रोहिणी ने नीतीश सरकार के बजट को बताया झूठ का पुलिंदा, जनता को कुछ नहीं मिला

पटना : राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो व पूर्व सीएम लालू प्रसाद यादव की बेटी व 2024 में सारण लोकसभा सीट से पार्टी के उम्मीदवार रोहिणी आचार्य इन दिनों सोशल मीडिया पर काफी एक्टिव दिख रही हैं। साथ ही रोहिणी बिहार के खबरों पर लगातार नजर बनाए रहती हैं। कल अपने भाई व विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के चोट को लेकर भी एक्स से ट्वीट किया था। आज बिहार बजट पेश होने के बाद भी रोहिणी आचार्य ने एक्स पर ट्वीट कर बिहार सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने बिहार के बजट को झूठ का पुलिंदा बताया। इस बजट से बिहार की जनता को कुछ नहीं मिला।

आंकड़ों की बाजीगरी वाले बजट को प्रस्तुत कर खुद अपनी पीठ थपथपाने से पहले नीतीश सरकार को ये समझना होगा – रोहिणी आचार्य

रोहिणी आचार्य ने कहा कि आंकड़ों की बाजीगरी वाले बजट को प्रस्तुत कर खुद अपनी पीठ थपथपाने से पहले नीतीश सरकार को ये समझना होगा। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास के साथ मानव विकास और मानव विकास की खुशहाली के सूचकों का सतत मूल्यांकन किए जाने वाली आर्थिक नीति व अर्थव्यवस्था आज बिहार की सबसे बड़ी जरूरत है। मगर अफसोस की बात है कि आज प्रस्तुत किया गया बजट इस पर मौन है।

रोहिणी ने कहा- विकास का पीटा जाने वाला झूठा ढिंढोरा भी जल्द ही दम तोड़ देगा

उन्होंने कहा कि डबल-इंजन वाली सरकार के नीति-निर्धारकों को शायद ये भान नहीं है कि विकास का पीटा जाने वाला झूठा ढिंढोरा भी जल्द ही दम तोड़ देगा। यदि लोगों को हक के रूप में बुनियादी सेवाएं नहीं मिलीं। गैर-बराबरी की खाई कम नहीं हुई और श्रम-शक्ति का पलायन यूं ही जारी रहा तो क्या हाल होगा। गौरतलब है कि प्रति व्यक्ति आय के मामले में बिहार देश के सबसे पिछड़े राज्य में शुमार है और कल ही जारी हुई आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट से ही जाहिर है कि पिछले दो सालों से बिहार के विकास दर में गिरावट दर्ज हो रही है। पिछले 10 वर्षों में बिहार से 250 कारखाने दूसरे राज्यों में शिफ्ट हो गए।

राज्य के बजट का बड़ा हिस्सा खर्च नहीं हो पाता है – रोहिणी

रोहिणी आचार्य ने कहा कि नीतीश कुमार के पिछले 20 वर्षों के शासनकाल को बजट व अर्थ-प्रबंधन के दृष्टिकोण से देखा जाए तो ये स्पष्ट होता है कि राज्य के बजट के आकार और बजटीय योजनाओं के आकार में बड़ा अंतर होता है। राज्य के बजट का बड़ा हिस्सा खर्च नहीं हो पाता है। अधिकांश बड़ी केंद्रीय योजनाओं की राशि के लिए राज्य की ओर से प्रस्ताव तक नहीं भेजे जाते हैं। केंद्र से राशि मंगाने की चिंता नहीं होती है। अगर राशि आ भी जाती है तो खर्च नहीं की जाती है। खर्च किया जाता तो लेखा-जोखा, हिसाब नहीं दिया जाता है। हाल ही में सीएजी के द्वारा उजागर 72 हजार करोड़ के मामले से ये बात सत्यापित भी होती है।

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‘लचर अर्थ-प्रबंधन, संस्थागत व सत्ता संरक्षित भ्रष्टाचार से सरकार की कोई भी योजना , सरकार का कोई भी विभाग अछूता नहीं है’

रोहिणी ने आगे कहा कि लचर अर्थ-प्रबंधन, संस्थागत व सत्ता संरक्षित भ्रष्टाचार से सरकार की कोई भी योजना सरकार का कोई भी विभाग अछूता नहीं है। इन तमाम पहलूओं को संदर्भ में रख कर देखा जाए तो निष्कर्ष यही निकलता है कि बिहार का बजट खोखली घोषणाओं से भरे कागज के पुलिंदे से ज्यादा कुछ नहीं होता है। बिहार की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सबसे जरूरी बजटीय घोषणाओं व प्रावधानों के यथोचित व वास्तविक क्रियान्वयन की है।

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