रांची के रिम्स जमीन अतिक्रमण मामले में एसीबी ने नगर निगम अधिकारियों और बिल्डरों से पूछताछ की, हाईकोर्ट के आदेश के बाद जांच तेज।
RIMS Land Cas रांची: राजधानी रांची स्थित रिम्स की जमीन पर कथित अतिक्रमण मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नगर निगम के अधिकारियों, कर्मचारियों और संबंधित बिल्डरों को पूछताछ के लिए तलब किया है। इस कार्रवाई के बाद नगर निगम महकमे में हड़कंप मच गया है और मामले में आगे बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।
RIMS Land Cas:चार घंटे चली गहन पूछताछ, कई अहम सवाल
सूत्रों के अनुसार, नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों से करीब चार घंटे तक गहन पूछताछ की गई। इस दौरान नक्शा पास करने की पूरी प्रक्रिया को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए गए। एसीबी की टीम ने यह जानने की कोशिश की कि किन परिस्थितियों में निर्माण कार्यों को मंजूरी दी गई और किस स्तर पर अनियमितता या लापरवाही हुई।
पूछताछ के दौरान कुछ कर्मचारियों ने अहम जानकारियां साझा की हैं। एसीबी ने सभी बयानों को रिकॉर्ड कर लिया है और अब उनकी सत्यता की जांच की जा रही है। जांच एजेंसी जल्द ही दोबारा संबंधित पक्षों को पूछताछ के लिए बुला सकती है।
Key Highlights:
रिम्स जमीन अतिक्रमण मामले में एसीबी की बड़ी कार्रवाई
नगर निगम अधिकारियों और कर्मचारियों से 4 घंटे पूछताछ
बिल्डरों की भूमिका पर भी जांच तेज
नक्शा पास करने की प्रक्रिया पर उठे सवाल
हाईकोर्ट के आदेश के बाद जांच में तेजी
RIMS Land Cas:हाईकोर्ट के आदेश के बाद तेज हुई कार्रवाई
गौरतलब है कि झारखंड उच्च न्यायालय के आदेश के बाद इस पूरे मामले में कार्रवाई तेज हुई है। अदालत ने बिल्डरों, अधिकारियों और जमीन माफियाओं सहित अन्य संबंधित लोगों को आरोपी मानते हुए एसीबी को जांच का निर्देश दिया था। इसी के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
हाल ही में प्रशासन ने रिम्स की जमीन पर बने चार मंजिला मकानों और अन्य अवैध अतिक्रमण को ध्वस्त किया था। इस कार्रवाई के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया और जांच एजेंसियां सक्रिय हो गईं।
RIMS Land Cas:वैध कागजात के बावजूद अवैध निर्माण पर सवाल
सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि जिन मकानों और अपार्टमेंट्स को ध्वस्त किया गया, उनका विधिवत निबंधन और दाखिल-खारिज भी हुआ था। कई लोगों ने बैंक से ऋण लेकर निर्माण कराया था, जिससे पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अब एसीबी इस बात की तह तक जाने में जुटी है कि आखिर वैध कागजात के बावजूद अवैध निर्माण कैसे संभव हुआ और इसमें किन-किन स्तरों पर मिलीभगत रही।


