
औरंगाबाद: औरंगाबाद शहर का टिकरी मुहल्ला हादसे का गवाह बन गया। वार्ड 15 निवासी मो रहमद का 8 वर्षीय पुत्र हमजा खेलते-खेलते पैर फिसलकर नाले में गिरा और तेज बहाव में बह गया। 4 दिन बीत जाने के बाद भी मासूम का कोई सुराग नहीं मोहल्ले के सैकड़ों लोग घटनास्थल पर जमा हो गए। पूरे दिन एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और मछुआरे तलाशी में जुटे रहे, लेकिन नतीजा शून्य रहा। इधर, लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
आक्रोशित भीड़ ने जामा मस्जिद के पास सड़क जाम करने की कोशिश की। नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और भीड़ को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन लोगों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी जारी रखी। डीएम श्रीकांत शास्त्री और एसपी अम्बरीष राहुल आवश्यक निर्देश देकर लौटने लगे, तो मोहल्ले की महिलाओं ने उनका रास्ता रोक लिया। महिलाओं का आरोप था अगर कल से ही तेजी से तलाशी का काम होता, तो बच्चा बच सकता था। लेकिन लापरवाही से हमारी संतान बह गई।
महिलाओं की जिद और गुस्से के बीच माहौल इतना गरम हो गया कि थानाध्यक्ष उपेंद्र कुमार सिंह को महिला पुलिस बल बुलाना पड़ा, जिसके बाद ही अधिकारी वहां से निकल पाए और स्थानीय लोगों का कहना है कि यह नाला अब ‘मौत का नाला’ बन चुका है। हर साल इसी जगह एक मासूम की जान जाती है, लेकिन नाला ढकने, सुरक्षात्मक दीवार बनाने या चेतावनी बोर्ड लगाने तक की जहमत प्रशासन और नेताओं ने नहीं उठाई।
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औरंगाबाद से रुपेश की रिपोर्ट




