कोईलवर रेल पुल का नवीकरण व बेहतरीन रखरखाव, ब्रिटिश काल में बनाया गया डबल डेकर है पुल

आरा : दानापुर रेल मंडल के हावड़ा-दिल्ली मार्ग पर भोजपुर जिला के अंतर्गत बिहटा एवं कोईलवर स्टेशनों के बीच सोन नदी के ऊपर 1862 ई. ब्रिटिश काल में बनाया गया डबल डेकर पुल है जिसे अब्दुल बारी पुल के नाम से भी जाना जाता है, जिसके नीचे रोड एवं ऊपर रेल ट्रैफिक का आवागमन निर्बाध रूप से चालू है। इस पुल की लंबाई 1.44 किमी है। इसके निर्माण में उच्च कोटि का रोट आयरन का उपयोग किया गया था। इसका पिल्लर आज भी पर्याप्त मजबूत है, जिसकी निरंतर निगरानी की जाती है। इस पूल पर 24 घंटे पेट्रोलिंग के साथ-साथ प्रतिदिन की-मैन के द्वारा इसकी फिटिंग्स चेक की जाती है।

हजारों वर्षों से सभ्यता की जन्मभूमि रही सोन नदी के दोनों किनारों को लगभग 1862 में बने इस कोईलवर पुल ने जोड़ के रखा है

हजारों वर्षों से सभ्यता की जन्मभूमि रही सोन नदी के दोनों किनारों को लगभग 1862 में बने इस कोईलवर पुल ने जोड़ के रखा है। यह पुल बिहार के भोजपुर क्षेत्र (आरा) को राजधानी पटना से जोड़ता है। कोईलवर पुल (जिसका नाम अब्दुल बारी पुल है) एक ऐतिहासिक रेल-सह-सड़क पुल है, जो इंजीनियरिंग का एक अद्भुत नमूना है। इसमें ऊपर दोहरी रेलवे की पटरियां और नीचे सड़क यातायात की सुविधा है, जो क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा देती है एवं यातायात को सुगम बनाती है।

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1862 में खोला गया यह पुल उस समय एशिया का सबसे लंबा पुल था

आपको बता दें कि 1862 में खोला गया यह पुल उस समय एशिया का सबसे लंबा पुल था और यह भारत का सबसे पुराना चालू रेल-सह-सड़क पुल है। भारत के वायसराय लॉर्ड एल्गिन ने 1862 में इस ऐतिहासिक कोईलवर पुल (सोन पुल) का उद्घाटन किया था। जेम्स मीडोज रेंडेल और सर मैथ्यू डिग्बी वायट द्वारा डिजाइन की गई, इस पुल का निर्माण 1856 में शुरू हुआ था, लेकिन 1857 के विद्रोह के कारण इसमें विलंब हुई। इस पुल को 1982 में ‘ऑस्कर पुरस्कार’ जीतने वाली फिल्म ‘गांधी’ में दिखाया गया है।

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वर्तमान में इस पूल का उन्नयन व अपग्रेडेशन का काम तीव्र गति से चल रहा है

वर्तमान में इस पूल का उन्नयन एवं अपग्रेडेशन का काम तीव्र गति से चल रहा है, जिसमें नए डिजाइन का एच बीम स्लीपर और चेकर प्लेट बदलने के साथ-साथ गर्डर की पेटिंग जैसे कार्य भी शामिल हैं। उन्नयन के पश्चात यह पुल अगले कई वर्षों तक उपयोग के लिए उपयुक्त रहेगा। इस उन्नयन का संपूर्ण कार्य सीनियर डीईएन श्री उत्पल कांत के नेतृत्व में किया जा रहा है।

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इस पूल पर 1862 में शुरुआत की गई यातायात 160 वर्षों से अधिक से निर्बाध रूप से चल रही है – वरीय मंडल वाणिज्य प्रबंधक अभिनव सिद्धार्थ

वरीय मंडल वाणिज्य प्रबंधक अभिनव सिद्धार्थ ने बताया कि इस पूल पर 1862 में शुरुआत की गई यातायात 160 वर्षों से अधिक से निर्बाध रूप से चल रही है। जो कि आगे भी वर्षों तक अपनी सेवा देता रहेगा। इस विज्ञप्ति में जॉर्ज टर्नबुल की 1851 की नोटबुक का एक पृष्ठ का फोटो भी साझा किया जा रहा है। जिसमें उन्होंने उस बिंदु पर एक मील चौड़ी सोन नदी की अनुमानित चौड़ाई निर्धारित करने का विवरण दिया है। जहां उन्होंने पुल बनाने का निर्णय लिया था।

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नेहा गुप्ता की रिपोर्ट

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