सीना ठोक कर पीएम बोले, देश देख रहा एक अकेला कितनों पर भारी

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NEW DELHI: पीएम नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में विपक्ष को करारा जवाब दिया है. विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए उन्होंने अपनी सरकार और उनकी सरकार के कार्यों का लेखा जोखा सदन को बताया. उन्होंने सदन में सीना ठोक कर कहा कि देश देख रहा है कि एक अकेला मोदी कितनों पर भारी पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि देश की सेवा करने निकला हूं राजनीति करने नहीं इसलिए जनता का विश्वास है मेरे साथ. इसी के साथ अपना भाषण खत्म कर रहा हूं.

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पीएम ने कहा- ‘आदिवासियों के कल्याण के लिए किया काम’


प्रधानमंत्री ने कहा कि सदियों से देश के आदिवासी समुदाय वंचित थे. उनके विकास के लिए कोई काम नहीं किया गया. अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के समय में पहली बार जनजातीय मंत्रालय बनाया गया. उनके विकास के लिए अलग से बजट का प्रावधान किया गया. उन्होंने कहा कि 13 हजार गांव देश में ऐसे थे जहां बिजली नहीं थी और वो ऐसे गांव थे जो आदिवासी बहुल क्षेत्र में थे, पहाड़ों पर बसे हुए थे सा नॉर्थ इस्ट के गांव थे.

एनडीए की सरकार ने हर गांव में बिजली पहुंचाने का काम किया. गांव में एक नई जिंदगी की अनुभूति हुई. और देश की व्यवस्था पर उनका विश्वास बढ़ा और ये विश्वास हमने जीता है. उन्होंने कहा कि आदिवासियों के कल्याण के लिए 5 गुणा ज्यादा एलोकेशन हुआ है. 2014 से पहले तक 20-25 हजार करोड़ के आस-पास रहता था. अब 1 लाख 20 हजार करोड़ का प्रावधान किया है. 500 नये एकलव्य विद्यालय स्वीकृत किये हैं. साथ ही 35 हजार शिक्षकों की नियुक्तियां स्वीकृत की है.


’22 घंटे बिजली पहुंचाने में सफल रही है सरकार’


उन्होंने पिछली सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि

पहले नियमित बिजली आपूर्ति नियमित नहीं थी.

बिजली उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने सोलर एनर्जी,

रिनुअल एनर्जी और बिजली के अन्य स्त्रोतों पर भी ध्यान दिया.

और लोगों को 22 घंटे नियमित बिजली उपलब्ध कराने में सफल रही है.

उन्होंने कहा कि हमने राजनीति में फायदे घोटे की बात नहीं सोची.

इसके लिए खर्च किया और आने वाले कल को उज्ज्वल बनाने का काम किया.


‘ऐसी कार्य संस्कृति लेकर आये हैं जो सभी भेदभाव को खत्म कर देगा’


मोदी ने कहा कि हम ऐसी कार्य संस्कृति लेकर आये हैं

जो सभी भेदभाव की गुंजाइशों को खत्म कर देगा.

हमारी सरकार देश के आखिरी पंक्ति में खड़े व्यक्ति को लाभ पहुंचाने

के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है. यही सच्चा सेक्युलरिज्म है. यही सच्ची धर्मनिरपेक्षता है.

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