सीतामढ़ी : शिक्षा जब संकल्प बनती है तो सदियों पुरानी कुरीतियां और पिछड़ापन घुटने टेक देते हैं। इसका जीवंत उदाहरण पेश किया है सीतामढ़ी जिला के परिहार प्रखंड अंतर्गत बथुआरा पंचायत ने। बाल विवाह के खिलाफ मुखिया धनेश्वर पासवान के नेतृत्व में कुरीतियों के खिलाफ एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए बथुआरा पंचायत ने बाल विवाह मुक्त पंचायत का गौरव प्राप्त किया है।
पंचायत के मुखिया धनेश्वर पासवान के द्वारा शिक्षा संवाद सह छात्र प्रतिभा सम्मान समारोह का आयोजन किया गया
इस ऐतिहासिक उपलब्धि के उपलक्ष्य में पंचायत के मुखिया धनेश्वर पासवान के द्वारा शिक्षा संवाद सह छात्र प्रतिभा सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में पंचायत के मैट्रिक एवं इंटर की परीक्षा में प्रथम श्रेणी से सफलता प्राप्त करने वाले 75 छात्र-छात्राओं एवं उनके अभिवावकों को सम्मानित किया गया। वहीं समारोह में मुखिया द्वारा गाए गीत नून रोटी खाके भले, जिंदगी बितावा……अपने न पढ़ला बाकी , बचवन के पढ़ावा ….की पढ़ लिख शिक्षित उहे जग में महान बा……. कि पढ़ लिख बहिनी, कलमिये में जान बा ने सुरों के माध्यम से जगाई शिक्षा का अलख मुखिया द्वारा गाए गानों ने सबका मन मोह लिया।


दुबे टोल गांव के महादलित बस्ती में वर्ष 2022 तक एक भी बेटी मैट्रिक पास नहीं थी
वहीं पंचायत है जिसकी दुबे टोल गांव के महादलित बस्ती में वर्ष 2022 तक एक भी बेटी मैट्रिक पास नहीं थी। लेकिन आज इस पंचायत की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। इस वर्ष मैट्रिक और इंटर की परीक्षा में इस पंचायत के 75 से अधिक छात्र-छात्राओं ने प्रथम श्रेणी से सफलता प्राप्त कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। शिक्षा के प्रति इस बढ़ते रुझान का सबसे बड़ा प्रभाव सामाजिक सुधार के रूप में सामने आया है। कभी बाल विवाह की बेड़ियों में जकड़ी यह पंचायत अब आधिकारिक रूप से ‘बाल विवाह मुक्त’ घोषित हुई है। जिला प्रशासन, सीतामढ़ी पुलिस, एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन एवं पंचायत के मुखिया धनेश्वर पासवान के प्रयास से अब यहां की बेटियों के हाथों में कम उम्र में चूड़ियां नहीं, बल्कि किताबें नजर आती हैं। यह उपलब्धि केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि उस सामुदायिक चेतना की जीत है जिसने अभावों के बीच भी पढ़ाई के महत्व को समझा।


ग्रामीणों ने इस परिवर्तन को ‘ऐतिहासिक और क्रांतिकारी’ करार दिया है
ग्रामीणों ने इस परिवर्तन को ‘ऐतिहासिक और क्रांतिकारी’ करार दिया है। यह पंचायत आज पूरे जिले के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गई है। शिक्षा की यह गूंज न केवल गरीबी को मात दे रही है, बल्कि एक सशक्त और जागरूक समाज की नींव भी रख रही है। इस सफलता पर खुशी जताते हुए मुखिया धनेश्वर पासवान ने कहा कि मेरा लक्ष्य केवल आधारभूत संरचना का विकास नहीं, बल्कि मानव संसाधन का विकास करना था। जब हमारी बेटियां शिक्षित होंगी, तभी समाज सशक्त होगा। यह 75 छात्र-छात्राएं हमारे पंचायत के भविष्य के कर्णधार हैं। पंचायतवासियों ने मुखिया के इस ‘शिक्षा मॉडल’ की जमकर सराहना की है। आज इस पंचायत की चर्चा पूरे जिले में एक ‘मॉडल पंचायत’ के रूप में हो रही है।


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अमित कुमार की रिपोर्ट
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