गया : गया में आंगनबाड़ी सेविका व सहायिका संघ के द्वारा जो दो दिवसीय धरना गांधी मैदान में दिया गया। उसमें कांड संख्या 691/23 सिविल लाइन में जो 200 सेविका पर केस दर्ज हुआ है। उसी संबंध में आंगनबाड़ी सेविका व सहायिका संघ की जिला मंत्री मंजू कुमारी ने कहा कि हमलोग 35 दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। यह कुंभकर्णी सरकार को पता है कि हमलोग धरना में बैठे हैं पर पता नहीं कहां सो गई है। उनको जगाने के लिए हमलोग जिला में दो दिवसीय गया जिला में धरना देने से पहले नगर निगम सदर एसडीओ और डीएम कार्यालय को चिट्ठी दिया हुआ था।
उन्होंने कहा कि सरकार को पूरी तरह से जानकारी थी कि आंगनबाड़ी सेविका धरना दे रही है। धरनास्थल से हमलोगों को प्रथम दिन भी बात करने के लिए हम लोगों से कोई नहीं आया। लगा कि शायद दूसरे दिन कोई आएंगे। हम लोग मांग पत्र को देने के लिए जब डीएम ऑफिस गए तो कोई कोई नहीं आया। तब हमलोग थक हार के सारी सेविका रोड पर निकले। मांग पत्र देने के लिए सरकार अपनी व्यवस्था को नहीं सुधारी और हम लोगों पर केस दर्ज किया है। सरकार की क्या जिम्मेवारी नहीं थी कि हम लोगों को सुरक्षित जाकर वार्ता करवाती। हमलोग आधा घंटा और एक घंटा सड़कों पर उतरे। सारी जिम्मेवारी हमारे ऊपर आ गई है। जबकि हमारे संघ के तरफ से कोई भी एंबुलेंस नहीं रोका गया था। क्योंकि हम लोगों को खुद पता है कि हमलोग समाज सेवक हैं। किसी की जान जा रही है, इसलिए उसको बचाना बहुत जरूरी है।
आंगनबाड़ी सेविका और सहायिका का कहना है कि स्कूल के बच्चे जो बस में थे उसको भी हमलोगों ने साइड से जगह दे दिया था। हम लोगों को भी पता है कि उसे बस में हमारे बच्चे भी हो सकते हैं। अगर हमारे बच्चे ही एक घंटा दो-दो घंटा भूखे रह जाएंगे तो कैसा लगेगा। इसलिए हमलोग स्कूल बस को रोके ही नहीं थे। हमलोग कतार बनकर निकले थे। डीएम ऑफिस के बाहर भी हमलोगों को एक घंटे खड़ा कर दिया गया और गेट भी लगा दिया गया। सदर एसडीओ बात करने के लिए बहुत देर के बाद आए। उनको बुलाया गया। प्रशासन खुद अपनी गलती नहीं मान रही है। उनकी व्यवस्था दो मिनट में चरमराने लगी। यह कैसी व्यवस्था है। उन्होंने पहले से व्यवस्था क्यों नहीं किया।
आशीष कुमार की रिपोर्ट







