बोकारो (चास): मवेशी चोरी से ग्रामीण परेशान – चास प्रखंड के चौफांद गांव सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों में पिछले एक वर्ष से मवेशी चोरी की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। चौफांद, भटुआ, जोलाहडीह, पुपुनकी समेत कई गांवों से गाय, बैल और बछड़ों के गायब होने की शिकायतें बढ़ती जा रही हैं। स्थिति यह है कि लगभग हर दूसरे–तीसरे घर में किसी न किसी मवेशी के चोरी या लापता होने की बात सामने आ रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि मवेशी सुबह चरने के लिए निकलते हैं, लेकिन शाम तक वापस नहीं लौटते। जिन इलाकों में पहले बड़ी संख्या में मवेशी दिखाई देते थे, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है। इससे पशुपालकों में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है।

मवेशी चोरी से ग्रामीण परेशान :
ग्रामीणों के अनुसार, हाल ही में सरस्वती पूजा के दिन भी भटुआ गांव से दो गायों के गायब होने की सूचना मिली थी। इसी तरह चौफांद गांव के एक पशुपालक की दो गायें भी लापता हो गईं। बताया गया कि उनमें से एक गाय को दो दिन पहले सीआईएसएफ कॉलोनी, सेक्टर-11C के पास देखा गया था, लेकिन इसके बाद उसका कोई सुराग नहीं मिला।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मवेशियों की कोई औपचारिक पहचान नहीं होती, न ही उनके पास कोई दस्तावेज़ या पहचान चिन्ह होता है। यही वजह है कि मवेशी चोर इस स्थिति का फायदा उठाकर आसानी से गाय-बैलों को उठा ले जाते हैं। पशुपालकों के लिए यह केवल आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत और भावनात्मक जुड़ाव का भी सवाल है।
ग्रामीणों का दर्द यह है कि बछड़े को छोटे से पाल-पोसकर बड़ा किया जाता है और जब वह दूध देने या काम के लायक होता है, तभी चोरी हो जाता है। इसके बाद वह काट दिया गया या कहीं बेच दिया गया—इस अनिश्चितता ने पशुपालकों को मानसिक रूप से तोड़ दिया है।

ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस थाना और कानूनी प्रक्रिया के झंझट के डर से कई लोग खुलकर शिकायत दर्ज नहीं करा पा रहे हैं। ऐसे में मवेशी चोरी का यह नेटवर्क और भी मजबूत होता जा रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि यदि इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाए, तो प्रशासन पर दबाव बनेगा और गश्त बढ़ेगी।
यह मामला केवल कुछ गांवों तक सीमित नहीं है। बोकारो और उससे सटे धनबाद जिले के कई ग्रामीण इलाकों में मवेशी चोरी की घटनाएं आम होती जा रही हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस गंभीर समस्या पर तत्काल संज्ञान लेने, रात्रि गश्त बढ़ाने और संगठित मवेशी चोर गिरोह के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
(यह शिकायत “चास के ग्रामीणों की शिकायत” के रूप में प्रकाशित की गई है। शिकायतकर्ताओं की पहचान सुरक्षा कारणों से गोपनीय रखी गई है।)
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