रांची: झारखंड के 24 जिलों में से 22 जिलों में वर्षापात अभी भी सामान्य से कम है। चतरा जिला में स्थिति विशेष रूप से गंभीर है। इसके अलावा, अन्य 21 जिलों में भी वर्षापात की स्थिति अच्छी नहीं है। सिमडेगा और साहिबगंज को छोड़कर राज्य के बाकी 22 जिलों में वर्षापात कम होने का असर खेती पर पड़ रहा है।
झारखंड में अब तक करीब 5.46 लाख हेक्टेयर क्षेत्र (30%) में धान की खेती हो चुकी है। साथ ही, सभी खरीफ फसलों को जोड़कर कुल 10.51 लाख हेक्टेयर क्षेत्र के आच्छादन की गई है, जो लक्ष्य के 37% है।
2022 में राज्य में मानसून की शुरुआती दिनों में कम वर्षा हुई थी और खेती को काफी नुकसान पहुंचा था। इसके बाद 01 जून से 07 अगस्त तक सामान्य से 48% कम वर्षा हुई थी। इस बार, इस समय की बारिश की स्थिति बेहतर है और पिछले वर्ष की तुलना में 37% कम वर्षापात हुई है।
कृषि निदेशालय के उपनिदेशक मुकेश कुमार सिन्हा ने बताया कि इस बार की परिस्थितियाँ पिछले साल की तुलना में बेहतर हैं, लेकिन आच्छादन की रिपोर्ट अभी भी चिंता का कारण है।
कृषि निदेशालय में उपनिदेशक ने बताया कि 15 अगस्त तक हुए आच्छादन और अन्य पहलुओं के आधार पर आगे की निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि राज्य के किसान 15 अगस्त के बाद धान रोपने की उम्मिद कर रहे हैं, और इसके आधार पर आच्छादन की स्थिति को देखकर वैकल्पिक खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा।
उपनिदेशक ने बताया कि राज्य के सभी जिला कृषि पदाधिकारियों को यह दिशा-निर्देश दिए गए हैं कि 15 अगस्त के बाद बिना आच्छादन के खेतों में वैकल्पिक खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा। मक्का, दलहन, तिलहन और मडुआ के बीज भी उपलब्ध हैं।
उन्होंने बताया कि विभाग का लक्ष्य है कि खरीफ फसलों के लिए 28 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खेती की जाए, और इसमें पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। राज्य में कुल लगभग 28 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खेती होती है, जिसमें 18 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की फसल उगाई जाती है। हालांकि, इस वर्ष मौसम की असुविधाओं के कारण खेती की स्थिति कठिन है।







