शशांक शेखर की रिपोर्ट
हजारीबाग: झारखंड में भाजपा की राजनीत जिस घर में तय होती थी आज उसे घर पर भाजपा का एक झंडा तक नहीं है .जिसकी दीवारें कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जय घोष से भरा होता था वहां एक पोस्ट भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नहीं है.
सुनने में यह बात तो अजीबोगरीब जरूर लग रहा है लेकिन यह वस्तु स्थिति है हजारीबाग के डेमोटांड़ स्थित ऋषभ वाटिका की है .ऋषभ वाटिका देश के पूर्व वित्त एवं विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा का आवास है .
जहां से 25 सालों तक भाजपा की राजनीति को झारखंड में दशा और दिशा तय की गई. यशवंत सिन्हा के कार्यकाल में उनके आवास में कई बड़े नामचित नेता भी पहुंचे. यही नहीं वित्त मंत्री के दौरान देश की वित्त की भी चर्चा यहां से हुई.
उनके बाद उनके बेटे जयंत सिन्हा जब हजारीबाग से सांसद बने तो भी यह आवास भाजपा नेताओं से गुलजार रहा. जहां बाबूलाल मरांडी ,दीपक प्रकाश, अर्जुन मुंडा से लेकर कई बड़े नेता यहां पहुंचे.
जहां से देश समेत झारखंड की राजनीति पर चर्चा कि गई . आज वहां इंडिया गठबंधन के नेताओं का आना-जाना लगा हुआ है .गाड़ी के काफिले में कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा का बैनर लगा हुआ है.
कहां जाए जिस आवास से भाजपा राज्य भर में राजनीति की रूपरेखा तय करती थी वहां से भाजपा साफ हो रही है. वाजपेई काल में यशवंत सिन्हा भाजपा के वरिष्ठ और गद्दावर नेता थे .उनकआवास कांग्रेस पार्टी का केंद्र बिंदु बनता जा रहा है.
आखिर ऋषभ वाटिका में ऐसा क्या घटना घटी वहां से भाजपा का झंडा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर हट गई .इसके पीछे का कारण जयंत सिन्हा का टिकट काटना है.
जयंत सिन्हा का टिकट कटा तो वहां भाजपा की जगह इंडिया गठबंधन के नेता सक्रिय हुए .अभी भी सांसद जयंत सिन्हा पार्टी के सदस्य हैं. लेकिन चुनावी प्रक्रिया से वह कोसों दूर है.
मनीष जायसवाल उम्मीदवार बनने के बाद जनसंपर्क अभियान में जुटे हुए हैं,तो जयंत सिन्हा कहीं भी नहीं है. यह भी यह बताता है कि कहीं ना कहीं उनकी नाराजगी अभी तक पार्टी के खिलाफ है. उनके पिता भी कहते हैं कि जयंत सिन्हा का टिकट कैसे काटा यह समझ के परे है.
इस पूरे प्रकरण में हजारीबाग भाजपा जिला अध्यक्ष विवेकानंद सिंह क्या कहना है कि ऋषभ वाटिका यशवंत सिन्हा का आवास है अगर वह झंडा बैनर हटाते हैं तो यह उनकी मर्जी साथ ही साथ उनका कहना है कि इस पूरे प्रकरण की जानकारी पार्टी आलाकमा भी है.
झारखंड में ऋषभ वाटिका का मतलब भाजपा का दफ्तर कहा जाता था . आज वह जगह पार्टी के लिए ही अनजान हो गया है. कहा जाए तो 25 सालों तक जिस परिवार ने झारखंड में भाजपा के लिए काम किया उसके आवास से एक झंडा तक भाजपा का नहीं है.स


















