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NABARD योजना से बिहार के एक हजार से अधिक ग्रामीण पुल व 4800 किमी सड़कें बनकर तैयार

पटना : NABARD योजना – नदियों, नालों और खस्ताहाल पगडंडियों के कारण दशकों से मुख्यधारा से कटे बिहार के सुदूर गांवों की स्थिति अब तेजी से बदल रही है। ग्रामीण कार्य विभाग ने राज्य योजना (NABARD) के तहत संपर्कता का एक ऐसा व्यापक नेटवर्क तैयार किया है, जिसने न केवल गांवों की दूरियों को मिटाया है, बल्कि नदियों के कारण होने वाली आवागमन की पुरानी बाधाओं को भी हमेशा के लिए दूर कर दिया है। राज्य में केवल पक्की सड़कों का जाल ही नहीं बिछाया जा रहा है, बल्कि सुगम सम्पर्कता के लिए पुलों का भी निर्माण किया गया है। इस योजना के धरातल पर उतरने से अब लोगों का आवागमन मौसम पर निर्भर नहीं है।

कोसी-सीमांचल में पुल बने जीवनरेखा, आवागमन हुआ आसान

इस योजना के अंतर्गत अबतक पूरे राज्य में 2,021 ग्रामीण सड़कों और 1,271 पुलों के निर्माण की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई थी। जिसको लेकर विभाग ने तत्परता दिखाते हुए अबतक 1,898 सड़कों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया है, जिससे राज्य भर में 4,845 किलोमीटर लंबे सुदृढ़ पक्के मार्ग तैयार हुए हैं। सड़कों के निर्माण में नालंदा जिला में सबसे बेहतर कार्य हुआ है, जहां सर्वाधिक 203 पथों (370 किलोमीटर को आम जनता को समर्पित किया जा चुका है। इसके साथ ही राजधानी पटना के ग्रामीण इलाकों में 157 सड़कें (329 किलोमीटर), गया में 120 सड़कें (355 किलोमीटर) और मुंगेर में 149 सड़कें (203 किलोमीटर) बनकर पूरी तरह तैयार हो चुकी हैं।

NABARD योजना – गांवों तक पहुंची पक्की सड़कें और सुरक्षित पुल

इस योजना की महत्वपूर्ण उपलब्धि राज्य में 1,008 पुलों के निर्माण कार्य का पूर्ण होना भी है। बिहार जैसे राज्य में जहां कई जिले बाढ़ और नदियों के जाल से प्रभावित रहते हैं, वहां इन पुलों का निर्माण किसी जीवनरेखा से कम नहीं है। विशेषकर कोसी और सीमांचल के इलाकों में इन पुलों ने बड़ी राहत दी है।

इस योजनान्तर्गत अररिया जिले में सर्वाधिक 66 पुलों का निर्माण पूर्ण किया जा चुका है। इसी प्रकार पूर्णिया में 62, नालंदा में 62, किशनगंज में 58 और मधुबनी में 55 नए पुल अब लोगों को निर्बाध सफर की गारंटी दे रहे हैं। पहले जहां बरसात के दिनों में चचरी पुलों या नाव के सहारे जान जोखिम में डालकर नदी-नाले पार करने पड़ते थे, वहां अब पक्के और सुरक्षित पुल बन चुके हैं।

हजारों किलोमीटर लंबी ग्रामीण सड़कों और एक हजार से अधिक पुलों के इस नेटवर्क ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई संजीवनी दी है

आपको बता दें कि हजारों किलोमीटर लंबी ग्रामीण सड़कों और एक हजार से अधिक पुलों के इस नेटवर्क ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई संजीवनी दी है। ग्रामीण कार्य विभाग का यह प्रयास केवल आधारभूत संरचना के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्रों में समग्र विकास को गति देने का एक व्यापक अभियान है। नाबार्ड के सहयोग से संचालित यह योजना बिहार के गांवों को मुख्यधारा से जोड़ते हुए एक सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित राज्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

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