Panchgrahi Yogमकर संक्रांति 2026 में पंचग्रही योग और अमृत सिद्धि योग बन रहा है। सूर्य 14 जनवरी को मकर में प्रवेश करेंगे, पुण्यकाल 15 जनवरी तक रहेगा। जानिए महत्व।
Panchgrahi Yog: सूर्य के मकर में प्रवेश से होगा उत्तरायण का आरंभ
Panchgrahi Yog रांची: सूर्य आराधना का पर्व मकर संक्रांति इस वर्ष कई दुर्लभ और शुभ योगों के साथ मनाया जाएगा। भगवान भास्कर 14 जनवरी, बुधवार की रात 9.19 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इसी क्षण सूर्य उत्तरायण हो जाएंगे और खरमास का समापन हो जाएगा। शास्त्रों के अनुसार यदि संक्रांति प्रदोष काल के बाद रात्रि में पड़ती है तो उसका पुण्यकाल अगले दिन माना जाता है। इसी कारण काशी, ऋषिकेश और महावीर पंचांग के अनुसार मकर संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी, गुरुवार को दोपहर तक रहेगा।
Key Highlights
सूर्य 14 जनवरी रात 9.19 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे
संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी दोपहर तक मान्य रहेगा
पंचग्रही योग और अमृत सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग
षटतिला एकादशी का भी शुभ योग इसी दिन बन रहा है
दही चूड़ा, तिल और गुड़ के दान से स्वास्थ्य और सौभाग्य की प्राप्ति
Panchgrahi Yog:पंचग्रही योग और अमृत सिद्धि योग से बढ़ेगा शुभ फल
इस बार मकर संक्रांति पर एक अत्यंत दुर्लभ पंचग्रही योग बन रहा है। सूर्य के साथ मंगल, बुध, शुक्र और चंद्रमा भी मकर राशि में एकत्र होंगे। यह योग शक्ति, धन, बुद्धि, भावनाओं और सौभाग्य का अद्भुत संगम माना जाता है। इसके साथ ही 14 जनवरी को षटतिला एकादशी और अमृत सिद्धि योग का भी संयोग रहेगा, जो व्यापार, धन धान्य और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाला माना गया है।
श्रीराम जानकी तपोवन मंदिर के महंत ओम प्रकाश शरण के अनुसार एकादशी तिथि 13 जनवरी दोपहर 3.17 बजे शुरू होकर 14 जनवरी शाम 5.52 बजे तक रहेगी। व्रत का पारणा 15 जनवरी सुबह 7.15 से 9.21 बजे के बीच किया जा सकेगा।
Panchgrahi Yog:दही चूड़ा और तिल के पीछे छिपा स्वास्थ्य और आस्था का विज्ञान
मकर संक्रांति दही चूड़ा और तिल के बिना अधूरी मानी जाती है। दही शुभता का, चूड़ा समृद्धि का और गुड़ रिश्तों की मिठास का प्रतीक है। सूर्य के उत्तरायण होने पर शरीर में पित्त बढ़ता है, जिसे दही और चूड़ा संतुलित करते हैं। चूड़ा हल्का और सुपाच्य होता है तथा ठंड में शरीर को ऊर्जा देता है।
तिल को नकारात्मक ऊर्जा दूर करने और पापों से मुक्ति का प्रतीक माना गया है। काले तिल शनि और पितरों के लिए, जबकि सफेद तिल सूर्य और सुख समृद्धि के लिए शुभ माने जाते हैं। इस दिन तिल से स्नान, तिल का भोग, दान और तिल के तेल का दीपक जलाने का विशेष महत्व है।
Panchgrahi Yog: मंदिरों में विशेष पूजा और भोग की तैयारी
मकर संक्रांति को लेकर मंदिरों में विशेष अनुष्ठान होंगे। पहाड़ी बाबा मंदिर में बुधवार को विशेष श्रृंगार के बाद सुबह की आरती के साथ चूड़ा और तिलकुट का भोग लगाया जाएगा और भजन प्रस्तुति होगी। साईं मंदिर में 15 जनवरी को सुबह 5 बजे से रात 9 बजे तक विशेष पूजा अनुष्ठान चलेंगे। वहीं जगन्नाथ मंदिर में भी मकर संक्रांति के अवसर पर विशेष गंज भोग अर्पित किया जाएगा।
इस तरह पंचग्रही योग और उत्तरायण के साथ आने वाली मकर संक्रांति न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से बल्कि सामाजिक और स्वास्थ्य की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
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