नई दिल्ली : संसद का शीतकालीन सत्र जारी है। लोकसभा और राज्यसभा दोनों में जोरदार बहसें चल रही हैं। सोमवार को लोकसभा में वंदे मातरम् पर जोरदार बहस हुई। जिसमें पीएम नरेंद्र मोदी ने चर्चा की शुरुआत की तो विपक्ष की ओर प्रियंका गांधी ने सत्ता पक्ष पर पलटवार किया। आज इसी मुद्दे पर राज्यसभा में चर्चा हो रही है। सबसे पहले केंद्रीय गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बोले। उसके बाद विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे बोल रहे हैं। शाह ने राज्यसभा में कहा कि वंदे मातरम को चिरंजीव बनाने के लिए सदन चर्चा करे।
कांग्रेस के जिस जिस सांसद ने वंदे मातरम् नहीं गाने पर बयान दिया विपक्ष पर बरसे अमित शाह
अमित शाह ने राज्यसभा में कहा कि कांग्रेस के जिस जिस सांसद ने वंदे मातरम् नहीं गाने पर बयान दिया। सदन से बाहर चले गए, मैं इसकी लिस्ट आज शाम तक सदन के पटल पर रख दूंगा। इस सदन के चर्चा के रिकॉर्ड में रहना चाहिए कि कांग्रेस के सांसद वंदे मातरम् का विरोध करते हैं बंकिम चंद्र की 130वीं जयंती पर हमारी सरकार ने एक स्टांप जारी किया। आजादी के 75वीं वर्षगांठ पर हर घर तिरंगा अभियान भी हमने शुरू किया और आह्वान किया था तिरंगा फहराते वक्त वंदे मातरम् का कहना भूलना नहीं है।

वीर सावरकर ने बनाया त्रिवर्ण ध्वज – शाह
उन्होंने कहा कि जिस गान को गांधी ने राष्ट्र की शुद्धतम आत्मा से जुड़ा गीत कहा, वो वंदे मातरम् का टुकड़ा करने का काम कांग्रेस ने किया। वंदे मातरम् ने आजादी के आंदोलन को गति दी। श्यामजी कृष्ण वर्मा, मैडम भीखाजी कामा और वीर सावरकर ने भारत का त्रिवर्ण ध्वज निर्मित किया था, उस पर भी स्वर्णिम अक्षर में एक ही नाम लिखा था वंदे मातरम्। भारतीय जनता पार्टी (BJP) का एक भी सदस्य वंदे मातरम् गान के समय सम्मान के साथ खड़ा न हो ऐसा हो ही नहीं सकता।
‘हम मुद्दों से नहीं डरते…’, अमित शाह ने कांग्रेस पर बोला तीखा हमला
वंदे मातरम पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला।। उन्होंने कहा कि मैं कल देख रहा था कि कांग्रेस के कई सदस्य वंदे मातरम की चर्चा को राजनीतिक हथकंडा या मुद्दों से ध्यान भटकाने का हथियार मान रहे थे। हम मुद्दों पर चर्चा करने से नहीं डरते। संसद का बहिष्कार हम नहीं करते। अगर संसद चलने दी जाए तो सभी मुद्दों पर चर्चा होगी। हमारे पास छिपाने को कुछ नहीं है।

शाह ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु पर साधा निशाना
राज्यसभा में वंदे मातरम पर चर्चा के दौरान अमित शाह ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु पर तीखा हमला बोला। शाह ने कहा कि नेहरु ने वंदे मातरम के दो टुकड़े किए। तुष्टिकरण के लिए वंदे मातरम का विरोध किया गया। उन्होंने आगे कहा कि जब वंदे मातरम के 100 साल पूरे होने पर देश जश्न मनाता, तब देश को आपातकाल में डाल दिया गया। शाह की इस टिप्पणी पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी और सदन में हंगामा हुआ।
वंदे मातरम का विरोध नेहरु से लेकर आज तक कांग्रेस नेतृत्व के खून में – शाह
गृह मंत्री ने कहा कि गुलामी के कालखंड में वंदे मातरम् गीत ने घनघोर अंधेरे के बीच लोगों के मन में आजादी के खिलाफ लड़ने का जोश जगाया। जब वंदे मातरम 100 साल का हुआ, पूरे देश को बंदी बना दिया गया। जब 150 साल पर कल सदन में चर्चा शुरू हुई, गांधी परिवार के सदस्य नदारद थे। वंदे मातरम का विरोध नेहरु से लेकर आज तक कांग्रेस नेतृत्व के खून में है। कांग्रेस पार्टी की एक नेत्री ने लोकसभा में कहा कि वंदे मातरम पर अभी चर्चा की कोई जरूरत नहीं है।

केंद्रीय गृह मंत्री ने रामायण का उदाहरण दिया
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि वंदे मातरम् में भारत माता को सरस्वती, लक्ष्मी और दुर्गा के स्वरूप बताया गया है। विद्या, संपन्नता और वीरता हमारी मिट्टी से ही मिलती है। उन्होंने रामायण का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रभु राम ने लंका में रहने का प्रस्ताव ठुकराते हुए कहा था कि माता और मातृभूमि ईश्वर से भी बड़ी होती है। यही भाव बंकिम बाबू ने वंदे मातरम के जरिए जीवित किया।
भारत की सीमाएं अधिनियम से नहीं, बल्कि संस्कृति से तय हुई – अमित शाह
अमित शाह ने कहा कि भारत की सीमाएं अधिनियम से नहीं, बल्कि संस्कृति से तय हुई हैं। सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को लेकर जागरूक करने का काम बंकिमचंद्र ने किया। जब अंग्रेजों ने प्रतिबंध लगाया, तब बंकिम बाबू ने लिखा कि मेरे सारे साहित्य को गंगा में बहा दो, लेकिन वंदे मातरम जन-जन का गान होगा।

‘अंग्रेजों के दौर में वंदे मातरम बोलने वालों पर कोड़े बरसाए जाते थे’
अमित शाह ने कहा कि वंदे मातरम ने देश को जागरूक किया और यह चर्चा हमेशा जरूरी रहेगी। शाह ने बताया कि अंग्रेजों के दौर में वंदे मातरम बोलने वालों पर कोड़े बरसाए जाते थे, फिर भी यह गीत कश्मीर से कन्याकुमारी तक फैला। अंग्रेजों ने नई संस्कृति थोपने की कोशिश की थी, लेकिन वंदे मातरम् उस समय पुनर्जागरण का मंत्र था।
50वें पड़ाव पर वंदे मातरम् के टुकड़े किए गए – अमित शाह
अमित शाह ने कहा कि वंदे मातरम् के टुकड़े हुए तो देश बंट गया। 50वें पड़ाव पर वंदे मातरम् के टुकड़े किए गए थे। तुष्टिकरण न होता तो देश का बंटवारा न होता।

वंदे मातरम सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा – केंद्रीय गृह मंत्री
अमित शाह ने कहा कि सात नवंबर 1875 को बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की वंदे मातरम् रचना पहली बार सार्वजनिक हुई थी। शुरुआत में इसे एक उत्कृष्ट साहित्यिक कृति माना गया, लेकिन जल्द ही यह गीत देशभक्ति, त्याग और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक बन गया, जिसने आजादी के आंदोलन का मार्ग प्रशस्त किया। शाह ने कहा कि वंदे मातरम सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा है, जिसने लाखों लोगों को प्रेरित किया।
राष्ट्रीय समर्पण का आह्वान हमेशा से जरूरी – शाह
केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय समर्पण का आह्वान हमेशा से जरूरी रहा है और 2047 में भी महत्वपूर्ण रहेगा। उन्होंने भारत की पहचान और लोकतांत्रिक भावना में इसके स्थायी स्थान पर जोर दिया।
जब जवान प्राण त्यागता है तो वंदे मातरम् गाता है – अमित शाह
उन्होंने कहा कि वंदे मातरम सिर्फ बंगाल तक या देश तक सीमित नहीं रहा। दुनिया भर में जहां तक आजादी के दीवाने थे, उन्होंने इसका गुणगान किया। जब सरहद पर एक जवान अपने प्राण त्यागता है, तो उसकी जुबान पर वंदे मातरम् होता है।

राज्यसभा में बोले अमित शाह हम सब सौभाग्यशाली…
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि वंदे मातरम् के यशोगान के लिए चर्चा के लिए हम यहां आए है। चर्चा के जरिए हमारे देश के किशोर, युवा, आने वाली पीढ़ियों तक वंदे मातरम् का योगदान पता चले। हम सब सौभाग्यशाली है कि हमें एतिहासिक पल के साक्षी बन रहे हैं। इस महान सदन में वंदे मातरम् पर चर्चा हो रही है तब कल कुछ सदस्यों ने लोकसभा में सवाल किया था इस चर्चा की जरूरत क्या है। चर्चा की जरूरत वंदे मातरम् के प्रति समर्पण के प्रति जरूरत जब यह बना तब भी थी और अब भी है।
कुछ लोग इसको बंगाल चुनाव से जोड़ कर देख रहे हैं वो सही नहीं है – अमित शाह
अमित शाह ने कहा कि जिनको आज वंदे मातरम् पर चर्चा क्यों हो रही है समझ नहीं रही है उनको अपने समझ पर विचार करने की जरूरत है। कुछ लोग इसको बंगाल चुनाव से जोड़ कर देख रहे हैं वो सही नहीं है। ये सही है कि बंकिम बाबू की पृष्टभूमि बंगाल थी लेकिन वंदे मातरम् बंगाल तक समिति नहीं था। आज भी सरहद पर जवान अपना सर्वोच्च बलिदान देता है उसके मुंह पर एक ही मंत्र होता है वो है वंदे मातरम्। वंदे मातरम् का नारा आजादी के उद्घोष का नारा बन गया था। वह आजादी का प्रेरणा स्रोत बना था। वंदे मातरम् के दोनों सदनों में चर्चा से हमारे बच्चे, किशोर युवा और आने वाली कई पीढ़ियां वंदे मातरम् के महत्व को समझेगी।

वंदे मातरम पर चर्चा की जरूरत हमेशा थी – शाह
शाह ने कहा कि वंदे मातरम् की रचना में राष्ट्रभक्ति और राष्ट्र की संस्कृति का जो भाव है और संस्कृति के साथ जुड़ाव आने वाली पीढ़ियों का जुड़ाव हो। हम सब सौभाग्यशाली है कि इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बन रहे हैं और हिस्सा भी ले रहे हैं। कुछ सदस्यों ने लोक सभा में सवाल उठाया था आज वंदे मातरम् पर आज चर्चा की जरूरत क्या है। वंदे मातरम् पर चर्चा की जरूरत पहले भी थी और आगे भी रहेगी।
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