रामनवमी पर पीएम ने ममता को फिर घेरा, बंगाल सरकार ने घोषित की छुट्टी

कोलकाता : लोकसभा चुनाव में इस बार पश्चिम बंगाल में गत दिनों संदेशखाली में हिंसा और महिलाओं के साथ प्रताड़ना के मामले के बाद भाजपा जहां लगातार आक्रामक है, वहीं राज्य की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस फूंक-फूंक कर जवाब में काफी सतर्कता के साथ सियासी कदम उठा रही है। मंगलवार को चुनाव प्रचार पर निकले पीएम नरेंद्र मोदी ने बिहार के बाद पश्चिम बंगाल पहुंचे तो सधे हुए लहजे में तृणमूल कांग्रेस पर ऐसे बाण चलाए कि शाम होते-होते मतदान में हिंदुत्व के मुद्दे पर एकतरफा ध्रुवीकरण के अंदेशे को खारिज करने के लिए अहम पहल की। पश्चिम बंगाल में पहली बार रामनवमी के मौके पर सरकारी छुट्टी घोषित करते हुए गत माह जारी हुई अधिसूचना की जानकारी नए सिरे से सार्वजनिक की गई है। बालुरघाट के बाद राज्य की राजधानी कोलकाता के पश्चिम में स्थित हावड़ा पहुंचे पीएम मोदी ने रामनवमी के मुद्दे पर ही तृणमूल कांग्रेस की सरकार पर हमला बोलते हुए हिंदु मतदाताओं के साथ होने वाले सरकारी भेदभाव को आड़े हाथ लिया था।

रामनवमी पर बंगाल के स्कूल-कालेजों में छुट्टी घोषित

राज्य सरकार ने गत मार्च माह के पहले हफ्ते में ही इस संबंधी जानकारी दी थी और अब इसे फिर से सार्वजनिक किया गया है। बता दें कि पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा और सरस्वती पूजा बड़े त्योहार के रूप में मनाए जाते हैं। यहां तक की छठ पर भी सार्वजनिक अवकाश होता है लेकिन रामनवमी पर राज्य में पहले अवकाश नहीं होता था। सियासी हलके में माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के हमलों से सतर्क ममता सरकार ने रक्षात्मक रवैया अपनाते हुए बंगाल में पहली बार रामनवमी की छुट्टी घोषित करने का फैसला लिया है। बाकायदा इस छुट्टी के लिए राज्य सरकार के जारी अधिसूचना का हवाला दिया जा रहा है। जारी अधिसूचना के अनुसार, बुधवार 17 मार्च को रामनवमी को सभी सरकारी कार्यालय और स्कूल व कॉलेज बंद रहेंगे। रामनवमी पर छुट्टी के फैसले को ममता सरकार के डैमेज कंट्रोल के तौर पर देखा जा रहा है। रामनवमी पर राज्य में पहले अवकाश नहीं होता था।

पीएम ने बंगालवासियों को दी रामनवमी की बधाई

मंगलवार को हावड़ा की चुनावी जनसभा में रामनवमी और रामलला का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि आजाद भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा होगा कि रामनवमी पर रामलला अयोध्या स्थित अपने भव्य मंदिर में विराजमान हैं। मुझे पता है कि हर वर्ष की तरह इस साल भी ममता सरकार ने राम नवमी समारोह को रोकने की पूरी कोशिश की है। उन्होंने समारोह को रोकने के लिए कई साजिशें रची हैं। लेकिन जीत हमेशा सत्य की ही होती है। इसलिए अदालत ने रामनवमी के जुलूस के लिए अनुमति दे दी है। कल रामनवमी के अवसर पर पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ भव्य जुलूस निकाला जाएगा। मैं बंगाल के अपने सभी भाइयों और बहनों को इस अवसर पर बधाई देता हूं।

डैमेज कंट्रोल में लगातार जुटी हैं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी

इसी क्रम में ध्यान देने वाली बात यह है कि राज्य में बीते विधानसभा चुनाव तक जय श्रीराम के नारे को सुनकर ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भड़क जाती थीं। गत विधानसभा चुनाव के दौरान कई घटनाएं हुई थीं जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को देखकर सड़क किनारे कुछ लोगों ने जय श्रीराम का नारा लगाया तो तुरंत अपना काफिला रोककर मुख्यमंत्री ने नारा लगाने वालों की क्लास लगा दी थी। बाद में पिछले साल हावड़ा के शिवपुर और हुगली जिले के रिसड़ा में रामनवमी जुलूस पर हमले के बाद हिंसा भी भड़क उठी थी। उसको लेकर भी भाजपा ममता सरकार पर हमलावर रही है।

लेकिन अब इस लोकसभा चुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी बदली- बदली दिख रही हैं। विशेषकर हिंदू वोटों के लिए वो काफी मुखर हो गईं हैं। बंगाल में भाजपा लगातार मजबूत होते देख तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो सतर्क हैं। वह इस बार जय श्रीराम के नारे पर नाराजगी नहीं दिखा रही हैं। इसके पीछे एक कारण अयोध्या में राम मंदिर का बनना भी है जिसके उद्घाटन समारोह का हिस्सा न बनकर विपक्ष ने जो गलती की थी उसमें ममता बनर्जी भी शामिल थीं। बता दें कि तब भी डैमेज कंट्रोल  के लिए ममता बनर्जी ने पहल की थी। तब बंगाल एकमात्र राज्य था जहां राम मंदिर के उद्घाटन के दिन मुख्यमंत्री ने सर्वधर्म रैली निकाली थी।

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