NEET Solver Gang में Jharkhand Connection: JAC टॉपर पूनम कुमारी का नाम आया सामने, जांच में बड़ा खुलासा

लखीसराय री-नीट परीक्षा में पकड़े गए सॉल्वर गैंग की जांच में झारखंड कनेक्शन सामने आया है। जैक टॉपर पूनम कुमारी और पलामू की चंचल कुमारी का नाम जांच के दायरे में है।


NEET Solver Gang में Jharkhand Connection पटना/रांची: बिहार के लखीसराय में आयोजित री-नीट परीक्षा के दौरान पकड़े गए सॉल्वर गैंग की जांच में झारखंड कनेक्शन सामने आने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। जांच एजेंसियों को गिरिडीह की पूनम कुमारी और पलामू की चंचल कुमारी के नाम इस नेटवर्क से जुड़े होने के संकेत मिले हैं।

सबसे चर्चित नाम पूनम कुमारी का है, जो वर्ष 2021 में झारखंड एकेडमिक काउंसिल (जैक) की इंटर साइंस परीक्षा की टॉपर रह चुकी हैं। उन्होंने रांची के एक इंटर कॉलेज से अपनी 12वीं की पढ़ाई पूरी की थी। वहीं पलामू की चंचल कुमारी ने भी इंटर साइंस परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की थी।

NEET Solver Gang में Jharkhand Connection: परिजनों ने जताई अनभिज्ञता

भास्कर टीम जब दोनों छात्राओं के घर पहुंची तो उनके परिजनों ने मामले पर हैरानी जताई। परिवार के सदस्यों का कहना था कि उन्हें इस पूरे घटनाक्रम की कोई जानकारी नहीं थी। परिजनों के अनुसार, पुलिस से सूचना मिलने के बाद ही उन्हें इस मामले की जानकारी हुई।


Key Highlights:

  • लखीसराय री-नीट परीक्षा में पकड़े गए सॉल्वर गैंग का झारखंड कनेक्शन सामने आया।

  • वर्ष 2021 की जैक इंटर साइंस टॉपर पूनम कुमारी का नाम जांच में उभरा।

  • पलामू की चंचल कुमारी भी नेटवर्क से जुड़ी बताई जा रही हैं।

  • पीएमसीएच का एमबीबीएस छात्र अश्विनी कुमार गैंग का मुख्य किरदार निकला।

  • बायोमेट्रिक एजेंसी के कुछ कर्मचारियों पर भी मिलीभगत के आरोप।


जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क का मुख्य किरदार पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (पीएमसीएच) का एक एमबीबीएस छात्र है। गिरफ्तारी के समय उसने अपना नाम मयंक कश्यप बताया था, लेकिन जांच में उसकी वास्तविक पहचान हाजीपुर निवासी अश्विनी कुमार के रूप में हुई।

अश्विनी पीएमसीएच के 2022 बैच का तृतीय वर्ष का छात्र है। पुलिस के अनुसार उसने मयंक कश्यप के नाम से सिम कार्ड भी लिया हुआ था और कॉलेज परिसर में भी कई छात्र उसे इसी नाम से जानते थे।

NEET Solver Gang में Jharkhand Connection: एक अभ्यर्थी के लिए 60 लाख रुपये का सौदा

जांच में यह भी सामने आया है कि अश्विनी कुमार ने एक अभ्यर्थी को मेडिकल कॉलेज में प्रवेश दिलाने के लिए कथित तौर पर 60 लाख रुपये में सौदा किया था। मामले का एक और चौंकाने वाला पहलू यह है कि जिस दिन वह लखीसराय के परीक्षा केंद्र में मौजूद था, उसी दिन पीएमसीएच के सर्जरी विभाग की विशेष कक्षा में उसकी उपस्थिति भी दर्ज पाई गई।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि उसकी उपस्थिति किस तरह दर्ज हुई और इसमें अन्य लोगों की क्या भूमिका थी।

NEET Solver Gang में Jharkhand Connection: बायोमेट्रिक कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में

री-नीट परीक्षा में अभ्यर्थियों के बायोमेट्रिक सत्यापन का जिम्मा ‘इनोवेटिव व्यू’ नामक कंपनी को दिया गया था। जांच के दौरान यह आरोप सामने आया है कि कंपनी के कुछ सुपरवाइजर और कर्मचारियों ने कथित तौर पर करीब दो लाख रुपये के लालच में सॉल्वर गैंग के साथ सांठगांठ की।

इसी मिलीभगत के तहत अश्विनी कुमार को बायोमेट्रिक स्टाफ के सदस्य के रूप में परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिलाया गया। पुलिस अब कंपनी के संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

NEET Solver Gang में Jharkhand Connection: जांच के दायरे में कई राज्य

प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि यह नेटवर्क केवल बिहार तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार अन्य राज्यों से भी जुड़े हो सकते हैं। जांच एजेंसियां सॉल्वर गैंग से जुड़े सभी संदिग्धों और उनके नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं।

फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस इस पूरे रैकेट में शामिल अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है।

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