“2016 स्टार्टअप नीति अप्रभावी, 2023 नीति पर भी सस्पेंस: ISUA ने झारखंड सरकार से मांगा जवाब…

Jharkhand: झारखंड विधानसभा में पूछे गए प्रश्न और सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस विभाग द्वारा दिए गए आधिकारिक उत्तर ने राज्य के स्टार्टअप इकोसिस्टम की वास्तविक स्थिति को उजागर कर दिया है। उत्तर से यह स्पष्ट है कि 2016 की स्टार्टअप नीति अब अप्रभावी है, जबकि नई नीति लागू होने के बावजूद ठोस परिणाम सामने नहीं आए हैं।

22 स्टार्टअप्स को 25% प्रोटोटाइप फंड दिए जाने का उल्लेख है…

विभागीय उत्तर में 22 स्टार्टअप्स को 25% प्रोटोटाइप फंड दिए जाने का उल्लेख है। किंतु इंडियन स्टार्टअप एसोसिएशन के पास उपलब्ध दस्तावेजों और स्टार्टअप समुदाय से प्राप्त जानकारी के अनुसार वास्तविकता यह है कि लगभग 15 स्टार्टअप्स को ही सीमित और आंशिक सहायता प्राप्त हुई थी, और वह प्रक्रिया भी पूर्ववर्ती कार्यकाल में प्रारंभ हुई थी। यदि सरकार के अभिलेख भिन्न हैं, तो लाभार्थियों की प्रमाणित सूची, भुगतान की तिथि एवं वितरित राशि सार्वजनिक की जानी चाहिए।

पद रिक्त रहने से गतिविधियाँ प्रभावित हुईं

सबसे गंभीर तथ्य यह है कि विभाग स्वयं स्वीकार करता है कि प्रशासनिक कारणों एवं पद रिक्त रहने से गतिविधियाँ प्रभावित हुईं। यह केवल एक तकनीकी त्रुटि नहीं, बल्कि नीतिगत शिथिलता का संकेत है। पाँच वर्षों तक यदि निर्णय प्रक्रिया ठप रही, तो यह सीधे तौर पर हजारों युवाओं की आकांक्षाओं पर प्रहार है। स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र इंतजार पर नहीं चलता यह समयबद्ध समर्थन और संस्थागत प्रतिबद्धता पर आधारित होता है।

2023 की नई स्टार्टअप नीति लागू होने के बाद भी यदि नए चयन, वित्तीय स्वीकृति या स्पष्ट प्रगति रिपोर्ट सामने नहीं आई है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। राज्य के युवा उद्यमी आज असमंजस में हैं न पुरानी प्रतिबद्धताओं का निस्तारण हुआ, न नई नीति का ठोस क्रियान्वयन दिखाई दे रहा है।

आज झारखंड का स्टार्टअप इकोसिस्टम लगभग निष्क्रिय अवस्था में पहुँच चुका है। अनेक उद्यमी राज्य से बाहर अवसर खोजने को मजबूर हैं। इनक्यूबेशन तंत्र निष्क्रिय है, निवेशकों का विश्वास डगमगा रहा है, और नीति क्रियान्वयन में स्पष्टता का अभाव है। यदि तत्काल पारदर्शी और समयबद्ध कार्रवाई नहीं हुई, तो यह “उद्यमिता प्रोत्साहन” का विषय न रहकर “उद्यमिता पलायन” का उदाहरण बन जाएगा।

इंडियन स्टार्टअप एसोसिएशन  ने राज्य सरकार से किया आग्रह

इंडियन स्टार्टअप एसोसिएशन राज्य सरकार से आग्रह करती है कि लंबित वित्तीय दायित्वों का तत्काल निस्तारण, लाभार्थियों की प्रमाणित सूची का प्रकाशन, नई नीति के अंतर्गत चयन प्रक्रिया की स्पष्ट समयसीमा तथा नियमित प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।

यह वक्त औपचारिक घोषणाओं का नहीं, बल्कि ठोस निर्णयों का है। झारखंड के युवा नवाचार करना चाहते हैं, पर उन्हें भरोसा और समर्थन चाहिए केवल आश्वासन नहीं।

(रथिन भद्र), राष्ट्र्रीय अध्यक्ष, इंडियन स्टार्टअप एसोसिएशन

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