PESA कानून 1996 (PESA Act 1996) को झारखंड सरकार ने कैबिनेट की बैठक में आज (23 दिसंबर) मंजूरी दे दी है. आज मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक हुई. यह बैठक झारखंड मंत्रालय (प्रोजेक्ट भवन) स्थित मंत्रिपरिषद कक्ष में हुई. इस बैठक के दौरान कुल 39 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है, जिसमें से एक है ‘पेसा कानून’ (PESA Act). जानकारी के लिए बता दें, साल 2024 में ही झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार से कहा था कि पेसा कानून 1996 को दो महीने के भीतर लागू किया जाए. जिसे अब जाकर साल 2025 के आखिरी महीने के 23 तारीख को हुई कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दे दी गई है. बता दें, संसद ने साल 1996 में ही पेसा कानून को पारित किया था. जिसके बाद राष्ट्रपति की अनुमति के बाद यह कानून बना, लेकिन झारखंड में आज तक यह कानून लागू नहीं हो पाया था.
PESA कानून 1996 क्या है?
पेसा कानून (PESA Act) झारखंड से पहले कुल 10 राज्यों में लागू किया जा चुका है. इस सूची में जुड़ने वाला 11वां राज्य बन गया है. पांचवीं अनुसूची के क्षेत्रों में पेसा एक्ट लागू करने की व्यवस्था है. झारखंड से पहले इस सूची में कुल 10 राज्य (आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान और तेलंगाना) शामिल थे. आपकी जानकारी के लिए बता दें, पेसा कानून उन राज्यों में लागू किया जाता है, जिन राज्यों में जनजातियों की आबादी अधिक है. अब इस सूची में झारखंड राज्य भी जुड़ गया है.
ये है पेसा कानून का मुख्य उद्देश्य
पेसा कानून एक ऐसा कानून है, जिसे उन राज्यों के लिए बनाया गया है जहां आदिवासी आबादी अधिक है और यह क्षेत्र आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े हैं. ऐसे राज्यों में पेसा कानून को लागू करके अपने राज्य के विकास प्रगति को और अधिक मजबूती प्रदान करना सरकार का मुख्य उद्देश्य है. इसकी आवश्यकता इसलिए महसूस की गई क्योंकि इन राज्यों में जो प्रशासनिक मशीनरी काम कर रही है, उनका विस्तार इन क्षेत्रों तक नहीं हो पाता है. इस कानून का उद्देश्य पंचायतों के संवैधानिक प्रावधानों और आदिवासियों के विशेष पारंपरिक अधिकारों के बीच सामंजस्य करना. पेसा एक्ट के उद्देश्य इस प्रकार हैं.
- पंचायतों से संबंधित भारतीय संविधान के भाग IX के प्रावधानों को कुछ संशोधनों के साथ अनुसूचित क्षेत्रों तक ले जाना आदिवासी आबादी को स्वशासन प्रदान करना
- ग्राम शासन स्थापित करना और ग्राम सभा को शक्तिशाली बनाना-आदिवासियों के पारंपरिक प्रथाओं के अनुसार प्रशासनिक ढांचा विकसित करना
- आदिवासियों की परंपराओं और रीति-रिवाजों का संरक्षण
- आदिवासियों की आवश्यकताओं के अनुसार पंचायतों को शक्तिशाली बनाना
- प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण पेसा अधिनियम आदिवासी समुदायों को उनके क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों, जैसे भूमि, जल और जंगलों के प्रबंधन और उपयोग पर नियंत्रण प्रदान करता है.
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