भोजपुर में ‘कृषि सखी’ हेतु प्राकृतिक खेती पर 5 दिवसीय प्रशिक्षण का शुभारंभ

आरा : कृषि विज्ञान केंद्र भोजपुर (बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर) में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन अंतर्गत ‘कृषि सखी’ के लिए प्राकृतिक खेती विषय पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इस प्रशिक्षण में भोजपुर जिले की जीविका से जुड़ी हुई 20 कृषि सखियां भाग ले रही हैं। जिनका चयन पांच प्रखंड जगदीशपुर, आरा, कोइलवर, बिहियां और संदेश से जिला कृषि विभाग द्वारा किया गया है।

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प्राकृतिक खेती समय की मांग है – डॉ. नीरज कुमार

कार्यक्रम का उद्घाटन भोजपुर के जिला कृषि पदाधिकारी डॉ. नीरज कुमार एवं केंद्र के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. शोभा रानी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर जिला कृषि पदाधिकारी ने कहा कि प्राकृतिक खेती समय की मांग है। यह खेती लागत कम करती है, मिट्टी को स्वस्थ रखती है और किसानों की आय बढ़ाने का एक सशक्त साधन है। जीविका दीदियां गांव-गांव तक इस ज्ञान को पहुंचाकर कृषि क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करके ही हम टिकाऊ खेती की ओर बढ़ सकते हैं – अंसु राधे

इस अवसर पर उपस्थित सहायक निदेशक (रसायन) अंसु राधे ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करके ही हम टिकाऊ खेती की ओर बढ़ सकते हैं। प्राकृतिक खेती के प्रयोग किसानों के स्वास्थ्य व पर्यावरण दोनों की सुरक्षा करेंगे। जीविका के जीविकोपार्जन प्रबंधक शैलेश कुमार ने अपने विचार रखते हुए कहा कि जीविका समूहों के माध्यम से दीदियां प्राकृतिक खेती को जन-जन तक पहुंचाने में अग्रणी रहेंगी। यह प्रशिक्षण उनके लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगा।

5 दिवसीय प्रशिक्षण में जीविका दीदियों को विस्तृत जानकारी दी जाएगी

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख कृषि विज्ञान केंद्र भोजपुर ने कहा कि प्राकृतिक खेती किसानों को आत्मनिर्भर बनाएगी। जीविका दीदियों को प्रशिक्षित कर हम स्थाई कृषि की नींव रख रहे हैं। इस प्रशिक्षण के उपरांत कृषि सखियां अपने क्षेत्र में वापस जाकर प्राकृतिक खेती के महत्व को अन्य किसानों एवं महिलाओं तक पहुंचने की जिम्मेदारी संभालेंगे। रासायनिक खाद और कीटनाशकों की अत्यधिक प्रयोग को रोकने हेतु प्रकृति खेती ही स्थाई विकल्प है। जिस की मिट्टी की उर्वरा शक्ति और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में कामयाबी मिलेगी। प्रशिक्षण का समन्वय डॉ. अजय कुमार मौर्य, वैज्ञानिक (कृषि विज्ञान) एवं डॉ. सचिदानंद सिंह, वैज्ञानिक (कृषि प्रसार) द्वारा किया गया। दोनों ने संयुक्त रूप से कहा कि पांच दिवसीय प्रशिक्षण में जीविका दीदियों को बीजोपचार, जीवामृत, घनजीवामृत, वर्मी कम्पोस्ट, मल्चिंग और फसल विविधीकरण जैसी प्राकृतिक खेती की तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी जाएगी।

‘विधि मिट्टी, जल और वायु के संरक्षण के साथ किसानों की आय को दोगुना करने में सहायक होगी’

इस अवसर पर कृषि विज्ञान केंद्र भोजपुर के वैज्ञानिक डॉ. आलोक भारती (पशु विज्ञान), डॉ. सुप्रिया वर्मा (गृह विज्ञान), डॉ. अनिल कुमार यादव (अनुवांशिकी एवं पादप प्रजनन) और डॉ. विकास कुमार (बागवानी) भी उपस्थित रहे। सभी ने प्राकृतिक खेती के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह विधि मिट्टी, जल और वायु के संरक्षण के साथ किसानों की आय को दोगुना करने में सहायक होगी।

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नेहा गुप्ता की रिपोर्ट

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