खूंटी लोकसभा में होगी कांटे की टक्कर, अर्जुन मुंडा के सामने होंगे ये नेता !

आज हम बात करेंगे धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली खूंटी की. झारखंड की 14 में से 1 लोकसभा सीट खूंटी लोकसभा सीट भी है.

खूंटी लोकसभा सीट वैसे तो भाजपा का गढ़ माना जाता रहा है यहां से भाजपा के कड़िया मुंडा 8 बार सांसद रह चुके हैं और वर्तमान में भी इस सीट पर भाजपा का कब्जा है और भाजपा से अर्जुन मुंडा यहां से सांसद है. बता दें अर्जुन मुंडा ने सबसे कम उम्र में झारखंड के मुख्यमंत्री बनने का गौरव हासिल किया था, अर्जुन मुंडा महज 36 साल की उम्र में झारखंड के मुख्यमंत्री बन गए थे. और वर्तमान में वो केंद्र में मंत्री भी हैं.

अर्जुन मुंडा केंद्रीय कृषि और जनजातीय मामले के मंत्री है.

खूंटी लोकसभा सीट की बात करें तो खूंटी लोकसभा एसटी आरक्षित सीट है और इस क्षेत्र में मुंडा जनजाति की बहुलता है. खूंटी लोकसभा के अंतर्गत सरायकेला खरसावां, सिमडेगा, रांची, खूंटी जिले की विधानसभा सीटें आती हैं.

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2024 के लोकसभा चुनाव में खूंटी में भाजपा ने एक बार फिर से मौजूदा सांसद अर्जुन मुंडा को ही टिकट दिया है लेकिन अब तक इंडी गठबंधन की तरफ से किसी भी प्रत्याशी का नाम फाइनल नहीं किया गया है.

लेकिन इस सीट से गठबंधन की ओर से कांग्रेस के उम्मीदवार ही अर्जुन मुंडा के सामने होंगे. अब कांग्रेस पार्टी की तरफ से कई उम्मीदवारों के नाम टिकट की रेस में शामिल हैं.

जिसमें पिछली बार के कांग्रेस के प्रत्याशी काली चरण मुंडा, समाजसेवी दयामणी बारला, घाटशिला से पूर्व विधायक प्रदीप बालमुचू और कोलेबिरा विधायक नमन विक्सल कोंगाडी का नाम शामिल है.

अब इन चारों में कालीचरण मुंडा टिकट की रेस में सबसे आगे नजर आ रहे हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव में कालीचरण मुंडा ने अर्जुन मुंडा को कांटे की टक्कर दी थी. कालीचरण महज 1445 वोटों से अर्जुन मुंडा से हारे थे.

अगर कांग्रेस ने इस बार भी कालीचरण मुंडा को टिकट दिया तो पिछली चुनाव को देखते हुए इस बार भी भाजपा-कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला होगा. हालांकि जब से दयामनी बारला ने कांग्रेस का हाथ थामा है, तब से खूंटी सीट पर उनकी भी दावेदारी मानी जा रही है और खूंटी की जनता भी दयामनी बारला को प्रत्याशी के रुप में देखना चाहती है.

लेकिन अब टिकट किसे मिलेगा,ये तो आने वाले समय में ही पता चल पाएगा.

खूंटी लोकसभा के अंतर्गत विधानसभा की 6 सीटें आती हैं. जिसमें खरसावां, तमाड़, तोरपा, खूंटी, सिमडेगा और कोलेबिरा की विधानसभा सीटें हैं.

इन 6 विधानसभा की सीटों में 4 सीटें इंडी गठबंधन के पास है और 2 सीटों पर भाजपा का कब्जा है.

खरसावां और तमाड़ में झारखंड मुक्ति मोर्चा के विधायक हैं. खरसावां से दशरथ गगराई और तमाड़ में विकास कुमार मुंडा विधायक हैं. वहीं सिमडेगा और कोलेबिरा में कांग्रेस के भूषण बारा और नमन विक्सल कोंगाडी विधायक है. तोरपा से भाजपा के कोचे मुंडा और खूंटी से नीलकंठ मुंडा विधायक हैं.

खूंटी लोकसभा सीट के इतिहास पर नजर डालें तो खूंटी लोकसभा में 1962 में चुनाव शुरु हुए और 1962 में झारखंड पार्टी से जयपाल सिंह मुंडा यहां से सांसद बने. और दूसरी लोकसभा चुनाव यानी 1967 में भी झारखंड पार्टी से जयपाल सिंह मुंडा ने अपनी जीत दुहराई और दोबारा सांसद बने.

वहीं 1971 में तीसरी बार भी झारखंड पार्टी की जीत हुई लेकिन इस बार निराल एनेम होरो यहां से सांसद बने.
1977 में खूंटी में जनता पार्टी से कड़िया मुंडा जीते.

जिसके बाद अगले चुनाव में यानी 1980 में झारखंड पार्टी ने एक बार फिर वापसी की और निराल एनेम होरो ने खूंटी सीट पर परचम लहराया.

1984 में खूंटी से कांग्रेस की जीत हुई और साइमन तिग्गा यहां से सांसद बने.

जिसके बाद खूंटी में भारतीय जनता पार्टी के स्वर्णिम युग की शुरुआत हुई.

भाजपा ने 1989 में पहली बार खूंटी में खाता खोला और लगातार 5 बार खूंटी लोकसभा सीट में अपना कब्जा किया. 1989 को बाद 1991,1996, 1998 और 1999 में भाजपा से कड़िया मुंडा लगातार 5 बार सांसद बने.

लेकिन 2004 में कांग्रेस ने भाजपा की जीत को रोक दिया और सुशीला केरकेट्टा यहां से पहली महिला सांसद बनी.
जिसके बाद भाजपा से कड़िया मुंडा ने अपनी हार का बदला लिया और लगातार दो बार 2009 और 2014 में इस सीट से जीत दर्ज की.

लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने खूंटी सीट से अर्जुन मुंडा पर भरोसा जताया और उन्हें मैदान में उतारा हालांकि कड़िया मुंडा की तरह अर्जुन मुंडा ने भी भाजपा की जीत बरकरार रखी और 2019 में खूंटी लोकसभा जीतकर अर्जुन मुंडा सांसद बने.

हालांकि अर्जुन मुंडा ने 2019 में कांग्रेस प्रत्याशी कालीचरण मुंडा से काफी कम वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी.
अब 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए भी भाजपा ने अर्जुन मुंडा पर ही भरोसा जताया है. अब देखना होगा कि अर्जुन एक बार और भाजपा को जीत दिला पाते हैं या इस बार यह सीट किसी और की होगी.

खूंटी में अर्जुन मुंडा के किले को भेदने वाले क्या कालीचरण मुंडा होंगे या दयामनी बारला ?

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