झारखंड में मौसम का बड़ा बदलाव, रांची में तापमान 8 डिग्री गिरा, 6 मई तक बारिश और आंधी का यलो अलर्ट, ठनका से एक की मौत।
Weather Update रांची: झारखंड में बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी और बांग्लादेश से मध्यप्रदेश व पश्चिम बंगाल तक बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन का असर साफ दिखने लगा है। गुरुवार को रांची समेत पूरे राज्य में मौसम अचानक बदल गया और कई जिलों में तेज बारिश दर्ज की गई। इस बदलाव के कारण राजधानी रांची में अधिकतम तापमान 8 डिग्री गिरकर 30.7 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया, जो सामान्य से 6 डिग्री कम है।
बारिश के दौरान ठनका गिरने से बरियातू क्षेत्र में कल्हाई लाल की मौत हो गई। वे भरमटोली नदी के किनारे भैंस चरा रहे थे। इस घटना ने मौसम के खतरनाक पहलू को भी उजागर किया है।
Weather Update: 6 मई तक आंधी-बारिश का अलर्ट
मौसम विभाग के अनुसार राज्य में 6 मई तक मौसम का यही रुख बना रहेगा। इस अवधि में लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी, लेकिन आंधी और बारिश का सिलसिला जारी रहेगा।
2 मई को उत्तर-पश्चिमी हिस्से को छोड़कर लगभग पूरे झारखंड में बारिश होने की संभावना जताई गई है। वहीं 3 से 6 मई के बीच राज्यभर में आंधी के साथ बारिश होगी। इसके लिए यलो अलर्ट जारी किया गया है।
Key Highlights
झारखंड में साइक्लोनिक सर्कुलेशन का असर, मौसम में बड़ा बदलाव
रांची में तापमान 8 डिग्री गिरकर 30.7 डिग्री पर पहुंचा
6 मई तक आंधी और बारिश का यलो अलर्ट जारी
ठनका गिरने से बरियातू में एक व्यक्ति की मौत
भविष्य में देश में असामान्य गर्म दिनों की संख्या बढ़ने की चेतावनी
Weather Update: रांची में तेज हवाओं के साथ बारिश
रांची और आसपास के इलाकों में गुरुवार को करीब 4 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। इस दौरान 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलीं, जिससे मौसम और ठंडा हो गया। अचानक बदले मौसम ने लोगों को गर्मी से राहत जरूर दी, लेकिन तेज हवाओं और बिजली गिरने की घटनाओं ने चिंता भी बढ़ा दी है।
Weather Update: भविष्य में बढ़ेंगे असामान्य गर्म दिन
पर्यावरण थिंक टैंक Council on Energy, Environment and Water (सीईईडब्ल्यू) के एआई प्लेटफॉर्म ‘कार्विस’ की रिपोर्ट के अनुसार, देश में आने वाले दो दशकों में असामान्य रूप से गर्म दिनों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है।
रिपोर्ट बताती है कि 1981-2010 के आधार की तुलना में अगले 20 वर्षों में हर साल 15 से 40 अतिरिक्त दिन अत्यधिक गर्म हो सकते हैं। महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों में इसका प्रभाव सबसे अधिक देखने को मिल सकता है।
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