डिजीटल डेस्क : Mohan Bhagwat – समाज को जातियों में बांट रहे सियासी दल जबकि संघ सामाजिक समरसता में जुटा। केरल के पलक्कड़ में चल रहे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के समन्वय बैठक में सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि ‘राजनीतिक दल भारत के हिंदू समाज को जातीय वर्गों में तोड़ने की कोशिश करते रहेंगे।
लेकिन संघ का काम है सामाजिक समरसता बनाए रखना और सबको साथ रखना। हमें संघ की सोच के आधार पर सबको साथ लेकर चलना है। सामाजिक समरसता बनाकर रखना हमारा कर्तव्य है’।
समाज में भाईचारे को बनाए रखने पर काम करता रहेगा संघ
सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि ‘सामाजिक वर्गीकरण के भी कई आयाम होते हैं। राजनीतिक दल अपने स्वार्थ के चलते इस तरह की मांग करते रहेंगे। ये होनी चाहिए या नहीं – यह तय करना सरकार और कोर्ट का काम है।
लेकिन हमारा जो काम है और संघ जिसके लिए बना है वो हमको करते रहना है- देश के लिए समाज को एकजुट करना, सभी को साथ लेकर चलना और समाज में ऊंच नीच को खत्म करने के निरंतर प्रयास करना।
इसके लिए समाज में सामाजिक गतिविधियों से संबंधित कामों को और तेज करना है। लोगों में आपसी भाई चारे और प्यार को बनाए रखना है। तभी समरसता का प्रभाव देखने को मिलेगा’।
सरसंघचालक ने आगे कहा कि हमें एकजुट होकर और सबको एकजुट रखकर चलना है, जिससे कि समाज में समरसता बनी रहे।

कोलकाता कांड, बांग्लादेश और भारत की मौजूदा आर्थिक नीति पर भी हुआ गंभीर मंथन
संघ के इस समन्वयक बैठक में कई विशेष सत्र भी आयोजित हुए हैं। इन सत्रों को समूहों में बांटकर चर्चा आयोजित की गई है जिनमें शिक्षा, सुरक्षा, आर्थिक नीति और सामाजिक समरसता जैसे मुद्दे शामिल हैं।
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में बीते 8-9 अगस्त को मेडिकल छात्रा के साथ हुई विभत्स घटना पर भी चिंता जाहिर की गई एवं बांग्लादेश के हालात एवं वहां के अल्पसंख्यक हिंदुओं के हाल पर भी गंभीरता से मंथन हुआ।
साथ ही शिक्षा के मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हुई एवं इसी क्रम में भारत सरकार के नई शिक्षा नीति पर भी चर्चा हुई। इसके अलावा केंद्र सरकार की आर्थिक नीति पर भी चर्चा की गई है।
इसमें भारतीय मजदूर संगठन, स्वदेशी जागरण मंच, किसान संघ जैसे दूसरे संगठनों ने भारतीयता और भारत में बने उत्पादों को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाने पर चर्चा हुई। बैठक में स्वदेशी चीजों को बढ़ावा और इनपर फोकस बनाए रखने की बात कही गई।
आर्थिक मुद्दों पर चर्चा के दौरान देश के व्यवसायियों और व्यसायी संगठनों को सेम पेज पर लेकर उनके हितों की रक्षा पर चर्चा की गई।
इसके साथ हो आर्थिक चर्चा के दौरान इस बात पर गहन चर्चा की गई कि सरकार के तमाम योजनाओं का अधिक से अधिक किसानों को कैसे फायदा हो और छोटे दुकानदारों, व्यापारियों की आर्थिक स्थिति भी भी ध्यान रखा जाये।


















