हाईकोर्ट ने JPSC recruitment मामले में हटाए गए 10 अभ्यर्थियों की नियुक्ति पुनः बहाल करने का निर्देश दिया और राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने को कहा।
Ranchi High Court Order रांची: रांची में झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रतियोगिता परीक्षा से बाहर किए गए 10 अभ्यर्थियों की याचिकाओं पर सुनवाई की। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि प्रार्थी सूरज कुमार यादव, जितेंद्र रजक, नीरज कुमार, सुदिति सुमन, रूपाली रौशन, सूरज कुमार, रूपेंद्र प्रसाद और आशुतोष कुमार को नियुक्त कर योगदान लेने के बाद ट्रेनिंग में भेजा जाए। जस्टिस सेन ने स्पष्ट किया कि अंतिम आदेश आने तक इनकी नियुक्ति प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी।
Key Highlights:
• हाईकोर्ट ने JPSC recruitment विवाद पर सरकार को 10 अभ्यर्थियों की नियुक्ति का निर्देश दिया
• अदालत ने कहा: अंतिम आदेश तक इनकी नियुक्ति प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी
• प्रार्थियों ने मेरिट व आरक्षण कोटि के आधार पर नियुक्ति रोके जाने को चुनौती दी
• सुनवाई में सरकार, जेपीएससी और प्रार्थियों की ओर से विस्तृत पक्ष रखा गया
• राज्य सरकार से मामले पर जवाब दाखिल करने को कहा गया
• एक अभ्यर्थी SC कोटि में टॉपर होते हुए भी सामान्य कोटि में चयनित
Ranchi High Court Order:
सुनवाई के दौरान प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने दलील दी कि जेपीएससी ने परीक्षा के तहत 342 अभ्यर्थियों का चयन कर नियुक्ति की अनुशंसा भेजी थी, लेकिन इनमें से 10 उम्मीदवारों को यह कहते हुए रोक दिया गया कि किसी अन्य मामले में हाईकोर्ट के आदेश से नौ सीटें आरक्षित रखी गई हैं। प्रार्थियों का कहना है कि वे मेरिट सूची में ऊपर हैं और आरक्षित कोटि में अधिक अंक होने के बावजूद उन्हें बाहर कर दिया गया।
Ranchi High Court Order:
दलीलों में यह भी बताया गया कि यदि सीटें रोकनी थीं तो कम अंक वाले अभ्यर्थियों को अस्थायी रूप से बाहर रखा जाना चाहिए था, न कि उन उम्मीदवारों को जिन्होंने अधिक अंक प्राप्त किए हैं। उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया कि प्रार्थी जितेंद्र रजक एससी कोटि में टॉपर हैं, लेकिन अधिक अंक मिलने के कारण उनका चयन सामान्य कोटि में हुआ।
Ranchi High Court Order:
सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता सचिन कुमार और अपर महाधिवक्ता आशुतोष आनंद ने पक्ष रखा। वहीं, जेपीएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल और प्रिंस कुमार ने दलीलें पेश कीं। अदालत ने राज्य सरकार को मामले में विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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