Gaya–आजादी के 74वें वर्ष पर जब पूरे देश में धूमधाम से आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है. विकास के नगाड़े पीटे जा रहे हैं. लेकिन, इस सब से अलग सूबे बिहार के गया जिले के शेरघाटी अनुमंडल में एक गांव ऐसा भी है, जहां अब तक आजादी का अमृत नहीं पहुंचा. साधन सम्पन्न समूहों ने आजादी से निकला सारा अमृत गटक लिया, इन अभाग्यों के हिस्से छोड़ा सिर्फ बेचारगी और बेबसी.
जी हां, हम बात कर रहे हैं शेरघाटी प्रखंड के जलसार टोला स्थित आहर के तलहटी में बसे दलित परिवारों की. इन्दरा आवास से शुरु हुई यात्रा अब प्रधानमंत्री आवास योजना तक आ गई है, विकास का कथित कारवां बढ़ता ही गया, लेकिन इन अभाग्यों को नहीं मिला सिर छुपाने का ठौर. और यह तब हुआ जब कथित रुप से बिहार जंगल राज्य से निकल कर सुशासन के छाये में जी रहा है. लगातार 16 बरसों से सुशासन की बयार बह रही है. आज भी ये दलित परिवार झोपड़ी लगाकर रहने को मजबूर है. चाहे कड़ाके की ठंड हो या जेठ की दुपहरिया इनकी जिन्दगी इन झोपड़ी में ही कटती है.

स्थानीय लोग बताते हैं कि आज तक किसी जनप्रतिनिधि या सरकारी कारिन्दे ने इनकी खोज खबर नहीं ली. पांचू मांझी,कालो देवी, रामबली मांझी, मंजू देवी बताते है कि करीब 7- 8 वर्ष से इसी आहार की तलहटी में रहे हैं, किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिलता. मेहनत मजदूरी कर अपना और अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं.
रिपोर्ट-आशीष कुमार


