Hazaribagh: हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र में नागरिकों के लिए सांसद मनीष जयसवाल द्वारा शुरू किए गए “सांसद तीर्थ दर्शन” कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। इस कार्यक्रम को लेकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने सांसद मनीष जयसवाल की पहल को सेवा, संस्कार और संस्कृति का संगम बताया।
“सांसद तीर्थ दर्शन” कार्यक्रम पर लोकसभा अध्यक्ष का संदेश

कार्यक्रम के संयोजक और लोकसभा सदस्य ने कहा कि वे लोकसभा अध्यक्ष के प्रेरणादायी संदेश के लिए हृदय से आभार प्रकट करते हैं। उन्होंने कहा कि यह संदेश न केवल उनके लिए बल्कि इस पवित्र तीर्थ यात्रा अभियान से जुड़े हर वरिष्ठ नागरिक के लिए एक आशीर्वाद की तरह है।
उन्होंने बताया कि “सांसद तीर्थ दर्शन” केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह सेवा, संस्कार और संस्कृति का संगम है। इस कार्यक्रम के माध्यम से समाज के बुजुर्गों को वह आध्यात्मिक संतोष, आत्मिक शांति और सामाजिक सम्मान देने का प्रयास किया जा रहा है, जिसके वे वास्तविक रूप से पात्र हैं।
कार्याक्रम में पहले चरण के तहत हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र से चुने गए वरिष्ठ नागरिक विभिन्न तीर्थ स्थलों की यात्रा पर जाएंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना है बल्कि बुजुर्गों के अनुभवों और योगदान को सम्मान देना भी है।
29 जून को “सांसद तीर्थ दर्शन 2025” को हुआ शुभारंभ
हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के भाजपा सांसद मनीष जायसवाल ने 29 जून को “सांसद तीर्थ दर्शन 2025” कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ नरसिंह मंदिर से किया था। कार्यक्रम के पहले चरण में 180 वरिष्ठ तीर्थयात्रियों को बस के माध्यम से रवाना किया गया था। यात्रा से पहले सभी श्रद्धालुओं ने नरसिंह मंदिर में पूजा-अर्चना कर अपने तीर्थ सफर की शुरुआत की थी।

इस अवसर पर सांसद मनीष जायसवाल ने कहा था कि यह योजना उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की समाजसेवा की प्रेरणा से मिली है। उन्होंने बताया कि यह तीर्थ यात्रा एक माह में छह बार आयोजित की जाएगी और यह क्रम निरंतर जारी रहेगा।
सांसद तीर्थ दर्शन” कार्यक्रम की विशेषताएं:
- प्राथमिकता वरिष्ठ नागरिकों को
- संपूर्ण यात्रा व्यवस्था निःशुल्क
- एक माह में 6 तीर्थ यात्राएं
- हर यात्रा में अलग-अलग धार्मिक स्थलों का चयन
- श्रद्धालुओं के लिए मेडिकल, भोजन, आवास की पूर्ण सुविधा
सांसद की इस पहल को समाज के हर वर्ग से सराहना मिल रही है। स्थानीय लोग इसे धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक सशक्तिकरण की मिसाल मान रहे हैं।
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