विश्व प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला 2025 का हुआ भव्य शुभारम्भ,गर्भगृह में एक साथ विराजमान हैं भगवान विष्णु और शिव

विश्व प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला 2025 का हुआ भव्य शुभारम्भ,गर्भगृह में एक साथ विराजमान हैं भगवान विष्णु और शिव

पटना : विश्व प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला का भव्य शुभारंभ हो चुका है। मेला का उद्घाटन सारण कमिश्नर राजीव रौशन, डीएम अमन समीर व डीआईजी नीलेश कुमार सहित कई अधिकारियों ने दीप जला कर किया। इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुआ मेला 10 दिसंबर तक चलेगा।

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गर्भगृह में होती है भगवान विष्णु और शिव की पूजा

उदघाटन के अवसर पर कमिश्नर ने कहा कि यह भूमि हरि और हर की है। बिहार का हरिहर नाथ मंदिर, एक ऐसा मंदिर है, जहाँ गर्भगृह में एक ही साथ भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा होती है। जहां संहार और पालन दोनों का संगम है। यही कारण है कि हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला सदियों से श्रद्धा, संस्कृति और समरसता का प्रतीक बना हुआ है। उन्होंने कहा कि समय के साथ मेले ने अपने स्वरूप को बदला है, लेकिन इसकी आत्मा अब भी लोकजीवन से जुड़ी हुई है।स्थानीय लोग इसे छत्तर मेला के नाम से पुकारते हैं।

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गंगा और गंडक के संगम पर स्थित ऐतिहासिक धरोहर

“गंगा और गंडक के संगम पर स्थित यह भूमि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत की धरोहर है। आज यह केवल पशु मेला नहीं, बल्कि कला,संस्कृति और लोकजीवन का उत्सव है।

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कोनहारा घाट पर हुई थी गज ग्राह की लड़ाई

मेले को लेकर एक प्राचीन किंवदंती भी प्रचलित है। यहां गज और ग्राह की कहानी भी प्रचलित है। कहा जाता है कि भगवान विष्णु के दो द्वारपाल हुआ करते थे। दोनों भगवान विष्णु के अनन्य भक्त थे। दोनों का नाम जय और विजय था। ब्रह्मा के मानस पुत्रों के द्वारा दिये गये श्राप के चलते दोनों धरती पर पैदा हुए। जिनमें से एक ग्राह यानी मगरमच्छ बन गया और दूसरा गज यानी हाथी बन गया। एक दिन कोनहारा घाट पर जब हाथी पानी पीने आया तो, उसे मगरमच्छ ने मुंह में जकड़ लिया और दोनों में युद्ध शुरू हो गया।

वीडियो देखे ( सौजन्य बिहार – पर्यटन विभाग, ट्वीटर)

ये युद्ध कई दिनों तक चलता रहा और काफी मेहनत के बाद भी गज उससे छूट नहीं सका। दोनों की लड़ाई कई वर्षो तक चली। इसके बाद हाथी जब कमजोर पड़ने लगा तो उसने भगवान विष्णु से प्रार्थना की। उसी समय भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र छोड़ा और ग्राह की मौत हो गयी। इसके बाद हाथी मगरमच्छ के जबड़े से मुक्त हो सका भगवान की इस लीला को देखने के बाद सारे देवी-देवता उसी समय इस जगह पर प्रकट हुए। जिसके बाद भगवान ब्राह्मा ने यहां पर दो मूर्तियां लगायी। ये मूर्तियां भगवान शिव और विष्णु की थी। इस वजह से इसको हरिहर नाम दिया गया था।

ग्रामीण हस्त शिल्प और कला का अनोखा संगम 

मेले में पशु, पक्षियों के अलावा गाय,भैस,घोड़े , हाथी के अलग अलग बाजार लगते हैं। इसके अलावा घरेलु उपयोग में आने वाली चीजों संबंधित ग्रामीण हस्त शिल्प निर्मित वस्तुयें भी बिकती है।विश्वप्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला 2025 में  बिहार की सांस्कृतिक धरोहर का भव्य उत्सव, जहाँ व्यापार, कला और परंपरा का अद्भुत संगम होता है।

देश से लेकर विदेश के सैलानी पहुँचते हैं यहां

मेला देखने देश ही नहीं बल्कि विदेश से भी सैलानी पहुँचते हैं। मेले के आकर्षण और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिये पर्यटन विभाग द्वारा भी कई तरह प्रयास किये जा रहे हैं। पर्यटन विभाग के द्वारा उनके ठहराव और आराम के लिये कई तरह के आधुनिक कॉटेज का निर्माण कराया जाता है। जहां सभी आधुनिक सुविधायें उपलब्ध होती है।

कभी मेले की पहचान हुआ करते थे थियेटर

मेले में मनोरंजन के लिये पहले थियेटर की व्यवस्था थी जहाँ कलाकार अपने कला के माध्यम से लोगों का मनोरंजन करते थे और अपनी आजीविका भी चलाते थे। इसके चलते कई दिनों तक मेले मे ठहरे व्यापारियों और धूमने आने वालों के लिये दर्शकों का मनोरंजन होता था। बाद के दिनों में मेले में थियेटर में कला के नाम पर अश्लीलता परोशा जाने लगा जिसके चलते विश्व प्रसिद्ध मेले की बदनामी भी हुई लेकिन प्रशासन की सजगता से अब इस पर लगाम चल चुका है।

मेला बना आकर्षण का केन्द्र

मेले में आकर्षण के लिये कई तरह के माइंड फेस्ट क्विज, क्रॉसवर्ड प्रतियोगिता, मोटिवेशनल टॉक सीरीज, घुड़दौड़, डॉग शो, नौका दौड़ जैसी प्रतियोगिता आयोजित होने लगी से जिससे मेले के प्रति लोगों का झुकाव बढ़े। हालांकि मोबाईल और  मनोरंजन के अन्य साधनों की उपलब्धता के चलते मेले में लोंगो का रुझान घटा है लेकिन ग्रामीण कला और संस्कृति को सहेजता यह मेला अभी भी दर्शकों की बाट जोह रहा है।
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