Patna- पानी से जलने वाले चाईनिज दीये से राजधानी पटना का बाजार पट चुका है. तेल और घी को छोड़ पानी से जलने वाले चाईनिज दीयों ने कुम्हारों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. दीपावली त्यौहार में दूसरे के घरों को दीपों से उजाला करने वाले कुम्हार के घर में ही अंधेरा पसरा है. कोरोना की मार से बाहर निकल रहे बाजार में कुम्भकारों को इस दीपावली कमाई की उम्मीद थी. लेकिन इन चाइनिज दियों ने उनके जीवन में अंधियारा पसार दिया है.
चाईनिज दीये से पट्टा पड़ा है राजधानी पटना का बाजार
पटना सिटी के कुम्हारों में मायूसी छाई हुई है. दीपावली त्योहार को लेकर तीन माह पूर्व से ही कुम्हार का पूरा परिवार मिल कर मिट्टी के दीए और खिलौना बनाये थें. लेकिन सरसों और घी आसमान छुता दाम ने कुम्भकारों का दम निकाल दिया है. लोग बचत की आस में चाइनीज दीये की ओर जा रहे हैं. मिट्टी के खिलौने की जगह चाईनिज मिट्टी से बने चमकदार खिलौने की खरीदारी कर रहे है.
वोकल फोर लोकल का दिख नहीं रहा असर
कुम्भकार कहते है कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वोकल फोर लोकल की बात की गयी थी, लेकिन बाजार में वैसा कुछ दिख नहीं रहा है, आखिर किसके आदेश से इन चाइनिज दीये बाजार में उतारे गये हैं, कौन दे रहा है इसकी इजाजत. कुम्हार परिवारों का कहना है कि महंगाई की मार ने बदहाल बना दिया है. विकल्प के अभाव में परम्परागत कारोबार करना पड़ रहा है.
वर्ष भर इंतजार के बाद कड़ी धूप में काम कर दीया बनाते है,
लेकिन मिट्टी के दीए और खिलौने की बिक्री हर वर्ष कम होती जा रही है.
मेहनत का मेहनताना नहीं मिल पा रहा है.
कुम्हार सरकार से संरक्षण देने की उमीद लगाए है, लेकिन उनकी पीड़ा है
कि इन चाईनिज दीये और खिलौनों को लाने की अनुमति कौन दे रहा है.
किसके आदेश से पूरा का पूरा बाजार चाईनिज खिलौनों और दीये से पट्टा पड़ा है.
पटना सिटी में चाईनिज सामानों का भरमार लगा हुआ है.
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