झारखंड में साल 2022 में तमाम राजनीतिक उथल-पुथल पर बाबूलाल मरांडी से Exclusive बातचीत

1932 खतियान, नियोजन नीति, रोजगार, ईडी सभी पर खुलकर बोले बाबूलाल

सियासत में 19 कौन है, 20 कौन है इसकी चर्चा अक्सर होती है, लेकिन झारखंड की सियासत 2022 को ज्यादा याद रखेगी. कई बड़ी राजनैतिक-सामाजिक घटनाओं का गवाह रहा है ये साल. अब 2022 अपने अंतिम पड़ाव पर है. 2023 दस्तक दे रहा है. 2024 में लोकसभा के साथ-साथ राज्य में विधानसभा चुनाव भी होने हैं. इस लिहाज से साल 2023 में राजनैतिक-सामाजिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है. बीजेपी ने क्या खोया, क्या पाया और 2023 में क्या पाने की कोशिश होगी, इन तमाम मुद्दों पर झाऱखंड के पहले मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता बाबूलाल मरांडी ने खुलकर बात की News 22 Scope के एडिटर-इन-चीफ गंगेश गुंजन से.

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गंगेश गुंजन- 2022 की सियासत काफी उथल-पुथल वाली रही है. सत्ता पक्ष हो या विपक्ष दोनों अपने-अपने तरीके से साल 2022 को देखेंगे. बाबूलाल मरांडी साल 2022 को किस नजरिए से देखते हैं ? ये साल कितना महत्वपूर्ण है?

बाबूलाल मरांडी- झारखंड राज्य के गठन के बाद 2022 बीता है और अलग राज्य बनने के 22 साल भी पूरे हुए हैं. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में पिछले तीन साल से सरकार चल रही. लेकिन इन्होंने राज्य की जनता को काफी निराश किया है. 2019 में चुनने के बाद लोगों को सरकार से काफी उम्मीदें थी. लोगों को ऐसा लगा था कि नौजवान मुख्यमंत्री हैं, वो झारखंड में कुछ नया, कुछ अच्छा कर दिखाएंगे लेकिन ठीक उसका उल्टा हुआ. इसलिए मैं कहूंगा कि 2022 ही नहीं बल्कि पिछला तीन साल झारखंड के लोगों के लिए काफी निराशाजनक रहा है. चाहे उद्यमी हो, मजदूर हो, किसान हो, नौजवान हो, महिला हो, आदिवासी हो या दलित हो, सभी वर्ग के लोग निराश हुए हैं.

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गंगेश गुंजन- लेकिन सरकार का तो दावा है कि उसने जो-जो वायदे किए थे उसे पूरा करने के लिए काम रही है, खासकर 1932 खतियान का जो मामला है.

बाबूलाल मरांडी- देखिए इन्होने क्या किया ? पहले तो जो काम राज्य सरकार को करना चाहिए वो भी ईमानदारी से नहीं किया. यदि नियुक्ति की बात करें तो 2020 से ही हम लगातार सुन रहे हैं कि ये वर्ष नियुक्ति का रहेगा. सरकार में लाखों लोगों को नियुक्ति देने की बड़ी-बड़ी बातें की लेकिन हाल ही में खत्म हुए विधानसभा सत्र में बीजेपी की ओर से पूछे गए सवाल का सरकार ने जो जवाब दिया वो काफी निराशाजनक है. सरकार ने बताया कि मात्र 357 लोगों की नियुक्ति हुई है. इसी तरह से नियोजन नीति की बात करें तो कोर्ट ने उसे रिजेक्ट कर दिया और अब लड़के सड़क पर हैं.

हमलोग सरकार से शुरू से कहते रहे कि आपकी ये नियोजन नीति अदालत में टिकेगी नहीं. ये कैसे हो सकता है कि अनारक्षित श्रेणी के झारखंड के जो बच्चे बाहर से 10वीं-12वीं पास करेंगे वो नौकरी के हकदार नहीं होंगे. ये बिल्कुल गलत है. आपने हिंदी, अंग्रेजी को समाप्त कर उर्दू को प्रथमिकता दी ये भी गलत किया.

अगर आप 1932 खतियान की बात कर रहे हैं तो उसका भी कोई आधार होना चाहिए. जब केंद्रीय जांच एजेंसी ने पूछताछ के लिए नोटिस दिया तो मुख्यमंत्री ने आनन-फानन में विधानसभा सत्र बुलाकर एक रेगुलेशन पारित कर दिया. चर्चा तक नहीं कराने दिया. ऐसा नहीं हो सकता कि आप प्रोसेस को फॉलो न करें, कह दें कि 1932 लागू हो गया ओर ऐसा हो जाएगा.

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गंगेश गुंजन – आपने ईडी की चर्चा की. कहा तो ये भी जा रहा है कि झारखंड में कोई पार्टी नहीं बल्कि ईडी ही विपक्ष की भूमिका निभा रही है.

बाबूलाल मरांडी- वो अपना चेहरा छुपाने के लिए कुछ तो कहेंगे न. खनन घोटाला साहिबगंज से शुरू हुआ. कई लोग जेल में बंद हैं. इनमें मुख्यमंत्री के विधायक प्रतिनिधि भी शामिल हैं. हमने इस बारे काफी पहले ही झारखंड और बिहार सरकार को पत्र लिख कर जांच का आग्रह किया था क्योंकि अवैध खनन का पत्थर बिहार जा रहा था. ये सब सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर बेहद खतरनाक तरीके से हो रहा था. अगर राज्य सरकार ने खुद जांच की होती तो ईडी को जांच करने की जरूरत नहीं पड़ती. विपक्ष का काम होता है ऐसे मामलों में सरकार को आगाह करना, लेकिन सरकार अगर नहीं सुनती है तो जांच एजेंसियां अपना काम करेंगी.

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गंगेश गुंजन- आरोप तो ये है कि राज्य में गैर भाजपा सरकार है इसलिए जानबूझ कर उसे तंग किया जा रहा है, काम नहीं करने दिया जा रहा है.

बाबूलाल मरांडी- विपक्ष ने अपना काम किया, सरकार को आगाह किया लेकिन सरकार यदि जांच नहीं कराती है तो जांच एजेंसियों के पास भी जाएंगे. इस मामले में भी यही हुआ. अब रांची में ही देखिए. कई जगह जमीन की गड़बड़ी हुई लेकिन कार्रवाई नहीं हुई, जबकि सरकार की ही जांच रिपोर्ट थी. अब कल अगर कहीं और से जांच शुरू होगी तो ये कहेंगे कि गैर भाजपा सरकार है इसलिए परेशान कर रहे हैं.

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गंगेश गुंजन- आज युवा जानना चाह रहा है कि अगर सरकार उनका ख्याल नहीं रख रही या उनकी नहीं सुन रही तो विपक्ष कैसे मदद कर सकता है.

बाबूलाल मरांडी- युवा हमसे मिलते हैं. हम उनकी समस्याओं को सरकार तक पहुंचाते हैं. युवाओं की आवाज में आवाज मिलाते हैं, जनता के बीच भी जाते हैं. विपक्ष इतना ही कर सकता है समाधान तो सरकार को ही निकालना है. सत्र के दौरान विपक्ष विधानसभा में भी जन मुद्दों को उठाता है लेकिन सरकार बहस करने को भी तैयार नहीं है. अब स्थानीयता का ही मामला सामने आया. हम कहते हैं नीति तो पहले बनी हुई थी उसे किसी कोर्ट ने खारिज भी नहीं की थी.

रघुवर दास की सरकार ने 1985 से बनाया था उसे ही चलने देते. जब विश्वनाथ प्रताप सिंह प्रधानमंत्री बने तो उन्होने मंडल कमीशन की रिपोर्ट को लागू किया. ऐसा इसलिए किया गया ताकि केंद्रीय सेवाओं में पिछड़े वर्ग के लोगों को उचित प्रतिनिधित्व मिले. इसके लिए पहले कमीशन बैठाया गया. उसकी रिपोर्ट आई और तब उसे लागू किया. झारखंड सरकार को भी चाहिए था कि स्थानीयता के मुद्दे पर एक आयोग का गठन करती.

आयोग ये देखता कि पिछले 22 सालों में तीसरी और चौथी श्रेणी में जो नियुक्तियां हुई हैं उनमें झारखंड के बच्चों को उचित प्रतिनिधित्व मिला है या नहीं मिला है. यदि नहीं मिला है तब उसके हिसाब से कानून बनाने की जरूरत थी. ये राज्य हित का मामला है इसलिए अगर सरकार चर्चा कराती तो हम भी अपना सुझाव देते. लेकिन सरकार ने तो राजनीति के लिए युवाओं को अंधी गलियों में भटकने के लिए छोड़ दिया. अब तो लड़के लोग भी समझने लगे हैं कि सरकार सचमुच में राजनीति कर रही है.

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गंगेश गुंजन- नेता प्रतिपक्ष का मामला भी तीन साल से अटका हुआ है. क्या इसकी वजह से भी फ्लोर पर दिक्कतें आ रही है ?

बाबूलाल मरांडी- इससे कई मामलों में फर्क पड़ता है. यदि ये मामला सुलझ गया होता तो सदन में मैं मामले को नेता प्रतिपक्ष की हैसियत से उठाता. लेकिन उन्हे मालूम है कि मैं हमेंशा इस तरह के जन मुद्दों को उठाता रहूंगा, इसलिए जानबूझ कर मामले को लटकाया गया. जब झारखंड विकास मोर्चा का विधिवत रुप से बीजेपी में विलय हो गया तो इसके बाद विधानसभा को लिखा गया कि बाबूलाल मरांडी बीजेपी के विधायक हैं. और बाकी दो विधायकों को इंडीपेंडेंट ट्रीट किया जाए. लेकिन सरकार के दबाव में विधानसभा अध्यक्ष ने इस मामले को लटका कर रखा है ताकि मुझे मुखर होकर बोलने से रोका जा सके.

गंगेश गुंजन- 1932 खतियान का मामला उछलने के बाद आदिवासी और अल्पसंख्यकों को लेकर कहा जा रहा है कि एक नया सियासी समीकरण उभर रहा है जिससे बीजेपी के लिए परेशानी खड़ी हो सकती है.

बाबूलाल मरांडी- ऐसी बात नहीं है. बीजेपी को आदिवासियों का अच्छा समर्थन हासिल है. वैसे भी एससी-एसटी को राज्य और केंद्रीय सेवाओं में आबादी के हिसाब से उचित प्रतिनिधित्व मिल रहा है. इसलिए हाल के दिनों में हुए आंदोलनों में उनकी भागीदारी कम दिखी. 1932 खतियान को लेकर ज्यादातर आदिवासी सड़कों पर नहीं उतरे. उन्हे ज़िला स्तर की नौकरियों में उन्हे आबादी के हिसाब से प्रतिनिधित्व मिलता है. झारखंड राज्य के गठन के बाद मैंने ऐसी व्यवस्था कर दी थी. एकीकृत बिहार में भी ऐसी ही स्थिति थी. इसलिए मैं कह रहा हूं कि इस तरह की राजनीति चलेगी नहीं.

गंगेश गुंजन- वैसे तो विपक्ष हमेशा सरकार को कठघरे में खड़ा करता है. लेकिन स्वस्थ्य विपक्ष वही है जो उसके अच्छे कामों की तारीफ भी करे. पिछले तीन सालों में आपको सरकार का कोई काम ऐसा दिखता है जिसे आप कह सकें कि सरकार ने ठीक किया.

बाबूलाल मरांडी- हम तो सरकार से ही पूछते हैं कि आप ही बताओ कि आपने कौन सा काम किया, इन तीन सालों में तो सरकार ये बताने की स्थिति में ही नहीं है.

गंगेश गुंजन- आप प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री रहे हैं. आपने तब क्या सपना देखा था ? क्या आज प्रदेश उस दिशा में जाता दिख रहा है ?

बाबूलाल मरांडी- जब राज्य बना था तो हमलोगों ने तय किया था कि लोगों के लिए और विकास के लिए जो बुनियादी चीजें हैं उसे पूरा करेंगे. इसमें सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्र हैं. हमने काम शुरू किया. आगे भी बीजेपी की जो सरकारें राज्य और केंद्र की सरकार ने इस दिशा में काफी काम किए हैं. बीजेपी की सरकार बनने से पहले ग्रामीण क्षेत्रों में आने-जाने के लिए सड़कें नहीं थी, गांव में लोगों ने बिजली देखी नहीं थी.

जब बीजेपी की सरकार बनी तो गांवों तक सड़कें भी पहुंची, बिजली भी पहुंची. केंद्र में मोदीजी की सरकार बनी तो घर-घर में शौचालय की भी व्यवस्था की जा रही है. गांव के वो लोग जो कभी सपने में भी नहीं सोचते थे उनके यहां भी गैस चूल्हा पहुंचाया जा रहा है. हमलोगों ने इस तरह की तमाम बुनियादी सुविधाओं पर फोकस किया और उसे सुधारा. लेकिन पिछले तीन सालों में क्या हुआ. बीजेपी की पिछली सरकार में राज्य में तीन मेडिकल कॉलेज खोले गये लेकिन इस सरकार ने उसकी बेहतरी के लिए कोई काम नहीं किया. जब-जब राज्य में बीजेपी की सरकार बनती है काम होता है और जब ये लोग आते हैं कमाने में लग जाते हैं.

गंगेश गुंजन- आप अपनी पार्टी और झारखंड के लिए 2023 को कैसे देख पा रहे हैं ?

बाबूलाल मरांडी- 2024 में लोकसभा और विधानसभा दोनों का चुनाव होना है. इसलिए 2023 का साल संगठनात्मक और चुनाव की दृष्टि से पार्टी के लिए काफी महत्वपूर्ण रहेगा.

गंगेश गुंजन- क्या मौजूदा सरकार स्थिर रहेगी ? आपलोगों पर सरकार को अस्थिर करने का आरोप लगता है.

बाबूलाल मरांडी- भविष्यवाणी तो मैं नहीं कर सकता हूं लेकिन मौजूदा सरकार जितने दिनों तक झारखंड की सत्ता में रहेगी, राज्य उतना पीछे जाएगा.

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