झारखंड में बढ़ती आत्महत्या दर: बेरोजगारी और अवसाद से जूझ रहे युवा सबसे अधिक प्रभावित

रांची: झारखंड में आत्महत्या (Suicide) के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट बताती है कि राज्य में आत्महत्या की दर में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस (World Suicide Prevention Day 2025) पर यह आंकड़े हमें चेतावनी देते हैं कि मानसिक तनाव, बेरोजगारी और सामाजिक दबाव राज्य के युवाओं और विद्यार्थियों के लिए गंभीर चुनौती बन चुके हैं।


Key Highlights

  • एनसीआरबी रिपोर्ट के अनुसार झारखंड में आत्महत्या दर में 20% की बढ़ोतरी

  • 2019 में 1,825 और 2021 में 2,181 लोगों ने की आत्महत्या

  • 2022 में 2,000 से ज्यादा मामले दर्ज हुए

  • बेरोजगार (584) और विद्यार्थी (136) आत्महत्या के सबसे बड़े शिकार

  • गृहिणियां (465) और मजदूर (359) भी बड़ी संख्या में प्रभावित

  • सरकारी नौकरी करने वालों में सबसे कम आत्महत्या के मामले (169)

  • विशेषज्ञों के अनुसार आत्महत्या मानसिक बीमारी का संकेत, जिसे समय पर पहचानना जरूरी

  • हेल्पलाइन नंबर : 14416 और 9471136697 आत्महत्या रोकथाम के लिए जारी


झारखंड में आत्महत्या दर में लगातार इजाफा

एनसीआरबी (NCRB Report 2022) के मुताबिक 2019 में झारखंड में 1,825 लोगों ने आत्महत्या की थी। यह संख्या 2021 में बढ़कर 2,181 हो गई। 2022 में भी 2,000 से ज्यादा आत्महत्या के मामले सामने आए। यह स्पष्ट करता है कि राज्य में आत्महत्या दर चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुकी है।

बेरोजगारी और पढ़ाई का दबाव बड़ी वजह

आत्महत्या करने वालों में सबसे बड़ी संख्या बेरोजगार युवाओं और विद्यार्थियों की है।

  • बेरोजगार : 584 मामले

  • विद्यार्थी : 136 मामले

  • गृहिणियां : 465 मामले

  • मजदूर : 359 मामले

सरकारी नौकरी वाले वर्ग में आत्महत्या की घटनाएं सबसे कम रही हैं। 2022 में केवल 169 सरकारी कर्मचारियों ने यह कदम उठाया। इसके विपरीत, निजी और असंगठित क्षेत्र में आत्महत्या के मामले कहीं अधिक दर्ज किए गए।

आत्महत्या के संकेत जिन्हें नज़रअंदाज़ न करें

विशेषज्ञ बताते हैं कि आत्महत्या अचानक लिया गया फैसला नहीं होता। इसके पहले कुछ संकेत नज़र आने लगते हैं, जैसे—

  • बार-बार आत्महत्या की बातें करना

  • लगातार उदासी और निराशा में रहना

  • खुद को असफल मानना

  • दोस्तों और परिवार से दूरी बना लेना

  • भविष्य को निरर्थक मान लेना

समाधान और रोकथाम की दिशा

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि आत्महत्या रोकने के लिए सिर्फ इलाज ही काफी नहीं, बल्कि समाज और परिवार को भी जिम्मेदारी निभानी होगी।

  • युवाओं को काउंसलिंग और रोजगार सहायता देना

  • मानसिक स्वास्थ्य शिक्षा को बढ़ावा देना

  • परिवार और समुदाय में संवाद और सहयोग को बढ़ाना

  • समय रहते डॉक्टर या मनोवैज्ञानिक से मदद लेना

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार आत्महत्या का विचार आना दिमाग में बायोलॉजिकल बदलाव की वजह से होता है। यह बदलाव समय रहते पहचाने और रोके जा सकते हैं। बातचीत, काउंसलिंग और समय पर इलाज से किसी भी व्यक्ति को बचाया जा सकता है।

झारखंड में आत्महत्या रोकथाम हेल्पलाइन नंबर

आत्महत्या जैसे गंभीर कदम से बचाने के लिए तुरंत मदद लें। राज्य और केंद्र सरकार ने इसके लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं—

  • राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर : 14416

  • दूसरा हेल्पलाइन नंबर : 9471136697

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