पटना : बिहार विधानसभा का 106वां स्थापना दिवस समारोह शनिवार को पूरे गरिमामय वातावरण में शुरू हुआ। ऐतिहासिक अवसर पर विधानसभा भवन और परिसर को कोलकाता से मंगाए गए फूलों से सजाया गया, जिससे पूरा परिसर उत्सव के रंग में रंगा नजर आया। लोकतांत्रिक परंपराओं और आधुनिक तकनीक के संगम का यह आयोजन खास आकर्षण का केंद्र बना।
राष्ट्रीय नेताओं की मौजूदगी, भव्य स्वागत
मुख्य समारोह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार मौजूद रहे। विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को अंगवस्त्र और स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया। साथ ही अन्य विशिष्ट अतिथियों का भी अभिनंदन किया गया।

डिजिटल हाउस का उद्घाटन, आधुनिक विधानसभा की झलक
समारोह के दौरान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन (NEVA) के तहत संचालित डिजिटल हाउस का उद्घाटन किया। इस मौके पर ‘सशक्त विधायक-सशक्त लोकतंत्र’ विषय पर चर्चा शुरू हुई, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के वरिष्ठ नेता अपने विचार रख रहे हैं। डिजिटल हाउस को विधायी कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता की दिशा में बड़ा कदम बताया गया।

1921 से 2026 तक का ऐतिहासिक सफर
गौरतलब है कि बिहार विधानसभा की स्थापना सात फरवरी 1921 को हुई थी। सर वाल्टर मोरे की अध्यक्षता में निर्वाचित प्रांतीय परिषद की पहली बैठक आयोजित की गई थी। 106 वर्षों में विधानसभा ने औपनिवेशिक दौर से लेकर आधुनिक लोकतांत्रिक भारत तक का लंबा और ऐतिहासिक सफर तय किया है।

सदन की गरिमा पर जोर, प्रेम कुमार का संदेश
डिजिटल हाउस उद्घाटन के बाद विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव से नहीं, बल्कि संस्थाओं की गरिमा और जनता की सहभागिता से मजबूत होता है। उन्होंने सदस्यों से सकारात्मक आलोचना और सदन की मर्यादा व परंपरा बनाए रखने का आह्वान किया। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने ‘जय श्रीराम’ कहा।

लोकसभा अध्यक्ष ने विधानमंडलों में गरिमा और मर्यादा कम होने पर चिंता व्यक्त की
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आज विधानमंडलों में गरिमा और मर्यादा कम होने पर चिंता व्यक्त की। विधायी संस्थानों की शुचिता बनाए रखने की आवश्यकता पर बल देते हुए बिरला ने कहा कि सदन की गरिमा और मर्यादा बनाए रखना प्रत्येक जनप्रतिनिधि की मूलभूत जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विधायिका लोकतंत्र की एक अत्यंत महत्वपूर्ण संस्था है और इसकी गरिमा का सम्मान और रक्षा की जानी चाहिए।

इस प्रकार की प्रवृत्तियां लोकतांत्रिक निकायों की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं – ओम बिरला
बिरला ने विधायी कार्यवाहियों में व्यवधान और अमर्यादित आचरण की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की प्रवृत्तियां लोकतांत्रिक निकायों की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं। उन्होंने सदस्यों से संवाद, तर्कसंगत वाद-विवाद और रचनात्मक चर्चा पर बल देने का आग्रह किया। उन्होंने आगे कहा कि आलोचना नीतियों और तथ्यों पर आधारित तथा जनकल्याण की भावना से प्रेरित होनी चाहिए। लोक सभा अध्यक्ष ने यह भी कहा कि संसदीय अनुशासन और रचनात्मक आलोचना पर आधारित सार्थक विधायी निगरानी से लोकतंत्र सुदृढ़ होता है। बिरला ने ये विचार आज पटना में बिहार विधान सभा के स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित ‘सशक्त विधायक, सशक्त लोकतंत्र’ कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
इतिहास और संविधान पर चर्चा, अनुच्छेद 104 का मुद्दा
संसदीय कार्य मंत्री विजय चौधरी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अनुपस्थिति की जानकारी दी और उनकी ओर से शुभकामनाएं साझा कीं। उन्होंने इतिहास को याद रखने की जरूरत बताते हुए कहा कि जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरना लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है। इसी दौरान उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 104 को अप्रासंगिक बताते हुए इसे समाप्त करने की मांग लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष रखी।

दिनभर चलेगा लोकतांत्रिक संवाद
दोपहर 1:10 बजे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का अध्यक्षीय भाषण होगा। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा सहित कई वरिष्ठ नेता समारोह को संबोधित करेंगे। स्थापना दिवस के बहाने बिहार विधानसभा एक बार फिर अपने गौरवशाली अतीत और तकनीक-संपन्न भविष्य को एक मंच पर प्रस्तुत कर रही है।
20 माह इस मंदिर का सेवा करने का मौका मिला – डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा
डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि 243 विधायक हैं। 41 लगातार सदन में आएं हैं। पहली बार कम उम्र में हमें बिहार विधानसभा अध्यक्ष बनने का मौका मिला। हम सोच रहे थे कि हम कैसे चलाएंगे। 20 माह इस मंदिर का सेवा करने का मौका मिला। सीएम नीतीश कुमार का सहयोग मिला। हमने भी सभी विधायकों को पूरा सहयोग किया। एक सदस्य ने भगवान राम को काल्पनिक कहा। संविधान के मूल पत्रों में भगवान राम, मां सीता और लक्ष्मण का वर्णन व चित्र है। भगवान बुद्ध समेत कई भगवान की चर्चा है। सभी मूल पत्रों को मंगवाया।

सभापति अवधेश नारायण सिंह बोले- हल्ला और हंगामा नहीं करना चाहिए
बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने कहा कि इस धरती से मैं कहूंगा अगर कोई सशक्त थे कर्पूरी ठाकुर, अनुग्रह बाबू थे। आज हम लोग यहीं होने आए हैं। आज हम संकल्प लें कि सशक्त हो कर जाएं। बिहार के वैशाली से लोकतंत्र सशक्त हुआ। विधायकों का जवाबदेह होना। और न्याय के साथ बिहार के सीएम नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लेकर चल रहे हैं। यहीं कारण है कि जनता विश्वास करती है। बिहार विधानसभा और लोकसभा में प्रतिनिधियों को हल्ला और हंगामा नहीं करना चाहिए। यही कारण है कि समय का सदुपयोग नहीं करने के कारण सही कार्य हो पाता है। आज सभी लोग संकल्प लेकर जाएं और सशक्त लोकतंत्र बनाएं।

इतिहास हमेशा भविष्य बनाने की ताकत देता है – राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश
राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा कि इतिहास हमेशा भविष्य बनाने की ताकत देता हैं। यह बढ़ते बिहार और देश की झलक है। सीएम नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार विकास की ओर अग्रसर हुआ। बिहार का बजट ही बिहार की बढ़ती झलक है। आज सभी टेक्नोलॉजी अपनाया गया है। आज बिहार विधानसभा का पुस्तकालय आज कुछ अलग दिख रहा है। महत्वपूर्ण दस्तावेजों को आनलाइन अपलोड किया जा रहा है। भविष्य में बच्चों को बहुत फायदा होगा। डिजिटल माध्यम से विधायक बेहतर काम कर सकते हैं। बिहार को बढ़ाने में जनप्रतिनिधियों का अहम भूमिका रहा है। जय प्रकाश नारायण भी इस धरती से क्रांति की शुरुआत की। भारत को ईमानदार लोगों की जरूरत है। अंबेडकर साहब ने कहा था कि अगर लोग निजी स्वार्थ को नहीं छोड़ेंगे तो देश फिर गुलाम हो जाएगा।

बिहार से जो भी जीत कर आते हैं,वह बहुत बढ़िया वक्ता होते हैं – केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू
भारत सरकार के केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि आप लोगों के बीच आने का मौका मिला और अच्छा लगा। अध्यक्ष जी ने कहा आपको आना चाहिए, मैं तब पटना आने का फैसला लिया। बिहार और लाइव पहला चैनल है। बिहार से मदद मिलता है। बिहार से जो भी जीत कर आते हैं,वह बहुत बढ़िया वक्ता होते हैं। बिहार से मेरा पूराना लगाव है, वह है बिहार की धरती। बिहार का नहीं हूं, लेकिन बिहार को बहुत अच्छा लगाव है, भगवान बुद्ध की धरती और ज्ञान की धरती है। बौद्ध धर्म का आज भी उतना ही महत्वपूर्ण है। बुद्ध का अवशेष लेकर विदेश जाता हूं। लोग यह देख हमें भी सम्मान देते हैं। आज जो हमें मिल रहा है, वह बिहार के कारण। हम लोग मजबूत होंगे तब ही आप दूसरे को मदद कर सकते हैं। हमारे पास काम है, वह दुनिया में नहीं है।

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अंशु झा की रिपोर्ट
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