रांची: सुप्रीम कोर्ट ने अराजपत्रित कर्मचारियों के वेतन भुगतान से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए झारखंड राज्य की कार्यशैली पर कड़ी टिप्पणी की है।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस राजेश बिंदल की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान वकीलों का पक्ष सुनने के बाद कहा कि यह मामला पिछले लगभग 20 साल से कर्मचारियों को वेतन देने से जुड़ा है।
इस तरह के संवेदनशील मामले में अब तक झारखंड सरकार सो रही है, इस मामले में किसी वकील को नियुक्त अब तक नहीं की गई है। खंडपीठ ने झारखंड के मुख्य सचिव को सुनवाई के दौरान कोर्ट में उपस्थित रहने के लिए कहा था, लेकिन नोटिस के बावजूद झारखंड की ओर से कोई भी उपस्थित नहीं हुआ है।







