बिहार चुनाव में सिर्फ वैध मतदाता ही डाल सकेंगे वोट, ECI करेगा गहन पुनरीक्षण

बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण शुरू करेगा निर्वाचन आयोग। सभी पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में जोड़ने हेतु घर-घर जाकर सत्यापन होगा। राजनीतिक दलों को पुनरीक्षण प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी के लिए किया जाएगा प्रेरित

नई दिल्ली: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने बिहार राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) कराए जाने के निर्देश जारी किए हैं। यह पुनरीक्षण आयोग द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों और समय-सारणी के अनुसार आयोजित किया जाएगा। इस गहन पुनरीक्षण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची (Electoral Roll) में सम्मिलित हों ताकि वे अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें, कोई भी अपात्र व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल न हो और मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रहे।

उल्लेखनीय है कि बिहार में पिछला गहन पुनरीक्षण वर्ष 2003 में किया गया था। वर्तमान में तेज़ी से हो रहा शहरीकरण, लगातार होने वाला प्रवासन, नए युवाओं का 18 वर्ष की आयु पूरी कर मतदाता बनने की पात्रता प्राप्त करना, मृत्यु की जानकारी का समय पर न मिलना तथा अवैध विदेशी नागरिकों के नाम सूची में दर्ज हो जाना जैसी स्थितियों के कारण यह गहन पुनरीक्षण आवश्यक हो गया है ताकि त्रुटिरहित और विश्वसनीय मतदाता सूची तैयार की जा सके।

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इस प्रक्रिया के तहत मतदान केंद्र पदाधिकारी (BLO) घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे। पुनरीक्षण के दौरान आयोग भारत के संविधान के अनुच्छेद 326 तथा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 16 में उल्लिखित मतदाता के रूप में पंजीकरण की पात्रता और अयोग्यता संबंधी प्रावधानों का पूरी तरह से पालन करेगा। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 23 के अंतर्गत निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) द्वारा अब तक अपने स्तर पर पात्रता की जांच की जाती रही है।

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अब तकनीक के विकास को देखते हुए, इस प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए यह आवश्यक किया गया है कि ERO द्वारा संतुष्टि के आधार पर प्राप्त दस्तावेजों को ECINET पोर्टल पर अपलोड किया जाए। हालांकि, इन दस्तावेजों की गोपनीयता सुनिश्चित करते हुए इन्हें केवल अधिकृत निर्वाचन अधिकारियों द्वारा ही देखा जा सकेगा। यदि किसी राजनीतिक दल अथवा मतदाता द्वारा कोई दावा या आपत्ति दर्ज की जाती है, तो सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (AERO) संबंधित मामले की जांच करेंगे और उसके बाद ही ERO अपना निर्णय लेंगे।

इसके अतिरिक्त, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 24 के तहत ERO के आदेश के विरुद्ध जिला पदाधिकारी (District Magistrate) तथा मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (Chief Electoral Officer) के समक्ष अपील दायर की जा सकती है। आयोग ने मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO), जिला निर्वाचन पदाधिकारी (DEO), निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) एवं बूथ स्तर अधिकारी (BLO) को यह निर्देशित किया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि वास्तविक मतदाताओं, विशेष रूप से वृद्ध, बीमार, दिव्यांगजन (PwD), गरीब तथा अन्य वंचित वर्गों को किसी प्रकार की परेशानी न हो और उन्हें हर संभव सुविधा प्रदान की जाए। इसके लिए आवश्यकता पड़ने पर स्वयंसेवकों की तैनाती भी की जा सकती है।

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भारत निर्वाचन आयोग यह सुनिश्चित करने हेतु हरसंभव प्रयास करेगा कि पुनरीक्षण प्रक्रिया सुगमता से संपन्न हो और मतदाताओं को कम से कम असुविधा हो। साथ ही, आयोग सभी राजनीतिक दलों से अपील करेगा कि वे प्रत्येक मतदान केंद्र पर अपने बूथ लेवल एजेंट्स (BLAs) की नियुक्ति करें। BLAs की सक्रिय भागीदारी से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि यदि कोई विसंगतियाँ या त्रुटियाँ हों, तो उनका समाधान तैयारी के प्रारंभिक चरण में ही कर लिया जाए, जिससे दावे, आपत्तियों और अपीलों की संख्या में कमी लाई जा सके।

यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि मतदाता और राजनीतिक दल, दोनों ही किसी भी निर्वाचन प्रक्रिया के सबसे महत्वपूर्ण भागीदार होते हैं, और केवल उनकी पूर्ण भागीदारी से ही इस प्रकार की महत्वपूर्ण और व्यापक प्रक्रिया को सफलता एवं सुचारु रूप से संपन्न किया जा सकता है।

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