पटना जिला होगा मूक-बधिर बच्चों से मुक्त, 500 मूक-बधिर बच्चों का होगा कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी
पटना : जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समाहरणालय सभागार में श्रवण श्रुति योजना अन्तर्गत प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन हुआ। जिसमें स्व. एस.एन. मेहरोत्रा मेमोरियल ईएनटी फाउण्डेशन, कानपुर के प्रो. डॉ. रोहित मेहरोत्रा, एम.एस. ईएनटी द्वारा सभी चिकित्सा पदाधिकारियों एवं स्वास्थ्य कर्मियों को श्रवण श्रुति कार्यक्रम के संबंध में वृहद प्रशिक्षण दिया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य
बच्चों में कम उम्र में ही सुनने की समस्या पहचानने के संकेत, जाँच, उपचार, सर्जरी, नियमित स्पिच थेरैपी इत्यादि के बारे में विस्तार से बताया गया।जिलाधिकारी ने चिकित्सा पदाधिकारियों एवं अन्य को प्रशिक्षण कार्यशाला में संबोधित करते हुए कहा कि पटना जिला को मूक-बधिर मुक्त करना है। इसके लिए स्वास्थ्य, आईसीडीएस, जीविका, पंचायती राज, समाज कल्याण, शिक्षा, ग्रामीण विकास, कल्याण, सिविल सोसायटी, माता-पिता, अभिभावकगण सहित सभी स्टेकहोल्डर्स को सजग, तत्पर एवं प्रतिबद्ध रहना होगा। जिलाधिकारी ने कहा कि लक्ष्य रखा गया है कि नव वर्ष में अगले 6 (छः) महीना के अंदर पटना के 500 मूक-बधिर बच्चों का कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी कराया जाए ताकि उन्हें सुनने-बोलने की क्षमता आए। इसके लिए कम उम्र में ही ऐसे बच्चों की पहचान जरूरी है।

राज्य सरकार दिव्यांगो के अधिकारों,गरिमापूर्ण जीवन एवं समान अवसर के लिए प्रतिबद्ध
जिलाधिकारी ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार हमारे देश में प्रति 1,000 बच्चों में 5 से 8 बच्चे बधिर जन्म लेते हैं। राज्य सरकार दिव्यांगजन के अधिकारों, गरिमापूर्ण जीवन एवं समान अवसर के लिए प्रतिबद्ध है। श्रवण श्रुति कार्यक्रम ने न केवल बच्चों के कानों को ठीक किया, बल्कि उन आवाजों को सुना, जो पहले कभी सुनी ही नहीं गई थी। यह एक समावेशी एवं संवेदनशील स्वास्थ्य प्रणाली का द्योतक है।
न्यू-बॉर्न स्क्रीनिंग सुनिश्चित कराने पर जोर
जिलाधिकारी ने सिविल सर्जन को निर्देश दिया कि संस्थागत प्रसव के हर एक मामले में नवजात बच्चों की स्क्रीनिंग जरूर कराएं ताकि कम उम्र में ही मूक-बधिर बच्चों की पहचान हो सके। सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी न्यू-बॉर्न स्क्रीनिंग सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षित कर्मियों को तैनात रखें। आशा एवं एएनएम के माध्यम से जन-जन को जागरूक करें।
सेविका -सहायिका के माध्यम से टीकाकरण के समय ही बच्चों के व्यवहारात्मक जाँच जरुर कराये
जिलाधिकारी ने कहा कि त्रि-स्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के माननीय जन-प्रतिनिधियों, जीविका दीदियों, विकास मित्रों, आँगनबाड़ी सेविकाओं-सहायिकाओं इत्यादि के माध्यम से श्रवण श्रुति कार्यक्रम के बारे में समाज में जागरूकता फैलाएं। डोर-टू-डोर विजिट के द्वारा मूक-बधिर बच्चों की पहचान करें। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निदेश दिया कि ओएई मशीन के अलावा टीकाकरण के समय ही बच्चों के व्यवहारात्मक जाँच (बिहैवियरल टेस्ट) के द्वारा सुनने की समस्या को पहचानें एवं लक्षण के अनुसार उपचार सुनिश्चित करें। जिलाधिकारी ने कहा कि मूक-बधिर बच्चों के इलाज की निःशुल्क एवं बेहतरीन व्यवस्था है। जितना कम उम्र में इलाज होगा उतना अच्छा परिणाम आएगा।
पटना जिला के कई बच्चों का हो चुका कोक्लियर इम्प्लांट, आगे भी जारी है
पटना जिला में जुलाई से नवम्बर, 2025 के बीच 66,434 बच्चों की कान से जुड़ी/श्रवण समस्या की जाँच की गई। इसमें 160 बच्चों में कान से जुड़ी समस्या पायी गई। इन सभी बच्चों का जिला के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में जाँच किया गया। ओएई प्रतिवेदन के आधार पर 56 बच्चे कोक्लियर इम्प्लांट हेतु चिन्हित किए गए। इनमें से 45 बच्चों को कोक्लियर इम्प्लांट के लिए कानपुर भेजा गया है तथा 32 बच्चों का सफलतापूर्वक कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी हो गया है। बच्चों में श्रवण बाधिता की पहचान, परीक्षण एवं उपचार तथा उपचारित बच्चों का स्पीच थेरेपी करते हुए सामाजिक समन्वय पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए जिलाधिकारी ने अधिकारियों को इन बच्चों की सहायता हेतु हरसंभव प्रयास करने का निदेश दिया।
जिलाधिकारी ने कहा कि 5 साल से कम उम्र के शत-प्रतिशत मूक-बधिर बच्चों का लक्षण के अनुसार समुचित उपचार, सर्जरी एवं थेरैपी के माध्यम से सुनने, बोलने की शक्ति लौटाना है। इसके लिए सभी पदाधिकारी सघन प्रयास करें।
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