Pahari Mandir Safety रांची के ऐतिहासिक पहाड़ी मंदिर पर लगा 89.3 मीटर ऊंचा तिरंगा फ्लैग पोस्ट जर्जर स्थिति में है। रखरखाव के अभाव से हादसे का खतरा बढ़ा।
Pahari Mandir Safety रांची: झारखंड की राजधानी रांची की पहचान और आस्था का प्रतीक ऐतिहासिक पहाड़ी मंदिर आज गंभीर खतरे की जद में आ गया है। देशभक्ति और राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक के रूप में यहां स्थापित 89.3 मीटर ऊंचा विशाल तिरंगा फ्लैग पोस्ट अब गर्व के बजाय भय का कारण बनता जा रहा है। वर्षों से समुचित रखरखाव नहीं होने के कारण फ्लैग पोस्ट की तकनीकी संरचना कमजोर हो चुकी है और इसे संचालित करने वाली मशीनों पर जंग साफ दिखाई दे रही है।
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का कहना है कि अगर समय रहते जरूरी कदम नहीं उठाए गए, तो यह ऐतिहासिक स्थल किसी बड़े हादसे का गवाह बन सकता है।
Key Highlights
रांची के पहाड़ी मंदिर पर लगा 89.3 मीटर ऊंचा तिरंगा फ्लैग पोस्ट जर्जर हालत में
फ्लैग संचालन की मशीनों पर जंग, तकनीकी संरचना कमजोर
गिरने की स्थिति में आसपास के मकान और सड़क पर चल रहे लोग होंगे प्रभावित
श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भारी आवाजाही से खतरा बढ़ा
समय रहते मरम्मत और सुरक्षा जांच नहीं हुई तो बड़ा हादसा संभव
Pahari Mandir Safety: जर्जर मशीनें और कमजोर होती तकनीकी संरचना
पहाड़ी मंदिर पर लगे विशाल तिरंगे को चढ़ाने और उतारने के लिए जो मशीनरी लगाई गई है, वह लंबे समय से रखरखाव के अभाव में जर्जर हो चुकी है। मशीनों पर जंग लगने से उनके कभी भी फेल होने की आशंका बनी रहती है। इसके साथ ही फ्लैग पोस्ट की संरचना भी धीरे धीरे कमजोर होती जा रही है, जिससे सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
Pahari Mandir Safety: गिरने की स्थिति में आसपास के इलाकों पर बड़ा खतरा
89.3 मीटर ऊंचा यह फ्लैग पोस्ट अगर किसी कारणवश गिरता है, तो इसकी जद में दर्जनों मकान, दुकानें और सड़क पर चलने वाले लोग आ सकते हैं। पहाड़ी मंदिर मार्ग पर दिनभर श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही रहती है, जिससे जोखिम और बढ़ जाता है। भीड़भाड़ वाले इस इलाके में किसी भी तरह की दुर्घटना जानमाल के बड़े नुकसान का कारण बन सकती है।
Pahari Mandir Safety: पहाड़ी की स्थिरता पर भी उठ रहे सवाल
स्थानीय नागरिकों और विशेषज्ञों के अनुसार केवल फ्लैग पोस्ट ही नहीं, बल्कि जिस पहाड़ी पर यह स्थापित है उसकी स्थिरता को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। लगातार बढ़ते दबाव और रखरखाव की कमी के कारण पहाड़ी की मजबूती पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में इस पूरे ढांचे का तकनीकी ऑडिट और सुरक्षा जांच बेहद जरूरी मानी जा रही है।
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