आज हम बात करेंगे बिहार की नालंदा लोकसभा सीट की. नालंदा और सीएम नीतीश कुमार को एक-दूसरे का पर्याय माना जाता है. सीएम नीतीश कुमार भी यहां से एक बार सांसद रह चुके हैं 1999 के लोकसभा चुनाव से नालंदा सीट पर अब तक कोई भी जदयू का पत्ता काटने में सफल नहीं हो पाया है.
इस बार नालंदा में जदयू से वर्तमान सांसद कौशलेंद्र कुमार के सामने भाकपा माले के संदीप सौरभ यादव को इंडिया गठबंधन ने टिकट दिया है. अब संदीप सौरभ नीतीश के गढ़ में परचम लहरा पाते हैं या नहीं ये आने वाले समय में ही पता चल पाएगा.
संदीप सौरभ ने छात्र जीवन से ही राजनीति में कदम रखा और जेएनयू से छात्र नेता के रुप में सामने आए. 2017 में उन्होंने एक्टिव पॉलिटिक्स में कदम रखा. 2020 में पालीगंज के विधानसभा चुनाव सीट से उन्होंने जीत दर्ज की. अब संदीप को पार्टी की ओर लोकसभा का टिकट मिलने के बाद उनका कद बढ़ गया है लेकिन वो रेस में कहां तक पहुंच पाते हैं ये तो 4 जून को ही पता चलेगा.
नालंदा के जातीय समीकरण पर गौर करें तो नालंदा लोकसभा सीट पर कुर्मी जाति के वोटर्स की संख्या ज्यादा है. इस सीट पर कुर्मी वोटर्स 24 प्रतिशत से ज्यादा हैं. इसके अलावा यादव मतदाता 15 प्रतिशत और मुस्लिम वोटर्स लगभग 10 प्रतिशत हैं.

नालंदा लोकसभा के अंतर्गत विधानसभा की 7 सीटें आती हैं. जिसमें अस्थावां, बिहारशरीफ, राजगीर, इस्लामपुर, हिलसा, नालंदा और हरनौत है. विधानसभा क्षेत्रों में भी जदयू का दबदबा है. यहां 5 सीटें जदयू के पास है वहीं 1 सीट पर बीजेपी और1 सीट राजद के कब्जे में है.
अस्थावां में जदयू से जीतेंद्र कुमार विधायक हैं वहीं राजगीर में भी जदयू के कौशल किशोर का कब्जा है. हिलसा में कृष्णमुरारी शरण जदयू से, नालंदा में भी जदयू से श्रवण कुमार विधायक हैं. हरनौत में हरि नारायण सिंह भी जदयू से विधायक हैं. बिहार शरीफ में भाजपा का कब्जा है और सुनील कुमार यहां से विधायक हैं. इस्लामपुर में राकेश कुमार रौशन राजद के विधायक हैं.
नालंदा लोकसभा सीट की इतिहास पर नजर डालें तो इस सीट पर शुरुआती दौर में कांग्रेस का बोलबाला रहा लेकिन अब नालंदा सीट पर जदयू का कब्जा है.
1957 में कैलाश पति सिंहा ने कांग्रेस की टिकट से पहली बार जीत हासिल की.
1962 में कांग्रेस से सिद्धेश्वर प्रसाद जीते. सिद्धेश्वर प्रसाद ने 1967 और 1971 में जीत की हैट्रिक लगाई और कांग्रेस की टिकट से जीतकर तीनों टर्म दिल्ली पहुंचे.
1977 में बीरेंद्र प्रसाद ने कांग्रेस की विजय रथ को रोका , बीरेंद्र प्रसाद ने नालंदा में जनता पार्टी का परचम लहराया.
1980 के लोकसभा चुनाव में यह सीट भारतीय कम्युनिष्ठ पार्टी के झोली में गई और विजय कुमार यादव सांसद बने.
1984 में विजय कुमार यादव ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के टिकट से दुबारा जीत दर्ज की.
1989 के चुनाव में कांग्रेस ने वापसी की, इस बार कांग्रेस से राम स्वरुप प्रसाद जीते.
1991 में विजय कुमार यादव ने नालंदा में भारतीय कम्युनिष्ठ पार्टी को जीत दिलाई.
1996 और 1998 में जॉर्ज फर्नांडिस ने नालंदा में लगातार दो बार समता पार्टी से जीत दिलाई.
1999 में नालंदा से जॉर्ज फर्नांडिस ही तीसरी बार सांसद बने.
2004 में सीएम नीतीश कुमार ने जदयू की टिकट से जीत हासिल की .
2009, 2014,2019 में कौशलेंद्र कुमार ने जदयू के टिकट से जीत की हैट्रिक लगाई.
2024 के लोकसभा चुनाव के लिए भी नीतीश कुमार ने मौजूदा सांसद कौशलेंद्र कुमार को चौथी बार अपना प्रत्याशी बनाया है. कौशलेंद्र कुमार के सामने भाकपा माले ने संदीप सौरभ को टिकट दिया है. अब नालंदा में जदयू की जीत बरकरार रहेगी या नहीं ये तो 4 जून को ही पता चल पाएगा.


















