Tadasha Mishra DGP Case, रांची: झारखंड की वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी तदाशा मिश्रा की DGP पद पर नियुक्ति का मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। केंद्र सरकार ने झारखंड सरकार और अन्य पक्षों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग करते हुए याचिका दायर की है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की याचिका को गुरुवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई है।
CJI की पीठ के सामने उठा मामला
केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बुधवार को भारत के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामला उठाया। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे। तुषार मेहता ने अनुरोध किया कि केंद्र की अवमानना याचिका को तदाशा मिश्रा की DGP नियुक्ति से जुड़ी पहले से लंबित अन्य याचिकाओं के साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। प्रधान न्यायाधीश ने इस अनुरोध को स्वीकार कर लिया।
गुरुवार को होगी अहम सुनवाई
तदाशा मिश्रा की DGP नियुक्ति से संबंधित अन्य याचिकाएं भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। इन याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि उनकी नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं की गई। अब गुरुवार को केंद्र की अवमानना याचिका के साथ इन मामलों पर भी सुनवाई प्रस्तावित है। इस सुनवाई से यह स्पष्ट हो सकता है कि नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों पर अदालत आगे किस दिशा में बढ़ती है।
रिटायरमेंट से एक दिन पहले बनी थीं DGP
मामले में तदाशा मिश्रा की नियुक्ति की तारीख और उनकी सेवानिवृत्ति के बीच का अंतर प्रमुख मुद्दा है। झारखंड सरकार ने 30 दिसंबर 2025 को उन्हें राज्य का DGP नियुक्त किया था। बताया गया है कि वह 31 दिसंबर 2025 को सेवानिवृत्त होने वाली थीं। यानी उनकी नियुक्ति सेवानिवृत्ति से महज एक दिन पहले हुई थी। इसी अवधि को लेकर सुप्रीम कोर्ट के पूर्व दिशा-निर्देशों के संदर्भ में सवाल उठाए गए हैं।
छह महीने की सेवा और दो साल के कार्यकाल का मुद्दा
वरिष्ठ अधिवक्ता और न्यायमित्र राजू रामचंद्रन ने पहले सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि DGP की नियुक्ति के समय संबंधित अधिकारी की कम से कम छह महीने की सेवा शेष रहने का निर्देश है। उनका कहना था कि तदाशा मिश्रा की नियुक्ति इस मानदंड से जुड़ी हुई है। DGP नियुक्ति से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का आधार वर्ष 2006 का प्रकाश सिंह फैसला भी है। निर्देशों के मुताबिक राज्य सरकार को तीन सबसे वरिष्ठ अधिकारियों में से DGP का चयन करना होता है। इसके लिए UPSC द्वारा तैयार पैनल और अधिकारियों के सेवाकाल, सेवा रिकॉर्ड तथा पुलिस बल के नेतृत्व के अनुभव जैसे मानकों का उल्लेख किया गया है। निर्देशों में DGP के न्यूनतम दो वर्ष के कार्यकाल का भी प्रावधान है। इसी प्रावधान को लेकर तदाशा मिश्रा की नियुक्ति पर सवाल उठाए गए हैं।
केंद्र ने मांगी अवमानना की कार्रवाई
केंद्र की याचिका में झारखंड सरकार की कार्रवाई को सुप्रीम कोर्ट के DGP नियुक्ति संबंधी दिशा-निर्देशों के संदर्भ में चुनौती दी गई है। केंद्र ने इसी आधार पर अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का अनुरोध किया है। हालांकि, नियुक्ति से संबंधित अंतिम स्थिति अदालत की सुनवाई और उसके आदेश से स्पष्ट होगी। अब गुरुवार की सुनवाई पर नजर है, जहां केंद्र की अवमानना याचिका के साथ DGP नियुक्ति से जुड़ी अन्य याचिकाओं पर भी सुनवाई होगी।


















