रांचीः जनजाति सुरक्षा मंच के बैनर तले आज डिलिस्टिंग महारैली का आयोजन किया गया। राजधानी रांची के मोराबादी मैदान में कार्यक्रम का आयोजन किया गया है।

इस रैली में लोकसभा के पूर्व उपाध्यक्ष कड़िया मुंडा, पूर्व न्यायाधीश प्रकाश सिंह उइके, छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री गणेश राम भगत समेत राज्य के कई बड़े नेता भी मौजूद रहे। इसके साथ ही इस महारैली में विभिन्न जनजातियों के लोग भी मौजूद रहें।
डीलिस्टिंग रैली को रोकने को लेकर जिला प्रशासन को कई आवेदन मिले थे। क्रिसमस से ठीक पहले कार्यक्रम को लेकर क्रिश्चियन समुदाय ने सवाल उठाए हैं।
मिशनरियों का आरक्षण बंद होना चाहिए-पूर्व मंत्री गणेश राम भगत
छत्तीसगढ़ के पूर्व मंत्री गणेश राम भगत ने अपने बयान में कहा है कि मिशनरियों का आरक्षण बंद होना चाहिए। धर्म बदलने वाले आदिवासियों का आरक्षण बंद हो। मिशनरी लोग हमारी पहचान खत्म करना चाहते हैं।

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आदिवासियों को गुमराह किया जा रहा है। बाबा कार्तिक उरांव ने इसकी लड़ाई लड़ी है। हमारी पहचान को मिटाने का प्रयास किया जा रहा है। आने वाले दिनों में इससे भी बड़े कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।
आने वाली पीढ़ी हमें कभी माफ नहीं करेगी-कड़िया मुंडा

कड़िया मुंडा ने कहा कि आदिवासी रीति-रिवाजों को छोड़कर अलग धर्म अपनाने वालों को मिलने वाला आरक्षण का लाभ बंद होना चाहिए। सालों पहले ही हमें धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों को आदिवासी की सूची से ही हटा देना चाहिए था। यदि आज भी हम इसी ठीक नहीं करते है तो हमारी आने वाली पीढ़ी हमें कभी माफ नहीं करेगी।
धर्म परिवर्तन करा चुके लोगों को आरक्षण के लाभ से वंचित रखा जाना चाहिए-पूर्व जज प्रकाश सिंह उइके
पूर्व न्यायाधीश प्रकाश सिंह उइके ने कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 341 में स्पष्ट है कि जो कोई भी अनुसूचित जाति के लोगों का धर्म परिवर्तन कराएगा उसका आरक्षण का अधिकार को खत्म कर दिया जाएगा। लेकिन अनुच्छेद 342 के तहत ऐसा प्रावधान नहीं कर पाए।

इसलिए धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों को दोहरी पहचान के साथ दोहरा लाभ मिल रहा है। अनुच्छेद 342 में संशोधन होना चाहिए जिसके तहत जिन लोगों ने आदिवासी संस्कृति छोड़कर दूसरा धर्म अपना चुके हैं उन्हें मिलने वाले आरक्षण के लाभ से वंचित रखा जाना चाहिए।


