Pakur: पिंक ऑटो चलाकर महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर

पाकुड़ : आत्मनिर्भर महिलाएं- झारखंड के आदिवासी बहुल पाकुड़ जैसे पिछड़े इलाके की

महिलाएं भी अब पुरुषों के साथ कंधे से कंधे मिलाकर चल रही हैं.

पुरुष प्रधान समाज की इन महिलाओं ने ये सिद्ध कर दिया की

महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं हैं.

कभी घर के कामों में उलझी रहने वाली ये महिलाएं अब पिंक ऑटो चलाकर आत्मनिर्भर बनने की राह पर हैं.

आत्मनिर्भर महिलाएं: स्वयं सहायता समूह का खास योगदान

सुबह से शाम तक ऑटो के सहारे अपनी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने की

इनकी परिकल्पना को साकार करने में महिला स्वयं सहायता समूह का खास योगदान रहा है.

महिला स्वयं सहायता समूह के माध्यम से इन जरूरतमंद महिलाओं को पहले तो

ऑटो चलाने की ट्रेनिंग दी गयी फिर उन्हें पिंक ऑटो उपलब्ध करवाया गया.

अब ये महिलाएं पूरी तरह से बेखौफ होकर ऑटो चलाकर अपने परिवार का भरण पोषण कर रही हैं.

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आत्मनिर्भर महिलाएं: रोजाना पांच से छह सौ रुपये की आमदनी

इन महिलाओं की माने तो पहले ये अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए दिहाड़ी मजदूरी का काम करती थी, वो काम भी रोजाना नहीं मिल पाता था. अब महिलाएं अपने पति की तरह रोजाना पांच सौ से छह सौ रुपये तक की आमदनी कर लेती हैं.

महिलाओं के इस काम-काज से उनके परिवार की रौनक तो बदली ही है, अब पहले जैसे उन्हें सेठ-साहूकारों के भरोसे कर्ज के लिए भी नहीं रहना पड़ता है. आदिवासी बहुल इस इलाके की महिलाएं ना केवल खुद आत्मनिर्भर बन रही हैं बल्कि वैसे महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का काम कर रही हैं, जो आत्मनिर्भर बनना चाहती हैं.

रिपोर्ट: संजय सिंह

Saffrn

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