कोडरमा में सड़क निर्माण कंपनी बिहार भेज रही पत्थर: विधायक

Koderma: कोडरमा में सड़क निर्माण कंपनी पर बरही विधायक उमाशंकर अकेला ने यहां के पत्थरों को बिहार में भेजने का आरोप लगाया है. विधायक ने कहा है कि एनएच 31 के फोरलेन निर्माण करने वाली कंपनी आरकेएसके कोडरमा के पहाड़ों को तोड़कर बिहार भेजने का काम कर रही है. जिससे झारखंड सरकार को राजस्व की क्षति हो रही है और साथ ही जवाहर घाटी का खूबसूरत प्राकृतिक नजारा भी धीरे-धीरे छिनता जा रहा है.


निर्माण की आड़ में पत्थरों को किया जा रहा नेस्तनाबूत


विधायक अकेला ने कहा कि निर्माण की आड़ में सड़क निर्माण कंपनी आरकेएसके द्वारा पत्थरों को तोड़ा जा रहा है. कोडरमा में बरही से जेजे कॉलेज तक एनएच 31 के फोरलेन निर्माण का कार्य किया जा रहा है लेकिन इस निर्माण कार्य की आड़ में तिलैया डैम और इसके आसपास पहले खूबसूरत पहाड़ियों को नेस्तनाबूद किया जा रहा है और उससे तोड़ा गया पत्थर सड़क निर्माण की कंपनी आरकेएसके द्वारा बिहार भेजा जा रहा है. विधानसभा के समिति सदस्य के रूप में कोडरमा पहुंचे बरही विधायक उमाशंकर अकेला ने इस मामले को उजागर करते हुए जांच की मांग की है.

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बरही विधायक उमाशंकर अकेला


ब्लास्टिंग से कोडरमा बरकाकाना रेलखंड को भी खतरा


बरही से लेकर जवाहर घाटी तक यह पूरा इलाका पहाड़ों से घिरा पड़ा है और इन्हीं पहाड़ों के बीच से एनएच 31 के साथ-साथ कोडरमा बरकाकाना रेलखंड पर ट्रेन का परिचालन किया जाता है. पहाड़ के एक तरफ चमचमाती हुई रफ्तार भरी सड़क का निर्माण किया जा रहा है, तो दूसरी तरफ कोडरमा बरकाकाना-रेलखंड. पहाड़ को ध्वस्त करने के लिए जब ब्लास्टिंग की जाती है तो उसका खामियाजा इस रेलखंड को भी भुगतना पड़ता है. हाल ही में इस ट्रैक पर ब्लास्टिंग के बाद पत्थरों का मलबा गिर गया था, जिसके कारण परिचालन बाधित हुआ था.


सड़क निर्माण कंपनी के पास नहीं है पत्थर तोड़ने का लाइसेंस


बरही विधायक उमाशंकर अकेला ने कहा कि जवाहर घाटी

में इन पहाड़ों को तोड़ने के लिए आरकेएस कंपनी के द्वारा

न तो किसी तरह का लाइसेंस लिया गया और न ही पत्थरों के

परिवहन के लिए खनन विभाग की ओर से चलान जारी किया गया था.

पिछले दिनों जिला प्रशासन ने इन पत्थरों को तोड़े जाने के

आरोप में आरकेएस कंपनी से ढाई करोड़ रुपए जुर्माना भी वसूला था.

उपायुक्त आदित्य रंजन ने बताया कि जुर्माने के साथ

पहाड़ काटने पर रोक लगाई गई थी लेकिन, अगर पहाड़ो को फिर से तोड़ा जा रहा है तो एजेंसी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी.

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