पटना: जन सुराज के संयोजक प्रशांत किशोर (PK) विभिन्न मुद्दों को लेकर राज्य सरकार पर लगातार हमलावर रहते हैं। प्रशांत किशोर के हमला को देखते हुए अब जदयू ने प्रशांत किशोर को आड़े हाथ लेना शुरू कर दिया है। मामले में जदयू के मुख्य प्रवक्ता सह एमएलसी नीरज कुमार ने एक बार फिर प्रशांत किशोर पर जम कर हमला किया और उनके ऊपर फर्जीवाड़ा का आरोप लगाया। नीरज कुमार ने सीधे सीधे कहा कि प्रशांत किशोर ने जिस तरह से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर व्यक्तिगत टिप्पणी की थी उसके बाद हम उनका एक एक कच्चा चिटठा खोलेंगे और उनकी बखिया उधेड़ेंगे।
पांच में से एक सवाल का दिया जवाब
नीरज कुमार ने कहा कि पिछले दिन हमने पिछली बार प्रेस कांफ्रेंस कर प्रशांत किशोर को 72 घंटे का समय दिया था और पांच सवाल पूछे थे कि जन सुराज पार्टी और जॉय ऑफ़ लिविंग ग्लोबल फाउंडेशन के बीच क्या संबंध है और क्या यह वित्तीय और राजनैतिक गठबंधन है? जन सुराज का बैंक खाता के बारे में पूछे थे जिसे उन्होंने सार्वजनिक कर दिया। जॉय ऑफ़ गिविंग ग्लोबल फाउंडेशन को पैसा कौन दे रहा है और इससे प्रशांत किशोर का क्या रिश्ता है।
‘अशांत’ किशोर बन गये हैं प्रशांत
पीके ने अपने ही फाउंडेशन को 50 लाख रूपये डोनेट किया। क्या यह टैक्स चोरी का तरीका है और आपके आय का स्रोत क्या है। कई कंपनियों ने करोड़ों रूपये का डोनेशन दिया जबकि उनकी खुद की पूंजी कम है तो ये डोनेशन कैसे दे रहे हैं हैं। हमारे सवालों के बाद उनका मन अशांत हो गया होगा और अब वे अशांत किशोर बन गये हैं।
क्या हैं प्रशांत किशोर?
जन सुराज पार्टी के तीन लोग प्रमुख हैं जो चुनाव आयोग में निबंधित हैं। अध्यक्ष शरत कुमार मिश्रा, विजय साहू महासचिव और कोषाध्यक्ष अजीत सिंह हैं लेकिन क्या इन तीन व्यक्तियों के बारे में पार्टी में कभी आपने सुना है? प्रशांत किशोर किस पद पर हैं ये बताएं। प्रशांत किशोर ने तीनों प्रवासी को पार्टी में निबंधित करवाया और खुद को संरक्षक पद पर निबंधित क्यों नहीं करवाया।
पकड़ा जाइएगा
नीरज कुमार ने आगे कहा कि ‘जॉय ऑफ़ लिविंग ग्लोबल फाउंडेशन प्राइवेट लिमिटेड जन सुराज का फेलोशिप करवाता है। उनका दस्तावेज ही कहता है कि फेलोशिप जॉय ऑफ़ लिविंग ग्लोबल फाउंडेशन के द्वारा मैनेज किया जा रहा है। मतलब साफ है कि जॉय ऑफ़ लिविंग ग्लोबल फाउंडेशन और जन सुराज फेलोशिप एक दूसरे के पूरक हैं। इसके मेंटर प्रशांत किशोर हैं। यह बिहार है, अलग अलग दुकान चलाने में पकड़ा जाइएगा। ये कंपनी एक्ट के तहत एक कंपनी चलाने का ढोंग रचते हैं। ऐसा राजनीतिक दल है कि यंग फेलोशिप के तहत जोइनिंग लैटर दे रहे हैं, सब कुछ जॉय ऑफ़ लिविंग ग्लोबल फाउंडेशन मालिक है।
चुनाव आयोग में संरक्षक के तौर पर क्यों नहीं नाम दर्ज
मामले में जब हमारे संवाददाता महीप राज ने जब नीरज कुमार ने बातचीत की तो इस तरह हमलावर होने का कारण उन्होंने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर व्यक्तिगत टिप्पणी की है। वे उनके घर में रहते थे, पितातुल्य कहते थे और फिर ऐसी बातें कही कि हम नहीं कह सकते। अब उन्होंने जब छेड़ दिया है तो हमने उनका इलाज शुरू कर दिया और अब उनका आवाज नहीं निकल रहा है। उन्होंने एक बार फिर सवाल किया कि बताइये अगर जन सुराज एक पार्टी है तो फिर आप संरक्षक के रूप में चुनाव आयोग में अपने आप को निबंधित क्यों नहीं करवा रहे हैं।
आमदनी एक लाख तो डोनेशन करोड़ में कैसे?
पचास लाख रुपया अगर आपने डोनेशन दिया तो जॉय ऑफ़ गिविंग फाउंडेशन को क्यों दिया? इस कंपनी के माध्यम से आप जन सुराज फेलोशिप कैसे चला रहे हैं। फेलोशिप का मेंटर आप कैसे बन गए। हर दो तीन वर्ष पर कंपनी का डायरेक्टर कैसे बदल जा रहा है। कंपनी की आमदनी एक लाख है वह एक करोड़ डोनेशन दे रही है। यह पूरे तौर पर आर्थिक खेल है।
गंगा जी में नाव पर करते हैं बहस
हमने चुनौती दिया है कि आप तो बहुत प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री बनाते हैं, हम तो ठेल ठाल के एमएलसी बने हैं। हम जनेऊ पहनते हैं आपको भी पहना देते हैं और चलिए नाव पर बैठ कर गंगा जी में आमने सामने बहस कर लेते हैं। दूध का दूध और पानी का पानी कर लेते हैं। प्रशांत किशोर कहते हैं कि उन्होंने नीतीश कुमार को सीएम बनाया तो उन्हें इतिहास पता है? नीतीश कुमार ने प्रशांत किशोर जैसा लाखों कार्यकर्ता पैदा किया है। जब तक ये बिहार में चिट फंड कंपनी की राजनीति करेंगे तब तक हम इन्हें पछाड़ते रहेंगे।
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पटना से महीप राज की रिपोर्ट
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