रांची : झारखंड में स्थानीयता के मुद्दे पर विवाद बढ़ता ही जा रहा है. भाषा विवाद और नियोजन नीति को लेकर राज्य में लगातार आंदोलन हो रहे हैं. ऐसे में आज आदिवासी मूलवासी और सामाजिक संगठनों का संयुक्त मोर्चा के तत्वावधान में राजधानी के तेतर टोली सरना मैदान में बैठक का आयोजन किया गया.
बैठक के दौरान स्थानीयता, भाषा विवाद और नियोजन नीति के मुद्दे पर आने वाले दिनों में झारखंड में आंदोलन किया जाएगा. पूरे राज्य में महारैली आदिवासी मूलवासी संगठन अपनी मांग को सरकार के सामने रखेंगे. दरअसल सरकार के सामने आदिवासी एवं मूलवासी संगठनों ने स्थानीयता के मसले को जल्द से जल्द सुलझाने की मांग की है. सरकार की तरफ से जल्द से जल्द स्थानीयता भाषा विवाद के मसले को नहीं सुलझाया गया तो आने वाले दिनों में झारखंड में और विवाद बढ़ सकता है.
इससे पहले भाकपा माले विधायक विनोद सिंह ने कहा है कि हेमंत सरकार वर्तमान भाषा आधारित नियोजन नीति को अविलंब वापस लेना चाहिए. इस मामले को लेकर सर्वदलीय बैठक के जरिए सरकार झारखंड की भाषा नीति तय करे. आंदोलनकारियों से बातचीत कर मामले का समाधान निकाले. समय रहते सरकार इस मामले पर पहल नहीं की तो भाकपा माले नियुक्ति एवं स्थानीयता आधारित नियोजन के सवाल पर 10 फरवरी को राज्यव्यापी छात्र-युवा आंदोलन शुरू करेगी. उन्होंने कहा कि भाकपा माले 1932 का खतियान या राज्य में हुए अंतिम सर्वे आधारित स्थानीयता नीति के पक्ष में है और स्थानीयता ही नियोजन का आधार बनाया जाना चाहिए. हेमंत सरकार के गठन के समय से ही रघुवर सरकार की स्थानीयता एवं भाषा नीति को वापस लेने की मांग भाकपा-माले करती रही है. रघुवर सरकार द्वारा स्थापित इन नीतियों को पार्टी ने हमेशा झारखंड विरोधी करार दिया है. भाकपा माले नेताओं ने इन नीतियों को हेमंत सरकार द्वारा जारी रखे जाने पर तीखी आलोचना की है. इसे झारखंडी जन भावना से खिलवाड़ कहा है.
रिपोर्ट : प्रतीक सिंह
1932 खतियान लागू कराने को लेकर बड़कागांव में निकली पदयात्रा, कहा- बाहरी भाषा नाय चलतो

















