One Nation One Election को मिली कैबिनेट की मंजूरी, पेश होगा संसद में…

दिल्ली: इस वक्त की बड़ी खबर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से है। संसद के शीतकालीन सत्र के बीच प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मोदी कैबिनेट की बैठक की गई और कैबिनेट की बैठक में एक राष्ट्र एक चुनाव (One Nation One Election) विधेयक को मंजूरी दे दी गई है। कैबिनेट में मंजूरी मिलने के बाद अब इसे सरकार संसद में पेश कर सकती है। इससे पहले एक देश एक चुनाव पर पूर्व राष्ट्रपति रमानाथ कोविंद की अगुवाई में बनी समिति ने भी अपनी मंजूरी दे दी थी। बता दें कि 2019 में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक राष्ट्र एक चुनाव के विचार को सामने रखा था।

बता दें कि एक राष्ट्र, एक चुनाव पर पहले भी काफी राजनीतिक बहस हो चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पर बात करते हुए सबसे पहले कहा था कि देश के एकीकरण की प्रक्रिया हमेशा चलती रहनी चाहिए। 2024 में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भी प्रधानमंत्री ने इस पर विचार रखा। 2019 में प्रधानमंत्री के इस बात का जिक्र के बाद कई राज्यों के विधानसभा चुनाव में भी इस बात पर कई बार चर्चा हुई। हालांकि एक राष्ट्र एक चुनाव का विपक्ष शुरू से विरोध करते आ रहा है।

एक राष्ट्र एक चुनाव से फायदा

एक देश एक चुनाव के बारे में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अगुवाई में गठित समिति ने मंजूरी दी थी। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि एक साथ चुनाव की सिफारिशें को दो चरणों में कार्यान्वित किया जाएगा। पहले चरण में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ आयोजित किये जायेंगे। दूसरे चरण में आम चुनावों के 100 दिनों के भीतर स्थानीय निकाय चुनाव (पंचायत और नगर पालिका) किये जायेंगे। इसके तहत सभी चुनावों के लिए समान मतदाता सूची तैयार की जाएगी। इसके लिए पूरे देश में विस्तृत चर्चा शुरू की जाएगी। वहीं एक कार्यान्वयन समूह का भी गठन किया जाएगा।

पहले हो चुका है लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ

पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अगुवाई वाली समिति ने अपने रिपोर्ट में कहा है कि देश में 1951 से 1967 के बीच एक साथ चुनाव हो चुके हैं। इसके बाद यह चक्र टूट गया। धीरे धीरे लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव अलग अलग होने लगे और इससे चुनाव में होने वाले खर्च बढ़ गए। इतना ही नहीं सुरक्षा बलों और अन्य निर्वाचन अधिकारियों की उनकी महत्वपूर्ण रूप से लंबी कालावधि के लिए अपने मूल कर्तव्यों से भिन्न अन्यत्र तैनाती, आदर्श आचार संहिता, आदि के लंबी अवधि तक लागू रहने के कारण, विकास कार्य में दीर्घ अवधियों के लिए व्यवधान के रूप में होता है।

विधि आयोग ने भी की थी सिफारिश

भारत के विधि आयोग ने अपनी 170वीं रिपोर्ट में यह जिक्र किया है कि प्रत्येक वर्ष और बिना उपयुक्त समय के निर्वाचनों के चक्र का अंत किया जाना चाहिए। किसी विधान सभा के लिए पृथक निर्वाचन आयोजित करना एक अपवाद होना चाहिए न कि नियम नियम यह होना चाहिए कि ‘लोक सभा और सभी विधान सभाओं के लिए पांच वर्ष में एक बार में एक निर्वाचन’।

कार्मिक, लोक शिकायत, विधि और न्याय विभाग से संबंधित संसदीय स्थायी समिति ने ‘लोक सभा और राज्य विधान सभाओं के लिए साथ-साथ निर्वाचन आयोजित करने की साध्यता पर दिसम्बर 2015 में प्रस्तुत अपनी 79वीं रिपोर्ट में भी इस मामलें की जांच की है और दो चरणों में साथ-साथ निर्वाचन आयोजित करने की एक वैकल्पिक और व्यवहार्य विधि की सिफारिश की है

https://www.youtube.com/@22scopebihar

यह भी पढ़ें-   मिशन कर्मयोगी के Digital Platform से किया जा रहा सरकारी कर्मियों को प्रशिक्षित

One Nation One Election One Nation One Election One Nation One Election One Nation One Election One Nation One Election One Nation One Election One Nation One Election

One Nation One Election

Bihar Police Transfer 2026: बिहार पुलिस में बड़ा फेरबदल! 37 अधिकारियों...

Bihar Police Transfer 2026: बिहार सरकार के गृह विभाग ने पुलिस प्रशासन में बड़े स्तर पर फेरबदल करते हुए 37 पुलिस अधिकारियों का तबादला...

Bihar Hockey Development 2026: बिहार के हर जिले और प्रखंड में...

Bihar Hockey Development 2026: बिहार में हॉकी के विस्तार और खिलाड़ियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में व्यापक योजना पर काम किया...

Sudivya Kumar Sonu Tribute: सुदिव्य सोनू के निधन से झारखंड में...

Sudivya Kumar Sonu Tribute, रांची: झारखंड सरकार के दिवंगत मंत्री एवं वरिष्ठ नेता सुदिव्य कुमार सोनू के निधन पर राजनीतिक और सामाजिक जगत में...