
Palamu Teacher Maternity Leave Controversy: पलामू ज़िले में मैटरनिटी लीव (प्रसूति अवकाश) को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। शिक्षिका की डिलीवरी के दौरान नवजात शिशु की मौत के बाद, उनके परिवार वालों ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिक्षिका के पति का आरोप है कि छुट्टी मंज़ूर करने के लिए रिश्वत मांगी गई थी, जबकि ज़िला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है।
मैटरनिटी लीव के आवेदन और मंज़ूरी में देरी के आरोप
रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिक्षिका भारती पांडे तरहासी ब्लॉक के सिलदिलिया प्लस-टू हाई स्कूल में तैनात हैं और अभी उन्हें चैनपुर के कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूल में डेप्युटेशन पर भेजा गया था। डिलीवरी को देखते हुए उन्होंने शिक्षा विभाग में मैटरनिटी लीव के लिए आवेदन किया था। उनके परिवार का आरोप है कि छुट्टी मंज़ूर करवाने के लिए वे बार-बार विभाग के दफ़्तर के चक्कर लगा रही थीं, लेकिन उन्हें समय पर छुट्टी नहीं मिली। इस दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई और डिलीवरी के समय गर्भ में ही नवजात शिशु की मौत हो गई।
पति का आरोप: ₹50,000 की मांग
शिक्षिका के पति मुकेश कुमार तिवारी—जो हज़ारीबाग़ ज़िला पुलिस में कार्यरत हैं—ने शिक्षा विभाग के दफ़्तर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि मैटरनिटी लीव मंज़ूर करने के बदले ₹50,000 की मांग की गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि DEO दफ़्तर के क्लर्क अरुण गिरी और ईश्वर दयाल राम ने कहा था कि जब तक पैसे नहीं दिए जाएंगे, छुट्टी मंज़ूर नहीं होगी। मुकेश तिवारी के मुताबिक, उन्होंने समस्या बताने के लिए कई बार अधिकारियों से मुलाकात की थी। शिक्षक संघों ने भी यह मामला उठाया था और करीब पांच दिन पहले पलामू के डिप्टी कमिश्नर के पास शिकायत दर्ज कराई गई थी।
घटना के बाद छुट्टी मंज़ूरी का आदेश भेजा गया
परिवार का आरोप है कि घटना की जानकारी मिलने के बाद शिक्षा विभाग ने जल्दबाज़ी में शिक्षिका की छुट्टी मंज़ूर कर दी और आदेश WhatsApp के ज़रिए भेजा गया। फिलहाल, शिक्षिका का इलाज मेदिनीनगर के एक प्राइवेट अस्पताल में चल रहा है। परिवार के मुताबिक, उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। परिवार ने इस मामले में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज कराने की बात कही है।
DEO ने आरोपों को नकारा
वहीं, पलामू के ज़िला शिक्षा अधिकारी (DEO) संदीप कुमार ने रिश्वत मांगने के आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उन्होंने कहा कि उन्हें पहले इस मामले के बारे में जानकारी नहीं थी और वे संबंधित शिक्षक को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते हैं। DEO ने बताया कि शिक्षक की छुट्टी पहले ही मंज़ूर की जा चुकी थी। उन्होंने विभागीय कर्मचारियों पर लगे आरोपों का भी खंडन किया।
जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी
परिवार के दावों और विभाग के रुख में विरोधाभास को देखते हुए अब जांच ज़रूरी हो गई है। परिवार द्वारा लगाए गए आरोपों की सच्चाई और विभागीय प्रक्रियाओं में देरी का असली कारण जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।




