आवेदन रद्द, खरीदारों को लोन और योजनाओं में हो रही दिक्कत।


Land Mutation Crisis रांची: झारखंड में जमीन के म्यूटेशन की प्रक्रिया इन दिनों एकड़-डिसमिल के अंतर के कारण उलझ गई है। एक एकड़ से अधिक जमीन की रजिस्ट्री के बाद स्व-मोटो म्यूटेशन के आवेदन बड़े पैमाने पर रद्द किए जा रहे हैं, जिससे खरीदारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

राजस्व अधिकारियों के अनुसार, आवेदित जमीन और पंजी टू में दर्ज रकबे में अंतर होने के कारण आवेदन अस्वीकृत किए जा रहे हैं। चूंकि यह आवेदन नेशनल जेनरिक डॉक्यूमेंट रजिस्ट्रेशन सिस्टम (NGDRS) से सीधे जुड़ा होता है, इसमें किसी तरह का संशोधन संभव नहीं है।

 Land Mutation Crisis:रकबा में अंतर बना सबसे बड़ा कारण

जमीन की रजिस्ट्री के बाद म्यूटेशन के लिए आवेदन स्वतः एनजीडीआरएस के माध्यम से संबंधित अंचल अधिकारी (सीओ) के लॉगिन में पहुंचता है। इसके बाद यह आवेदन राजस्व उप निरीक्षक और अंचल निरीक्षक को जांच के लिए भेजा जाता है।
जांच के दौरान रजिस्टर्ड डीड और पंजी टू में दर्ज जमीन के रकबे का मिलान किया जाता है। इसी प्रक्रिया में अक्सर एकड़ और डिसमिल के अंतर सामने आते हैं, जिसके आधार पर आवेदन को रद्द करने की अनुशंसा कर दी जाती है।

 Land Mutation Crisis:आवेदन रद्द होने पर नहीं मिलता दूसरा मौका

सबसे बड़ी समस्या यह है कि एक बार म्यूटेशन आवेदन रद्द हो जाने के बाद उसी खाता-प्लॉट के लिए दोबारा आवेदन का विकल्प उपलब्ध नहीं है।
भू-राजस्व एवं निबंधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह व्यवस्था एक ही जमीन की बार-बार खरीद-बिक्री पर रोक लगाने के उद्देश्य से लागू की गई है। हालांकि, इससे वास्तविक खरीदारों को भी नुकसान झेलना पड़ रहा है।


Key Highlights

  • एकड़-डिसमिल अंतर के कारण म्यूटेशन आवेदन हो रहे रद्द

  • NGDRS सिस्टम में संशोधन संभव नहीं, बढ़ी समस्या

  • एक बार आवेदन रद्द होने पर दोबारा आवेदन का विकल्प नहीं

  • म्यूटेशन नहीं होने से लोन और सरकारी योजनाओं में बाधा

  • जमीन विवाद और धोखाधड़ी का खतरा बढ़ा


 Land Mutation Crisis:म्यूटेशन नहीं होने से बढ़ रही परेशानी

म्यूटेशन नहीं होने की स्थिति में सरकारी रिकॉर्ड में जमीन खरीदार का नाम दर्ज नहीं हो पाता। इसके कारण कई तरह की व्यावहारिक समस्याएं सामने आ रही हैं—
घर निर्माण के लिए अनुमति नहीं मिल पा रही है
सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में बाधा
बैंक से लोन लेने में कठिनाई
जमीन की दोबारा बिक्री या उत्तराधिकार में हस्तांतरण मुश्किल

सबसे गंभीर स्थिति यह है कि पंजी टू में नाम दर्ज नहीं होने के कारण जमीन का मूल मालिक उसी प्लॉट को एक से अधिक लोगों को बेच सकता है, जिससे विवाद की आशंका बढ़ जाती है।

 Land Mutation Crisis:समाधान की मांग तेज

इस मुद्दे को लेकर जमीन खरीदारों और आम लोगों के बीच असंतोष बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को तकनीकी खामियों को दूर कर म्यूटेशन प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाना होगा, ताकि खरीदारों को राहत मिल सके।

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