डीआईटी छात्रों के रजिस्ट्रेशन और परीक्षा से वंचित रहने के मामले में सीबीआई ने जेयूटी और एआईसीटीई अधिकारियों की भूमिका की जांच शुरू की, नामकुम कैंपस में पूछताछ।
Education Scam : केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने धनबाद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के छात्रों को रजिस्ट्रेशन और परीक्षा से वंचित रखने के मामले में जांच का दायरा बढ़ा दिया है। इस क्रम में सीबीआई ने झारखंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी और ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन के अधिकारियों की भूमिका की जांच शुरू कर दी है। मंगलवार को सीबीआई की टीम नामकुम स्थित जेयूटी कैंपस पहुंची और करीब तीन घंटे तक अधिकारियों से पूछताछ की।
सीबीआई ने जेयूटी के प्रभारी रजिस्ट्रार निशांत कुमार समेत अन्य अधिकारियों से डीआईटी को दिए गए एफिलिएशन से जुड़े बिंदुओं पर सवाल किए। टीम ने एफिलिएशन से संबंधित दस्तावेजों की जांच की और कुछ महत्वपूर्ण कागजात अपने साथ ले गई।
डीआईटी छात्रों के मामले में सीबीआई ने जेयूटी और एआईसीटीई की भूमिका की जांच शुरू की
नामकुम स्थित जेयूटी कैंपस में तीन घंटे तक अधिकारियों से पूछताछ
एडमिशन के बाद 120 से घटाकर 60 की गईं सीटें
60 छात्रों का रजिस्ट्रेशन नहीं होने से परीक्षा से वंचित रहे
हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई जांच, तीन फरवरी को रिपोर्ट पेश होगी
Education Scam: एडमिशन के बाद घटा दी गईं सीटें
मामले की जड़ शैक्षणिक सत्र 2025-26 से जुड़ी है। धनबाद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में एआईसीटीई ने डिप्लोमा पाठ्यक्रम के लिए 60 सीटों को बढ़ाकर 120 करने की मंजूरी दी थी। इसी अनुमति के आधार पर छात्रों ने कॉलेज में नामांकन लिया और पढ़ाई भी शुरू कर दी।
इसके बाद जेयूटी ने कॉलेज की सीटें आधी करते हुए 120 की जगह केवल 60 सीटों पर ही मान्यता दी, जिससे शेष 60 छात्रों का रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ और वे परीक्षा देने से वंचित रह गए।
Education Scam: इंफ्रास्ट्रक्चर जांच को बताया कारण
यूनिवर्सिटी प्रशासन का पक्ष है कि कॉलेज की आवेदन समिति ने डीआईटी के इंफ्रास्ट्रक्चर की जांच की थी। जांच के दौरान पर्याप्त आधारभूत संरचना नहीं मिलने के कारण 120 के बजाय केवल 60 सीटों की मान्यता दी गई। हालांकि सवाल यह उठ रहा है कि जब एआईसीटीई से सीट बढ़ाने की अनुमति पहले ही मिल चुकी थी, तो नामांकन के बाद सीटें घटाने का फैसला क्यों लिया गया।
Education Scam: हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी और सीबीआई जांच
छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मामले ने जब तूल पकड़ा तो मामला झारखंड हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट ने इस पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा था कि छात्रों को ट्रैफिक पुलिस की तरह फंसाया गया है। कोर्ट ने पूरे मामले की सीबीआई जांच का आदेश दिया था। अब इस केस में अगली सुनवाई तीन फरवरी को होगी, जिसमें सीबीआई को अपनी रिपोर्ट अदालत में सौंपनी है।
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